पाकिस्तान में 100 साल पुराना हिंदू मंदिर ध्वस्त

नारोवाल जिले में ऐतिहासिक मंदिर तोड़े जाने पर भारत के विदेश मंत्रालय ने शहबाज शरीफ सरकार को आड़े हाथों लिया, पारदर्शी जांच की मांग।

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समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली, 2 सितंबर: पड़ोसी देश पाकिस्तान से अल्पसंख्यकों पर अत्याचार और उनकी सांस्कृतिक धरोहर को नुकसान पहुँचाने का एक और मामला सामने आया है। पाकिस्तान के पंजाब प्रांत स्थित नारोवाल जिले के सिराज गांव में 100 से 125 साल पुराने एक ऐतिहासिक हिंदू मंदिर को ढहा दिए जाने की घटना ने तूल पकड़ लिया है। इस गंभीर घटना पर भारत के विदेश मंत्रालय (MEA) ने कड़ा रुख अपनाते हुए पाकिस्तान की शहबाज शरीफ सरकार को कड़ी फटकार लगाई है। भारतीय विदेश मंत्रालय ने इसे अल्पसंख्यकों के पूजा-स्थलों और उनकी धार्मिक स्वतंत्रता का घोर उल्लंघन करार दिया है।

विदेश मंत्रालय की कड़ी प्रतिक्रिया और आरोप

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि पाकिस्तान में एक सदी पुराने प्राचीन हिंदू मंदिर को तोड़े जाने की यह घटना बेहद शर्मनाक और निंदनीय है। सरकार की ओर से जारी बयान में कहा गया कि पाकिस्तानी अधिकारियों की उदासीनता और इस प्राचीन धरोहर की रक्षा करने में विफलता यह साबित करती है कि वहां अल्पसंख्यक कितने असुरक्षित हैं। भारत ने पाकिस्तान सरकार से मांग की है कि वह इस पूरे घटनाक्रम की एक त्वरित और पारदर्शी जांच करवाए, ताकि दोषियों को जवाबदेह ठहराया जा सके। इसके साथ ही, तोड़े गए मंदिर को उसके मूल स्वरूप में दोबारा बहाल करने और अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की भी सख्त हिदायत दी गई है।

कट्टरपंथियों पर लगे गंभीर आरोप और प्रशासनिक लीपापोती

स्थानीय अल्पसंख्यक संगठनों, राजनीतिक दलों और प्रत्यक्षदर्शियों का आरोप है कि इस ऐतिहासिक मंदिर को एक सुनियोजित साजिश के तहत पास के मदरसे की जमीन में मिलाने के लिए तोड़ा गया है। बताया जा रहा है कि इस कृत्य के पीछे प्रतिबंधित कट्टरपंथी संगठन से जुड़े लोग शामिल हैं। हालांकि, दूसरी तरफ पाकिस्तानी प्रशासन और इवैक्यूई ट्रस्ट प्रॉपर्टी बोर्ड (ETPB) के अधिकारियों का अजीबोगरीब तर्क सामने आया है, जिसमें भारी बारिश के कारण मंदिर के खुद ढह जाने का दावा किया जा रहा है। स्थानीय हिंदू समुदाय और नेताओं ने इस लीपापोती की कड़ी आलोचना करते हुए कहा है कि प्रशासन की मिलीभगत के कारण ही आज अल्पसंख्यक अपनी ही धार्मिक धरोहरों को बचाने में असमर्थ महसूस कर रहे हैं।

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