समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली, 19 अगस्त : अमेरिकी बॉन्ड बाजार में वैश्विक आर्थिक संकट गारा गया है ।अमेरिकी ट्रेजरी और बॉन्ड मार्केट, रिकॉर्ड लेवल के कर्ज और बढ़ती ब्याज दरों के चलते बड़े दबाव में हैं।
अमेरिका पर फिलहाल $40 ट्रिलियन डॉलर से अधिक कर्ज है, जिसे चुकाने के लिए सरकार को अब पुराने कर्ज की तुलना में अधिक ब्याज दरों पर नया कर्ज लेना पड़ रहा है। इसके बावजूद अमेरिकी बॉन्ड की वैश्विक मांग घट रही है, जिससे अमेरिका के लिए कर्ज जुटाना और कठिन हो गया है।
अंतरराष्ट्रीय तनाव, खासकर मध्य पूर्व और ईरान के कारण, ऊर्जा और डीजल की वैश्विक कीमतें बढ़ रही हैं। साथ ही, अमेरिका का स्ट्रेटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व भी न्यूनतम स्तर पर पहुंच गया है, जिससे ऊर्जा संकट और महंगाई का खतरा बढ़ सकता है।
फेडरल रिजर्व के लिए मौजूदा स्थिति एक बड़ी चुनौती है—अगर ब्याज दरें बढ़ाई जाती हैं तो कर्ज की लागत बढ़ जाती है, और घटाई जाती हैं तो महंगाई बेकाबू हो सकती है। वहीं, अमेरिका के प्रमुख बॉन्ड खरीदार रहे चीन और जापान अब अमेरिकी कर्ज के बजाय सोना खरीदने पर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं।
अमेरिकी ब्याज दरों के बढ़ने से भारतीय बाजार समेत कई उभरती अर्थव्यवस्थाओं से पूंजी अमेरिका जा सकती है, जिससे रुपया कमजोर हो सकता है। भारत सरकार और आरबीआई ने GIFT सिटी, FCAR अकाउंट्स और NRI निवेश को बढ़ावा देने जैसे उपाय अपनाए हैं ताकि भारतीय अर्थव्यवस्था को स्थिर रखा जा सके। मौजूदा वैश्विक वित्तीय हालात में निवेशकों और नीति-निर्माताओं को सतर्क रहने की जरूरत है।