समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली, 26 सितंबर: उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने शुक्रवार को दिल्ली विश्वविद्यालय के श्री राम कॉलेज ऑफ कॉमर्स (SRCC) में आयोजित ‘तीसरी श्री अरुण जेटली मेमोरियल डिबेट’ के पुरस्कार वितरण समारोह में विजेताओं को सम्मानित किया। इस दौरान उन्होंने जोर देकर कहा कि सवाल पूछना लोकतंत्र का एक अनिवार्य स्तंभ है।
समारोह को संबोधित करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा, “बिना सवाल पूछे कोई लोकतंत्र नहीं हो सकता। लेकिन सवाल वहां पूछे जाने चाहिए जहां उनकी जरूरत हो, व्यवधान पैदा करने के लिए नहीं बल्कि विकास के लिए।” उन्होंने छात्रों से स्वतंत्र निर्णय लेने की अपील करते हुए कहा कि किसी का भी समर्थन करने से पहले यह जरूर पूछना चाहिए कि क्या यह समाज और राष्ट्र के लिए फायदेमंद होगा। यदि इस मानसिकता के साथ आगे बढ़ेंगे, तो भारत 2047 से पहले एक विकसित देश बन जाएगा।
एसआरसीसी के 100 वर्ष और अरुण जेटली को श्रद्धांजलि
SRCC के 100 वर्ष पूरे होने पर कॉलेज को बधाई देते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि एक सदी सिर्फ समय का पैमाना नहीं है, बल्कि यह चरित्र का पैमाना है। पूर्व केंद्रीय मंत्री और SRCC के पूर्व छात्र अरुण जेटली को एक प्रख्यात राजनीतिक नेता, आयोजक और कुशल वक्ता बताते हुए उन्होंने कहा कि वे कानूनी कौशल, राजनीतिक समझ, आर्थिक विजन और उत्कृष्ट संचार कौशल का एक अनूठा संगम थे।
उपराष्ट्रपति ने याद किया कि कैसे अरुण जेटली ने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के कार्यकाल के दौरान वित्त और कॉर्पोरेट मामलों के मंत्री सहित विभिन्न क्षमताओं में राष्ट्र निर्माण में अपना योगदान दिया। उन्होंने वस्तु एवं सेवा कर (GST), दिवाला और शोधन अक्षमता संहिता (IBC), और वित्तीय समावेशन जैसे प्रमुख सुधारों में जेटली की अहम भूमिका को रेखांकित किया।
लोकतांत्रिक संवाद और प्रौद्योगिकी पर जोर
तकनीकी युग में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और सोशल मीडिया के दौर का जिक्र करते हुए उपराष्ट्रपति ने छात्रों को आगाह किया कि एल्गोरिदम को कभी भी अपनी बुद्धि का विकल्प न बनने दें। उन्होंने कहा कि एआई चाहे जितनी भी चुनौतियां पेश करे, हम अपनी रचनात्मकता से उन्हें अवसरों में बदल सकते हैं।
समारोह में दिल्ली विश्वविद्यालय के कुलपति योगेश सिंह सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। इस राष्ट्रीय स्तर की द्विभाषी (अंग्रेजी और हिंदी) वाद-विवाद प्रतियोगिता के विजेताओं को उपराष्ट्रपति द्वारा सम्मानित किया गया और सभी प्रतिभागियों की बौद्धिक सहभागिता की सराहना की गई।