सऊदी प्रिंस की ट्रंप से हूती हमलों पर चर्चा
यमन के हूती विद्रोहियों के बढ़ते हमलों से घिरे सऊदी अरब ने अमेरिका से मांगी सैन्य मदद, अमेरिकी राष्ट्रपति ने सीधे सैन्य दखल से किया इनकार।
- सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को फोन कर यमन के हूती विद्रोहियों पर एयरस्ट्राइक करने का आग्रह किया था।
- अमेरिकी रिपोर्ट्स के अनुसार, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सऊदी अरब के इस प्रस्ताव को सीधे तौर पर सैन्य हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया है।
- हूती विद्रोहियों द्वारा लाल सागर और बाब अल-मंडब जलडमरूमध्य के पास बढ़ते हमलों के कारण सऊदी अरब अपनी तेल आपूर्ति और समुद्री सुरक्षा को लेकर चिंतित है।
समग्र समाचार सेवा
वाशिंगटन / रियाद, 12 सितंबर: मध्य पूर्व (West Asia) में जारी तनाव के बीच एक बहुत बड़ी और अहम कूटनीतिक खबर सामने आ रही है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान (MBS) ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को फोन करके यमन में सक्रिय ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों के ठिकानों पर अमेरिकी सैन्य हमले करने का आग्रह किया था। यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब लाल सागर और उसके आसपास के रणनीतिक समुद्री मार्गों पर हूती विद्रोहियों की गतिविधियां काफी तेज हो गई हैं। सऊदी अरब और यमन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार के खिलाफ हूती लड़ाकों के आक्रामक रुख ने क्षेत्रीय सुरक्षा और तेल आपूर्ति मार्गों पर एक नया संकट खड़ा कर दिया है।
लाल सागर में हूती विद्रोहियों की बढ़ती गतिविधियां
हाल के दिनों में हूती विद्रोहियों ने सामरिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण तटीय शहरों और बंदरगाहों, जैसे मोखा, की ओर अपने कदम बढ़ाए हैं। इसके अलावा, बाब अल-मंडब जलडमरूमध्य (Bab el-Mandeb Strait) के पास जहाजों की आवाजाही को लेकर भी खतरे की घंटी बज गई है। चूंकि हॉर्मोन जलडमरूमध्य में तनाव के बाद से सऊदी अरब अपने तेल निर्यात के लिए लाल सागर के मार्ग पर अधिक निर्भर हो गया है, इसलिए हूती विद्रोहियों द्वारा व्यापारिक जहाजों और तेल टैंकरों पर हमले ने रियाद की चिंता को अत्यधिक बढ़ा दिया है। सऊदी प्रशासन इस बात से भी आशंकित है कि यदि संघर्ष और अधिक बढ़ता है, तो क्षेत्रीय स्थिरता पर इसका गहरा असर पड़ेगा।
डोनाल्ड ट्रंप का इनकार और अमेरिका का रुख
सामने आई रिपोर्ट्स के मुताबिक, क्राउन प्रिंस ने राष्ट्रपति ट्रंप से इस सिलसिले में दो बार बात की और यमन में हूती ठिकानों के खिलाफ त्वरित सैन्य कार्रवाई का अनुरोध किया। हालांकि, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस अनुरोध को स्वीकार नहीं किया और सीधे तौर पर अमेरिकी सेना को इस संघर्ष में उतारने से फिलहाल मना कर दिया है। अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि वाशिंगटन का मुख्य उद्देश्य लाल सागर में नौवहन की स्वतंत्रता (Freedom of Navigation) की रक्षा करना और खुफिया जानकारी तथा लक्ष्य डेटा (Targeting Data) साझा करके क्षेत्रीय सहयोगियों की मदद करना है, न कि सीधे युद्ध के मैदान में कूदना। इसके बावजूद, अमेरिकी केंद्रीय कमान (CENTCOM) के वरिष्ठ अधिकारियों की सऊदी समकक्षों के साथ उच्चस्तरीय समन्वय बैठकें लगातार जारी हैं।
क्षेत्रीय राजनीति और भविष्य की चुनौतियां
सऊदी अरब और हूती विद्रोहियों के बीच तनाव में यह ताजा बढ़ोतरी जुलाई महीने में उस वक्त शुरू हुई थी जब रियाद ने सना एयरपोर्ट पर एक ईरानी विमान को उतरने से रोक दिया था। इसके बाद से दोनों पक्षों के बीच पुराना संघर्ष एक बार फिर से सतह पर आ गया है। विश्लेषकों का मानना है कि इस घटनाक्रम से मध्य पूर्व के कूटनीतिक समीकरणों पर असर पड़ सकता है। जहां एक ओर सऊदी अरब अपनी सीमाओं और तेल प्रतिष्ठानों की सुरक्षा के लिए मजबूत अंतरराष्ट्रीय गठजोड़ चाहता है, वहीं अमेरिका अपनी प्राथमिकताओं को ध्यान में रखते हुए फूंक-फूंक कर कदम रख रहा है। आने वाले दिनों में लाल सागर की सुरक्षा को लेकर होने वाले समझौते और कूटनीतिक प्रयास इस क्षेत्र के भविष्य तय करेंगे।