तमिलनाडु में बड़ा फैसला, परांदूर एयरपोर्ट प्रोजेक्ट रद्द
किसानों के हितों और पर्यावरण की रक्षा के लिए टी टीके सरकार ने लिया ऐतिहासिक निर्णय, चेन्नई एयरपोर्ट के विस्तार पर होगा जोर।
- तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसफ विजय ने विधानसभा में घोषणा की कि उनकी सरकार परांदूर में प्रस्तावित नए ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट प्रोजेक्ट को रद्द कर रही है।
- यह फैसला स्थानीय किसानों और निवासियों के भारी विरोध और कृषि भूमि व जल स्रोतों को बचाने की मांग को ध्यान में रखते हुए लिया गया है।
- सरकार अब न्यूनतम नुकसान वाले वैकल्पिक स्थानों की तलाश कर रही है और इसके साथ ही चेन्नई के मीनांबक्कम एयरपोर्ट के विस्तार पर जोर दिया जाएगा।
समग्र समाचार सेवा
चेन्नई: तमिलनाडु की राजनीति और विकास के मोर्चे पर एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। राज्य के मुख्यमंत्री सी. जोसफ विजय ने विधानसभा में एक महत्वपूर्ण घोषणा करते हुए स्पष्ट किया कि उनकी सरकार ने कांचीपुरम जिले के परांदूर में प्रस्तावित नए ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट प्रोजेक्ट को पूरी तरह से बंद (abandon) करने का फैसला किया है। यह कदम ऐसे समय पर उठाया गया है जब स्थानीय किसान और ग्रामीण लंबे समय से इस परियोजना के खिलाफ आंदोलन कर रहे थे।
क्यों लिया गया परांदूर एयरपोर्ट को रद्द करने का फैसला?
परांदूर में प्रस्तावित एयरपोर्ट परियोजना पिछले कई वर्षों से विवादों और चर्चाओं में थी। इस परियोजना के कारण बड़े पैमाने पर उपजाऊ कृषि भूमि के अधिग्रहण और स्थानीय लोगों के विस्थापन का खतरा मंडरा रहा था। इसके अलावा, पर्यावरणविदों ने भी यहाँ के स्थानीय जल निकायों और पारिस्थितिकी तंत्र (Ecology) पर पड़ने वाले बुरे प्रभावों को लेकर चिंता जताई थी।
मुख्यमंत्री विजय ने अपने संबोधन में कहा कि किसानों और आम नागरिकों की आजीविका को दांव पर लगाकर किसी भी विकास कार्य को आगे नहीं बढ़ाया जा सकता। उन्होंने याद दिलाया कि वह पहले भी आंदोलित किसानों के बीच गए थे और उन्होंने वादा किया था कि सरकार बनने के बाद जनता के हितों की रक्षा की जाएगी। इस फैसले के पीछे का मुख्य उद्देश्य कृषि भूमि को बचाना और स्थानीय निवासियों के अधिकारों की सुरक्षा करना है।
जनता से किया गया वादा और पुराना संघर्ष
मुख्यमंत्री सी. जोसफ विजय ने याद किया कि उन्होंने जनवरी 2025 में Eganapuram और आसपास के 12 गाँवों का दौरा किया था, जहाँ लोग इस एयरपोर्ट प्रोजेक्ट के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे थे। उन्होंने उस दौरान भी जनता को आश्वासन दिया था कि वे उनके साथ मजबूती से खड़े हैं। रिपोर्ट के अनुसार, अक्टूबर 2024 में विक्रवांडी की एक जनसभा में भी उन्होंने इस परियोजना पर पुनर्विचार करने की बात कही थी। अब विधानसभा में अपने इस कदम से उन्होंने अपने चुनावी वादे को अमलीजामा पहनाया है।
चेन्नई के मीनांबक्कम एयरपोर्ट का होगा विस्तार
हालांकि परांदूर प्रोजेक्ट को रद्द कर दिया गया है, लेकिन सरकार ने यह भी माना कि राज्य की बढ़ती आर्थिक गतिविधियों, औद्योगिक विकास और यात्री संख्या (Passenger Traffic) को देखते हुए बेहतर विमानन बुनियादी ढांचे की जरूरत है। इस चुनौती से निपटने के लिए सरकार ने चेन्नई के मौजूदा मीनांबक्कम एयरपोर्ट (Meenambakkam Airport) के आधुनिकीकरण और विस्तार की योजना बनाई है।
मुख्यमंत्री ने सदन को बताया कि मीनांबक्कम एयरपोर्ट पर चल रहे टर्मिनल निर्माण कार्यों के पूरा होने के बाद इसकी क्षमता में भारी बढ़ोतरी होगी। नए टर्मिनलों और बेहतर सड़क संपर्क (Access Roads & Flyovers) के जरिए यात्रियों को उच्च स्तर की सुविधा प्रदान की जाएगी ताकि जब तक वैकल्पिक व्यवस्था न हो, तब तक यातायात का दबाव आसानी से संभाला जा सके।
वैकल्पिक स्थलों की तलाश और तकनीकी अध्ययन
सरकार पूरी तरह से विकास के खिलाफ नहीं है, बल्कि उसका जोर संतुलित विकास पर है। मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि राज्य के औद्योगिक और विमानन विकास को गति देने के लिए अब उन वैकल्पिक स्थलों की तलाश की जाएगी जहाँ कृषि भूमि और रिहायशी इलाकों को कम से कम नुकसान पहुंचे।
विशेषज्ञों और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ कई दौर की उच्चस्तरीय बैठकों के बाद कुछ संभावित वैकल्पिक जमीनों की पहचान की गई है। इन सभी वैकल्पिक स्थानों पर अंतिम मुहर लगाने से पहले कड़े तकनीकी और पर्यावरणीय फिजिबिलिटी स्टडी (Feasibility Studies) किए जाएंगे ताकि भविष्य में किसी प्रकार की समस्या का सामना न करना पड़े।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएं और विरोध के स्वर
इस फैसले के सामने आने के बाद राज्य की राजनीति गरमा गई है। विपक्षी दलों, विशेषकर द्रमुक (DMK) की ओर से तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिली हैं। पूर्व मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने इस फैसले की आलोचना करते हुए कहा कि इस तरह की परियोजनाओं को रद्द करने से राज्य की प्रगति और निवेश के अवसरों पर नकारात्मक असर पड़ सकता है। इसके विपरीत, किसान संगठनों और कई स्थानीय राजनीतिक दलों ने इस फैसले का जोरदार स्वागत किया है और इसे आम जनता व किसानों की बड़ी जीत करार दिया है।