पीएम मोदी के 25 साल: विकसित भारत 2047 का संकल्प
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बतौर सरकार प्रमुख अपनी जनसेवा के 25 वर्ष पूरे होने पर देश को संबोधित करते हुए वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने का दृढ़ संकल्प लिया है।
- पीएम नरेंद्र मोदी ने सरकार के मुखिया के रूप में अपनी सेवा के ऐतिहासिक 25 साल पूरे कर लिए हैं, जिसे उन्होंने व्यक्तिगत महिमा नहीं बल्कि राष्ट्र सेवा की साधना बताया है।
- अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने देश को टॉप-3 अर्थव्यवस्था, आत्मनिर्भर भारत, ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग हब और अंतरिक्ष क्षेत्र में नई ऊंचाइयों पर ले जाने का संकल्प दोहराया.
- पीएम मोदी ने गीता के उपदेशों का हवाला देते हुए कहा कि उनके लिए पद और प्रतिष्ठा से बढ़कर देशवासियों की निष्काम सेवा और राष्ट्र निर्माण सर्वोपरि है.
समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली, 08 अक्तूबर: भारतीय राजनीति और प्रशासनिक इतिहास में एक नया मील का पत्थर स्थापित करते हुए देश के यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बतौर सरकार प्रमुख (मुख्यमंत्री से लेकर प्रधानमंत्री तक) अपनी जनसेवा के शानदार और निरंतर 25 वर्ष पूरे कर लिए हैं। इस विशेष अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में पीएम मोदी ने देशवासियों को संबोधित करते हुए अपनी इस ढाई दशक लंबी यात्रा को व्यक्तिगत महिमा या पद-प्रतिष्ठा का विषय न मानकर इसे ‘राष्ट्र सेवा की अनवरत साधना’ करार दिया है। उनके इस संबोधन ने देश के करोड़ों नागरिकों में एक नई ऊर्जा और प्रेरणा का संचार किया है।
वर्ष 2047 तक ‘विकसित भारत’ का संकल्प
अपने संबोधन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने भविष्य के भारत का एक स्पष्ट और विराट खाका देश के सामने रखा। उन्होंने कहा कि आज का यह दिन केवल पुरानी यादों को ताजा करने का नहीं, बल्कि अपने संकल्पों को नई ऊर्जा से भरने और उस वादे को दोहराने का दिन है, जो यह विश्वास दिलाता है कि हम जो ठान लेते हैं, उसे पूरा करके दिखाते हैं। पीएम मोदी ने जोर देकर कहा कि वर्ष 2047 तक भारत को एक विकसित राष्ट्र (Viksit Bharat) बनाना है और इस दिशा में देश तेजी से आगे बढ़ रहा है।
उन्होंने इस दौरान कई बड़े लक्ष्यों का जिक्र किया, जिनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं:
भारत को दुनिया की शीर्ष तीन अर्थव्यवस्थाओं (Top-3 Economy) में शामिल करना।
आत्मनिर्भर भारत (Atmanirbhar Bharat) के तहत हर क्षेत्र में स्वावलंबन हासिल करना।
भारत को एक ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में स्थापित करना।
देश में भविष्य के आयोजनों जैसे ओलंपिक्स और अंतरिक्ष क्षेत्र में ऐतिहासिक कदम बढ़ाना।
संगठन से लेकर शासन तक का सफर
अपने शुरुआती जीवन और राजनीतिक सफर को याद करते हुए प्रधानमंत्री ने साझा किया कि आज से 25 साल पहले जब उन्होंने जिम्मेदारी संभाली थी, तब उनका रिपोर्ट कार्ड केवल संगठन के कार्य और आदिवासियों की सेवा का था। उन्होंने कभी चुनावी राजनीति में चमकने की चाहत नहीं रखी, बल्कि बाल्यावस्था से ही उन्हें यही संस्कार मिले थे कि जीवन महत्वाकांक्षा (Ambition) के लिए नहीं, बल्कि एक निश्चित मिशन (Mission) के लिए जीना चाहिए। परिस्थितियों और देशवासियों के विश्वास ने उन्हें जो भी जिम्मेदारी सौंपी, उन्होंने उसे पूरी निष्ठा और ईमानदारी के साथ निभाया।
कर्म ही मेरा धर्म और साधना
गीता के उपदेशों का स्मरण करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि उनके लिए कर्म ही सब कुछ है और कर्म ही उनका असली धर्म है। “कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन्” के सिद्धांत पर चलते हुए उन्होंने हमेशा फल की चिंता किए बिना देश सेवा को सर्वोपरि रखा है। उन्होंने कहा कि पद और प्रतिष्ठा दुनिया में कहीं भी मिल सकती है, लेकिन इस अनादि राष्ट्र और पावन भूमि भारत में जन्म लेना ही अपने आप में सबसे बड़ा सौभाग्य है।
देशवासियों के अटूट विश्वास का सम्मान
प्रधानमंत्री ने देश की जनता का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि जिस राष्ट्र के नागरिकों की धमनियों में ऐसा अदम्य आत्मविश्वास और राष्ट्रप्रेम बहता हो, उसे आगे बढ़ने से कोई ताकत नहीं रोक सकती। उनके इन 25 वर्षों के कार्यकाल में लिए गए ऐतिहासिक और कड़े फैसलों ने देश की तस्वीर और तकदीर दोनों को बदला है। आज भारत वैश्विक पटल पर एक मजबूत, सशक्त और निर्णायक देश के रूप में अपनी पहचान बना चुका है। प्रधानमंत्री ने देशवासियों को यह संदेश दिया है कि सामूहिक प्रयासों से ही एक नए और सशक्त भारत का निर्माण संभव है