दिल्ली हाई कोर्ट का सेबी को निर्देश, स्काईवेज मामले में फैसला लें

यूके की पीजी पेपर कंपनी के गंभीर आरोपों पर हाईकोर्ट सख्त, स्काईवेज एयर सर्विसेज के आईपीओ और फ्रेट फ्रॉड मामले में दो सप्ताह में विचार करने के आदेश।

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  • दिल्ली हाई कोर्ट ने सेबी (SEBI) को दो हफ्तों के भीतर स्काईवेज एयर सर्विसेज लिमिटेड के आईपीओ और पीजी पेपर कंपनी के अभ्यावेदनों पर निर्णय लेने का निर्देश दिया है।
  • यूके की पीजी पेपर कंपनी ने स्काईवेज ग्रुप पर फ्रेट इनवॉइस में 40% से 300% तक की भारी हेराफेरी और लगभग ₹51.98 करोड़ की धोखाधड़ी के गंभीर आरोप लगाए हैं।
  • इस मामले में दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) द्वारा FIR दर्ज की जा चुकी है और स्काईवेज एयर का AEO-LO स्टेटस भी निलंबित किया गया है।

समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली, 27 अगस्त: भारतीय कॉरपोरेट जगत और शेयर बाजार से एक बहुत बड़ी और अहम कानूनी खबर सामने आ रही है। Delhi High Court ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण निर्देश जारी करते हुए भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) को आदेश दिया है कि वह यूके की प्रतिष्ठित कंपनी ‘पीजी पेपर कंपनी लिमिटेड’ (PG Paper Company Ltd) द्वारा प्रस्तुत किए गए अभ्यावेदनों (Representations) पर कानून के अनुसार दो सप्ताह के भीतर विचार कर उचित निर्णय ले। यह पूरा मामला स्काईवेज एयर सर्विसेज लिमिटेड (Skyways Air Services Ltd) और उसके प्रस्तावित इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग (IPO) से जुड़ा हुआ है, जिसमें करोड़ों रुपये की वित्तीय गड़बड़ियों और फ्रेट इनवॉइस में हेराफेरी के गंभीर आरोप लगाए गए हैं।

क्या है पूरा विवाद और पीजी पेपर के गंभीर आरोप?

यह पूरा कानूनी विवाद तब सामने आया जब यूके स्थित प्रमुख अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक फर्म पीजी पेपर कंपनी लिमिटेड ने अपनी आंतरिक समीक्षा (Internal Review) के दौरान माल ढुलाई (Freight Procurement) व्यवस्था में बड़ी गड़बड़ियों का खुलासा किया। कंपनी का आरोप है कि स्काईवेज ग्रुप की संस्थाओं के साथ हुए उनके फ्रेट बिजनेस के दौरान जानबूझकर चुनिंदा संस्थाओं को लाभ पहुँचाया गया। इतना ही नहीं, वास्तविक और प्रतिस्पर्धी (Competitive Quotations) को दबा दिया गया, अन्य वैकल्पिक फ्रेट प्रदाताओं तक पहुंच को प्रतिबंधित किया गया और कई समर्थन दस्तावेजों को कथित तौर पर जाली तैयार किया गया।

पीजी पेपर ने अपनी याचिका और शिकायतों में आरोप लगाया है कि माल ढुलाई के बिलों (Freight Invoices) में सामान्य स्तर से लगभग 40 प्रतिशत और कुछ मामलों में तो 300 प्रतिशत तक की अत्यधिक बढ़ोतरी की गई। कंपनी के अनुसार, इस कथित धोखाधड़ी और ओवर-इवॉयसिंग के कारण उन्हें लगभग ₹51.98 करोड़ का सीधा नुकसान हुआ है। इसके अलावा, व्यापारिक अवसरों के नुकसान को यदि जोड़ दिया जाए तो कुल नुकसान का आंकड़ा लगभग ₹480 करोड़ तक पहुँच जाता है। इन गंभीर अनियमितताओं के सामने आने के बाद पीजी पेपर की शिकायत पर दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (Economic Offences Wing) द्वारा पहले ही एफआईआर संख्या 0172/2025 दर्ज की जा चुकी है, जिसकी जांच अभी भी जारी है।

स्काईवेज एयर का AEO-LO स्टेटस निलंबित और कानूनी कार्रवाई

इस मामले की गंभीरता को देखते हुए नियामक और जांच एजेंसियां भी पूरी तरह सतर्क हो गई हैं। दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश और चल रही जांच के बीच यह भी सामने आया है कि स्काईवेज एयर सर्विसेज का ‘AEO-LO’ (Authorized Economic Operator) स्टेटस 4 मई 2026 से एहतियात के तौर पर निलंबित कर दिया गया है, जो एफआईआर की जांच के अंतिम परिणाम पर निर्भर करेगा। अंतरराष्ट्रीय व्यापार में लिप्त कंपनियों के लिए फ्रेट और लॉजिस्टिक्स की पारदर्शिता बेहद अहम होती है, और इस तरह के बड़े आरोपों के बाद उद्योग जगत में भी हलचल तेज हो गई है।

पीजी पेपर की सीईओ पूनम गुप्ता का बड़ा बयान

इस पूरे प्रकरण पर प्रतिक्रिया देते हुए पीजी पेपर कंपनी लिमिटेड की सीईओ और आधिकारिक प्रवक्ता सुश्री पूनम गुप्ता ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार में संलग्न कंपनियों के लिए फ्रेट (माल ढुलाई) उनकी प्रतिस्पर्धात्मकता की रीढ़ होता है। जनरल कार्गो फ्रेट एक बेहद प्रतिस्पर्धी वैश्विक उद्योग है, और एक उच्च-वॉल्यूम अंतरराष्ट्रीय व्यापारी के रूप में पीजी पेपर यह उम्मीद करता है कि उसे बाजार में मिलने वाली सबसे प्रतिस्पर्धी दरें प्राप्त हों।

उन्होंने आगे स्पष्ट करते हुए कहा, “कोई भी व्यावसायिक रूप से समझदार बिजनेस यह नहीं चाहेगा कि वह जानबूझकर प्रतिस्पर्धी स्तरों से 40% या 300% तक अधिक फ्रेट दरों का भुगतान करे। हमारी चिंता केवल व्यक्तिगत इनवॉइस तक सीमित नहीं है, बल्कि हमारी मूल शिकायत यह है कि शुरुआत से ही पूरी प्रोक्योरमेंट प्रक्रिया से छेड़छाड़ की गई थी। एक भरोसेमंद कर्मचारी ने चुनिंदा प्रदाताओं को लाभ पहुँचाने के लिए काम किया। हम माननीय दिल्ली हाई कोर्ट के इस निर्देश का स्वागत करते हैं और हमें सेबी तथा नियामक प्रक्रिया पर पूरा भरोसा है।”

कोर्ट का स्पष्ट रुख और सेबी की भूमिका

माननीय दिल्ली हाई कोर्ट ने अपने आदेश में यह स्पष्ट रूप से रेखांकित किया है कि अदालत ने पीजी पेपर द्वारा लगाए गए आरोपों के गुण-दोष (Merits) पर या इन अभ्यावेदनों को प्रस्तुत करने के उनके अधिकार (Locus) पर अपनी ओर से कोई भी अंतिम राय व्यक्त नहीं की है। अदालत ने इन सभी कानूनी और तथ्यात्मक पहलुओं के निर्धारण का जिम्मा पूरी तरह से सेबी पर छोड़ दिया है, जिसे कानून के दायरे में रहकर दो सप्ताह के भीतर तय करना होगा। सेबी के इस आगामी फैसले से यह तय होगा कि स्काईवेज एयर सर्विसेज के प्रस्तावित आईपीओ और इस हाई-प्रोफाइल विवाद पर नियामक का रुख क्या रहता है।

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