आरक्षण विवाद में बेटियों को घसीटने पर क्यों भड़का आक्रोश?

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कनकलता राय

जबतक लड़ाई आरक्षण के समर्थन या उसके विरोध में चल रहा था तबतक यह राजनीतिक और संवैधानिक मामला था।अब यह लड़ाई बहन बेटियों पर आ गई। क्यों भाई अगर तुम मर्द हो तो मर्दों से लड़ो अगर घर की इज्ज़त पर आओगे तो रावण का हश्र क्या हुआ था मालूम ही होगा।दूसरी बात, जब तुम आजतक वैशाखी के ही सहारे हो तो तुम उन लड़कियों के सामने खड़ा हो पाओगे क्योंकि तुमने अपने बल पर तो खड़ा होना सीखा ही नहीं है।
तुम हजार वर्ष आरक्षण लो मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता लेकिन अगर हम औरतों से पंगा लोगे तो सर्वनाश हो जाएगा।

जो नारियाँ इतने वीर वीरांगनाओं को जन्म देनेवाली ऊर्जा समेटे हुए है उनकी ताप भी तुम सह सकोगे? 70 वर्षों से बिना आरक्षण के भी हम अपने बच्चों को उनकी रीढ़ के साथ खड़े कर रहे थे ।बात अगर हमारे बच्चों को गलत तरीके से फंसाने की होगी ,उसके भविष्य के साथ खेलने की होगी तो वह बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

मैं जातिवाद की समर्थक नहीं हूँ लेकिन जिनकी सोच में इतनी गिरावट हो जाए कि वह सवर्णों और ब्राह्मणों की बेटियों की माँग रखने लगे तो वह असहनीय और अक्षम्य है।
क्या तमाशा चल रहा है इस देश में माँ को गाली,बहन की माँग और घटिया किस्म के बयान। देश कहाँ जा रहा है।खुद को सामर्थ्यवान बनाने और अपनी योग्यता बढ़ाने में अपनी ऊर्जा नहीं लगानी है बल्कि इस देश के लम्पटों को कभी दूसरी पार्टी के माँ-बाप को गाली देना है तो कभी जाति-धर्म को आधार बनाकर। कभी प्रधानमंत्री की माँ को गाली तो कभी राहुल गाँधी की माँ को कभी सवर्णों और ब्राह्मणों की बेटियों को।क्यों भाई अगर इतना गिर गए हो तो आपस में लड़कर मर-मिटो लेकिन दूसरों की माँ बहन को बीच में मत लाओ।

लड़की चाहे जिस जाति-धर्म की हो वर-चयन का अधिकार उसका ही है।नीच और लम्पट के साथ कोई किसी लड़की को जबरदस्ती नहीं ब्याह सकता चाहे वह उसकी जाति का ही क्यूँ न हो।पहले अपने में योग्यता भरो,बिना वैशाखी के चलना सीखो,अपनी रीढ़ खड़ी करो ताकि तुम्हारे अंदर आत्मविश्वास और आत्मसम्मान पैदा हो।तुम्हारी योग्यता पर अगर ब्राह्मण की कन्या रीझ जाए तो समझो तुम भी ब्राह्मण हो गए।
हमारे यहाँ तो राम, अर्जुन, कृष्ण तक को विवाह के पूर्व अपनी योग्यता साबित करनी पड़ती है और तुम निकम्मों को सवर्णों की बेटी थाल में सजाकर चाहिए। ऐसी गंदी मानसिकता को तुम्हारे घर की औरतें कैसे सहती होंगी,समझ नहीं आ रहा।

आजकल धड़ल्ले से अंतर्जातीय विवाह हो रहा है।आजकल का पढ़ा लिखा नौजवान किसी भी जाति की लड़की से उसकी योग्यता देखकर विवाह कर रहा है।वैसे ही कई लड़कियों ने योग्य ऐसे लड़कों से विवाह किया है जो तुमलोग के अनुसार दलित और पिछड़ा है।हर जौहरी को हीरे की परख होती है जैसे मीरा के गुरु रैदास रहे।इतिहास ऐसे उदाहरणों से भरा पड़ा है।
अंत में इतना ही कहना है कि हजारो साल पहले क्या हुआ नहीं हुआ उसपर इतना विवाद ही क्यूं?आज तो प्रजातंत्र है आपका संविधान है उसको स्वस्थ और सुंदर बनाया जाए जिससे भविष्य सुखद हो।अगर अतीत किन्हीं कारणों से दुखदाई रहा भी हो तो क्या वर्तमान और भविष्य भी खराब कर लेंगे ।भाई ये तो पागलपन है।सभी अपनी मानसिक स्थिति को सही रखें वर्ना इस देश को वर्तमान के रावण जला देंगे।

कानून अपना काम ईमानदारी और विवेक से करे अन्यथा इस देश को कोई नहीं बचा सकेगा।

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