चर्चित आईएएस अधिकारी दिव्या मित्तल ने 13 साल की सेवा के बाद दिया इस्तीफा
लंदन की हाई-प्रोफाइल नौकरी छोड़कर सिविल सेवा में आईं यूपी की तेजतर्रार आईएएस अधिकारी दिव्या मित्तल के अचानक इस्तीफे से प्रशासनिक गलियारों में चर्चाएं तेज हो गई हैं।
- उत्तर प्रदेश की चर्चित आईएएस अधिकारी दिव्या मित्तल ने 13 साल की सेवा के बाद अपने पद से इस्तीफा दे दिया है।
- उन्होंने सोशल मीडिया पर एक भावुक नोट शेयर कर अपने सफर को याद किया और कहा कि पद छूटने से उनका सपना कम नहीं होगा।
- आईआईटी दिल्ली और आईआईएम बेंगलुरु से पढ़ाई करने के बाद उन्होंने लंदन की नौकरी छोड़कर देश सेवा के लिए सिविल सेवा चुनी थी।
लखनऊ, 31 अगस्त: उत्तर प्रदेश की राजनीति और प्रशासनिक जगत में एक बड़ा फेरबदल देखने को मिला है, जहाँ चर्चित और तेजतर्रार आईएएस अधिकारी दिव्या मित्तल ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने अपनी 13 साल की लंबी और यादगार प्रशासनिक सेवा को विराम देते हुए सोशल मीडिया के माध्यम से इसकी घोषणा की। उनके इस फैसले से हर कोई हैरान है, क्योंकि वह अपनी कार्यशैली और सख्त प्रशासनिक निर्णयों के लिए जानी जाती थीं। देवरिया, मिर्जापुर और संतकबीरनगर जैसे जिलों में बतौर जिलाधिकारी (DM) उनकी कार्यकुशलता की खासी सराहना हुई थी।
लंदन की नौकरी छोड़कर चुनी थी देश सेवा
दिव्या मित्तल का सफर किसी प्रेरणा से कम नहीं है। उन्होंने साधारण परिवेश से निकलकर देश के दो प्रतिष्ठित संस्थानों—आईआईटी दिल्ली (IIT Delhi) और आईआईएम बेंगलुरु (IIM Bangalore) से शिक्षा प्राप्त की थी। इसके बाद उनकी नौकरी लंदन में लग गई, जहां उन्हें सुख-सुविधा की हर चीज हासिल थी। हालांकि, विदेश में रहने के बावजूद उनका मन देश के लिए कुछ करने को आत्मीय रूप से बेचैन रहता था। उन्होंने एक साक्षात्कार और अपने सोशल मीडिया नोट में इस बात का जिक्र किया था कि ‘सब कुछ’ पा लेने के बाद भी उन्हें कुछ अधूरापन महसूस होता था। अपने इसी सपने को पूरा करने के लिए उन्होंने विदेशों का सुखद भविष्य छोड़कर भारत लौटने का फैसला किया और साल 2013 बैच की आईएएस अधिकारी बनीं।
सोशल मीडिया पर साझा किया भावुक नोट
अपने इस्तीफे की घोषणा करते हुए दिव्या मित्तल ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर एक बहुत ही भावुक और मार्मिक नोट साझा किया। उन्होंने लिखा कि आज उन्होंने अपनी इच्छा से इस 13 साल के अविस्मरणीय सफर को विराम दे दिया है। उन्होंने अपनी पोस्ट में लिखा, “साधारण परिवेश में पलते हुए मैंने एक अच्छे और सफल जीवन का सपना देखा था। आईआईटी और आईआईएम के बाद लंदन में नौकरी मिली, लेकिन देश से दूर रहना हमेशा खलता था।” उन्होंने आगे लिखा कि इस देश की मिट्टी का उन पर कर्ज था, जिसे चुकाने के लिए वे वापस लौटी थीं।
फील्ड पोस्टिंग के दौरान सीखे जीवन के बड़े सबक
अपने कार्यकाल के दौरान विभिन्न जिलों में दी गई सेवाओं को याद करते हुए उन्होंने जिलों के अनुभवों का खुलकर जिक्र किया। उन्होंने बताया कि देवरिया ने उन्हें सिखाया कि सही के साथ खड़े होना कोई विकल्प नहीं बल्कि एक कर्तव्य है। वहीं, मिर्जापुर ने उन्हें यह अहसास कराया कि ‘असंभव’ कोई तथ्य नहीं बल्कि केवल एक राय मात्र है। मां विंध्यवासिनी के चरणों का जिक्र करते हुए उन्होंने लिखा कि असली ताकत किसी पद से नहीं, बल्कि जनता के विश्वास और अपार स्नेह से मिलती है। उन्होंने यह भी कहा कि वे मूर्ख थीं जो यह सोचकर आई थीं कि वे जनता को कुछ देने जा रही हैं, बल्कि सच तो यह है कि उन्होंने जनता से सबसे ज्यादा प्यार और सम्मान हासिल किया।
भविष्य की क्या है योजनाएं?
अधिकारियों के अनुसार, उनका यह फैसला किसी अचानक उपजे दबाव में नहीं, बल्कि बेहद सोच-समझकर उठाया गया कदम है। आईएएस की नौकरी को अपने जीवन का सिर्फ एक अध्याय बताते हुए उन्होंने स्पष्ट किया है कि वे अपनी प्राथमिकताओं और परिवार को ध्यान में रखते हुए आगे बढ़ रही हैं। सूत्रों और मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अब वे अपने जीवन के अगले पड़ाव में शिक्षण (Teaching), लेखन (Writing) और समाज सेवा के क्षेत्र में सक्रिय रूप से काम करने का विचार कर रही हैं। उनका यह इस्तीफा प्रशासनिक हलकों में भले ही चर्चा का विषय बन गया हो, लेकिन उनका यह सफर आने वाली पीढ़ी के युवाओं के लिए हमेशा एक प्रेरणास्त्रोत बना रहेगा।