समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली, 19 अगस्त :आयकर विभाग ने देशभर में बड़ी कार्रवाई करते हुए संदिग्ध विदेशी रेमिटेंस के मामलों की गहन जांच शुरू की है। पिछले तीन वर्षों में भारी मात्रा में विदेशी मुद्रा विदेश भेजने वाली कई संदिग्ध संस्थाओं की पहचान की गई है। ग्राउंड इंटेलिजेंस और डेटा विश्लेषण के आधार पर यह कार्रवाई की गई।
जांच में सामने आया कि बहुत-सी फर्जी चैरिटेबल ट्रस्ट और शेल कंपनियां फर्जी दान के आधार पर विदेश फंड भेज रही थीं। प्रारंभिक जांच में पाया गया कि ये संस्थाएं या तो आयकर रिटर्न दाखिल नहीं कर रही थीं या बहुत कम टर्नओवर दिखा रही थीं, जबकि विदेश भेजी गई रकम बहुत बड़ी थी। रेमिटेंस का घोषित उद्देश्य—जैसे माल ढुलाई, सॉफ्टवेयर आयात या परामर्श शुल्क—असल लेन-देन से मेल नहीं खाता था।
जांच से यह भी स्पष्ट हुआ कि ये कंपनियां अपने नामित पते से संचालन नहीं कर रही थीं। फॉर्म 15CB प्रमाणपत्र जारी करने वाले प्रोफेशनल्स की भूमिका भी संदेह के घेरे में है, क्योंकि अधिकांश प्रमाणपत्र एक छोटे समूह द्वारा जारी किए गए थे। इन प्रमाणपत्रों के जरिए विदेशी लेन-देन की वैधता और टैक्स देनदारी की जांच होनी थी, लेकिन अब यह सवाल उठ रहा है कि क्या अकाउंटेंट्स ने पर्याप्त सतर्कता बरती थी।
18 अगस्त 2026 को विभाग ने शेल कंपनियों, उनसे जुड़े व्यक्तियों और फॉर्म 15CB जारी करने वाले प्रोफेशनल्स पर केंद्रित राष्ट्रव्यापी जांच अभियान शुरू किया। अब तक 394 संस्थाएं (जिनमें 117 सीमावर्ती राज्यों में) और 36 प्रोफेशनल्स जांच के दायरे में हैं।
आयकर विभाग ने सभी अकाउंटेंट्स को सतर्कता, प्रोफेशनल जजमेंट और सभी तथ्यों की गहन जांच करने की सलाह दी है, ताकि कर प्रणाली में भरोसा बना रहे।
फिलहाल जांच जारी है, और आयकर विभाग ने विदेशी रेमिटेंस चैनल के दुरुपयोग पर पूरी नजर रखने का दावा किया है।