पश्चिम बंगाल निकाय चुनाव में बीजेपी का अकेले उतरने का ऐलान
सायोनी घोष समेत तृणमूल कांग्रेस के बागी सांसदों को बड़ा झटका, पार्टी ने स्थानीय चुनावों में किसी भी गठबंधन से किया इनकार।
- पश्चिम बंगाल में आगामी नगर निकाय चुनावों को लेकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने बड़ा राजनीतिक ऐलान किया है।
- पार्टी ने साफ कर दिया है कि वह सायोनी घोष सहित अन्य बागी सांसदों के संगठन के साथ किसी भी तरह के गठबंधन के बिना अकेले चुनाव लड़ेगी।
- बीजेपी का मानना है कि स्थानीय निकाय स्तर पर पार्टी अपने कार्यकर्ताओं और संगठन के बूते पर ही मैदान में उतरेगी।
समग्र समाचार सेवा
कोलकाता, 15 सितंबर: पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर गर्माहट देखने को मिल रही है। राज्य में होने वाले आगामी नगर निकाय चुनावों (विशेषकर कोलकाता और हावड़ा नगर निगम) के मद्देनजर भारतीय जनता पार्टी ने अपनी चुनावी रणनीति का खुलकर ऐलान कर दिया है। पार्टी के प्रदेश नेतृत्व ने यह स्पष्ट कर दिया है कि बीजेपी इन चुनावों में किसी भी दल या गठबंधन के साथ मिलकर नहीं उतरेगी, बल्कि पूरी ताकत के साथ अकेले चुनाव लड़ेगी। इस फैसले से उन बागी नेताओं और पूर्व टीएमसी सांसदों की उम्मीदों को बड़ा झटका लगा है, जो एनडीए के घटक दलों के पाले में आने के बाद स्थानीय निकाय चुनाव में बीजेपी के साथ गठबंधन की उम्मीद लगाए बैठे थे।
सायोनी घोष और बागी सांसदों की उम्मीदों पर पानी
तृणमूल कांग्रेस से बगावत कर राष्ट्रीय स्तर पर एनडीए के सहयोगियों के साथ जुड़ने वाले नेताओं में सायोनी घोष, काकोली घोष दस्तीदार और यूसुफ पठान जैसे कई बड़े नाम शामिल हैं। ये सभी नेता आने वाले स्थानीय निकाय चुनावों में बीजेपी के साथ मिलकर मैदान में उतरने की चर्चा कर रहे थे। हालांकि, बीजेपी के वरिष्ठ नेताओं और प्रदेश अध्यक्ष ने दोटूक शब्दों में यह कह दिया है कि केंद्रीय स्तर पर भले ही राजनीतिक समीकरण या व्यवस्थाएं अलग हों, लेकिन पश्चिम बंगाल की जमीनी हकीकत और स्थानीय चुनाव की रणनीति पूरी तरह स्वतंत्र रहेगी। पार्टी ने यह भी तर्क दिया है कि कार्यकर्ताओं की भावनाओं और स्थानीय संघर्षों को ध्यान में रखते हुए अकेले चुनाव लड़ना ही पार्टी के हित में है।
संगठन की मजबूती और कार्यकर्ताओं का भरोसा
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पश्चिम बंगाल में हालिया राजनीतिक बदलावों के बाद बीजेपी अपने संगठन को किसी भी प्रकार के बाहरी समझौतों से उलझाना नहीं चाहती है। पार्टी का मुख्य उद्देश्य अपने जमीनी कार्यकर्ताओं और स्थानीय नेतृत्व को मजबूत करना है, जिन्होंने वर्षों तक विपक्ष में रहकर कड़ा संघर्ष किया है। यदि पूर्व टीएमसी नेताओं के साथ तुरंत स्थानीय स्तर पर गठबंधन किया जाता, तो कार्यकर्ताओं में गलत संदेश जा सकता था। यही वजह है कि पार्टी नेतृत्व ने सूझबूझ दिखाते हुए पूरी तरह अकेले दम पर चुनाव लड़ने का साहसिक निर्णय लिया है, जिससे आने वाले नगर निकाय चुनावों का मुकाबला बेहद दिलचस्प हो गया है।