समग्र समाचार सेवा
बेंगलुरु, 21 सितंबर : कर्नाटक के आबकारी मंत्री केएम शिवलिंगे गौड़ा अपने एक बयान को लेकर घूस विवाद के केंद्र में आ गए हैं। साकलेश्वर (हासन) में ‘प्रजा सेवा आंदोलन’ के दौरान मंत्री ने ऐसा बयान दिया, जिसे आलोचकों ने सरकारी अफसरों को पैसा देने की परंपरा का परोक्ष समर्थन कहा।
मंच से जनता ने अधिकारियों द्वारा काम के बदले रिश्वत मांगने की शिकायत की। इस पर मंत्री ने कहा, “अधिकारी अपना कर्तव्य निभाएंगे। आप जो भी देना चाहें, सम्मानपूर्वक दें। यह आपका धर्म है, लेकिन कोई जबरदस्ती पैसे न ले।” मंत्री के बयान ने कई लोगों को चौंका दिया और इसे अफसरों को रिश्वत देने के संदर्भ में देखा जाने लगा।
मामला तूल पकड़ते ही BJP ने सरकार और मंत्री पर हमला बोलते हुए कहा कि ये बयान घूसखोरी को बढ़ावा देने जैसे हैं। भाजपा नेताओं ने कहा कि मंत्री का यह बयान आम नागरिकों को रिश्वत देने के लिए मजबूर करता है और सरकारी तंत्र में व्याप्त भ्रष्टाचार की पुष्टि करता है।
विवाद बढ़ने पर आबकारी मंत्री गौड़ा ने सफाई दी, “मैंने कभी नहीं कहा कि लोग अधिकारियों को सम्मानपूर्वक घूस दें। मेरा मतलब था कि जो अधिकारी ईमानदारी से काम कर रहे हैं, उन्हें सम्मान दिया जाना चाहिए। रिश्वत लेना-देना दोनों ही कानूनन अपराध हैं।”
सरकार ने भी सफाई दी कि मंत्री का बयान गलत संदर्भ में वायरल हुआ है। विपक्ष ने मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।
यह घटना एक बार फिर भ्रष्टाचार और सरकारी अधिकारियों के आचरण पर बहस छेड़ गई है।