विवेक अग्निहोत्री के ‘धर्म पर टैक्स’ वाले बयान पर मचा बवाल

विहिप के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल ने फिल्ममेकर विवेक अग्निहोत्री के नीम करोली बाबा के कांची धाम वीडियो पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए उनसे माफी की मांग की है।

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  • फिल्म निर्माता विवेक अग्निहोत्री ने कांची धाम की भीड़ का वीडियो साझा करते हुए सुझाव दिया था कि सरकार को धर्म पर टैक्स लगाना चाहिए।
  • विश्व हिंदू परिषद (VHP) के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल ने इसे करोड़ों हिंदुओं की आस्था का अपमान बताया और फिल्म इंडस्ट्री द्वारा टैक्स छूट की मांग पर सवाल उठाए।
  • विहिप नेता ने विवेक अग्निहोत्री के बयान को पब्लिसिटी स्टंट या किसी के बहकावे में दिया गया बयान बताते हुए अपने शब्द वापस लेने और माफी मांगने को कहा है।

समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली, 08 अक्तूबर: बॉलीवुड के जाने-माने फिल्मकार विवेक अग्निहोत्री अपने बयानों के चलते एक बार फिर सुर्खियों में आ गए हैं। इस बार उनका एक सोशल मीडिया पोस्ट देश भर में बहस का मुद्दा बन गया है, जिस पर धार्मिक संगठनों और विशेषकर विश्व हिंदू परिषद (VHP) ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। विवाद की शुरुआत तब हुई जब विवेक अग्निहोत्री ने 4 अक्टूबर को कांची धाम (नीम करोली बाबा आश्रम) की भीड़ का एक वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर साझा किया। इस वीडियो के साथ उन्होंने लिखा था कि अगर सरकार धर्म पर टैक्स लगा दे, तो भारत रातों-रात दुनिया का सबसे अमीर देश बन जाएगा और लोग चमत्कारों के पीछे भागने के बजाय इनोवेशन, प्रोग्रेस और प्रोडक्टिविटी पर ध्यान केंद्रित करेंगे।

विहिप राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल का कड़ा पलटवार

विवेक अग्निहोत्री के इस बयान के सामने आने के बाद विश्व हिंदू परिषद के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल ने उन पर कड़ा प्रहार किया है। विनोद बंसल ने एक विस्तृत बयान जारी करते हुए विवेक अग्निहोत्री से कई तीखे सवाल पूछे हैं। उन्होंने कहा कि करोड़ों हिंदुओं की तीर्थयात्राओं को “चमत्कारों के इंतजार” के रूप में चित्रित करना और धर्म को इनोवेशन या उत्पादकता के आमने-सामने खड़ा करना बिल्कुल गलत है। भारत में तीर्थयात्राएं केवल पूजा-पाठ के स्थान नहीं हैं, बल्कि वे हमारी प्राचीन संस्कृति, सभ्यता, सामाजिक जीवन और स्थानीय अर्थव्यवस्था की मूल आत्मा हैं।

फिल्म इंडस्ट्री की टैक्स छूट पर उठाया सवाल

विहिप प्रवक्ता ने अपने बयान में फिल्म उद्योग की कार्यप्रणाली पर भी निशाना साधा। उन्होंने व्यंग्य करते हुए सवाल किया कि जब फिल्म इंडस्ट्री अपनी फिल्मों के लिए सरकार से टैक्स में छूट (Tax Exemption) की मांग करती है, तब उन्हें धर्म या संस्कृति से जुड़ी आस्थाओं पर इस तरह का ‘धर्म टैक्स’ लगाने का विचार कैसे आ जाता है? उन्होंने कहा कि यह वही धार्मिक रूप से प्रतिबद्ध और राष्ट्रवादी हिंदू समाज है, जिसने विवेक अग्निहोत्री की फिल्मों को सफल बनाया, उन्हें समाज में ऊंचा स्थान दिया और उन्हें एक प्रतिष्ठा दिलाई। ऐसे में उसी समाज की गहरी आस्था और भावनाओं के साथ खिलवाड़ करना किसी भी सूरत में उचित नहीं ठहराया जा सकता है।

क्या किसी के बहकावे में दिया गया बयान?

विनोद बंसल ने अपनी तीखी प्रतिक्रिया में आगे कहा कि विवेक अग्निहोत्री पहले ऐसे नहीं थे। उनके इस बदले हुए तेवर और बयानों को देखकर यह सवाल खड़ा होता है कि क्या उनकी बुद्धि या सोच को किसी ने प्रदूषित कर दिया है? या फिर यह उनकी किसी नई फिल्म के प्रचार (Promotion) का कोई हथकंडा या पब्लिसिटी स्टंट है? उन्होंने आशंका जताई कि संभव है कि किसी बाहरी प्रभाव या बहकावे में आकर उन्होंने यह बयान दिया हो।

सार्वजनिक माफी की मांग और पुनर्विचार का आग्रह

विश्व हिंदू परिषद ने कड़े शब्दों में मांग की है कि विवेक अग्निहोत्री को अपने इन शब्दों पर गहराई से पुनर्विचार करना चाहिए। करोड़ों सनातनियों और श्रद्धालुओं की भावनाओं का सम्मान करते हुए उन्हें अपने इस बयान को तुरंत वापस लेना चाहिए और सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी चाहिए। सोशल मीडिया पर इस विवाद के तूल पकड़ने के बाद से समर्थकों और विरोधियों के बीच बहस छिड़ गई है। एक तरफ जहां कुछ लोग इसे व्यक्तिगत स्वतंत्रता और तार्किकता से जोड़कर देख रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ बहुसंख्यक समाज इसे अपनी धार्मिक आस्था पर सीधा प्रहार मान रहा है। इस गरमागरम बहस के बीच अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या विवेक अग्निहोत्री की तरफ से इस पर कोई सफाई या प्रतिक्रिया सामने आती है।

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