
कांग्रेस नेता और लोक सभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गाँधी के झूठ से देश तो परेशान है ही,उनकी पार्टी भी चौतरफा घिर गई हैं। राहुल के कर्मो की वजह से उनकी पार्टी को भी कई प्रकार की बेशर्मी का सामना कर पड़ रहा है.आज की स्थिति में कांग्रेस के लिए “कुआँ और खाई” दोनों अनुकूल बन गए लगते हैं।
2014 के बाद कांग्रेस अपनी नीतियों के अभाव में दिनों-दिन भ्रमित हो रही हैं।आम जनता से कटती दिखाई दे रही हैं.जनाधार का ग्राफ तेजी से घट रहा हैं. 2014 के पहले कांग्रेस की ऐसी दुर्गति कभी नहीं हुई थी,जो अब हो रही हैं.कई प्रकार के शोधों और विश्लेषणों के बाद ऐसा लगता हैं कि पार्टी की दुर्गति के मुख्य कारण स्वयं राहुल गाँधी हैं.जिसमे उनका “बाल हठ” वाला स्वाभाव और सार्वजनिक जीवन में लगातार झूठ बोलना हैं। जिससे सजग युवा भी परेशान दिख रहे हैं। तभी तो 9 अक्टूबर 2026 को हुए लोक सभा और विधान सभा के उपचुनावों परिणामों में कांग्रेस की बुरी हार हुई हैं। उल्लेखनीय हैं असम,पश्चिम बंगाल और पुडुचेरी में 4 सीटों पर लोक सभा व विधान सभा के उपचुनाव हुए थे।
ज्यों ज्यों राहुल गाँधी के झूठ का पुलिंदा मोटा होता जा रहा हैं ,उसी लिहाज़ से आम जनता के बीच राहुल गाँधी का ग्राफ-प्रभाव सिमटता जा रहा हैं,जिसके लिए वह स्वयं जिम्मेदार हैं.इसलिए कांग्रेस त्रस्त है तो भाजपा और उनके सहयोगी दल मस्त हैं,खुश हैं,भाव विभोर,आनंदित हैं, पिछले 12 वर्षों में राहुल ने अपने नारों और वक्तव्यों में कई बार झूठ का सहारा लिया.फिर भाजपा ने सत्यों-तथ्यों से प्रहार किया। कुछ मामलो में तो उच्चतम न्यायालयों से भी राहुल को उच्चतम न्यायालय से माफ़ी भी मांगनी पड़ी। मरता क्या नहीं करता। जैसी करनी ,वैसी भरनी। वही हुआ,जो होना था।
इसलिए अपने पुराने ढर्रे-पैटर्न पर कांग्रेस कथित राजनीति करती दिख रही हैं। बिना ठोस सबूत और प्रमाण के राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संघचालक डॉ मोहन राव भागवत,प्रधानमंत्री नरेन्द्र भाई मोदी।केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह के साथ मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को आरोपित करने की कोशिश कर रहे हैं.जो कि कांग्रेस का एक ढुलमुल नीति का परिचायक हैं.आये अब देखते हैं उनके झूठ से भरपुर इतिहास से रूबरू करवाते हैं -:
राहुल गाँधी के कई बड़े झूठ और उनका माफीनामा-2014 से अबतक-:
राष्ट्रपति भवन परिसर,9 अक्टूबर 2026 – राहुल गाँधी 9 अक्टूबर को फिर से एक नया झूठ बड़ी बेशर्मी से बोले.उनके इस झूठ के लपेटे में देश की राष्ट्रीय राजनीति में एक नया मोड़ आ सकता हैं उस झूठ से वह राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी जी मुर्मू को भी अपनी ओछी राजनीति के घेरे में लेने की साजिश की है.इतिहास राहुल गाँधी को माफ़ नहीं करेगा न ही भारत की आम जनता।
मैंने 1991 से लेकर आज तक राष्ट्रपति भवन की रिपोर्टिंग की और कर रहा हूँ.राष्ट्रपति और उनके कार्यालय का एक प्रोटोकाल होता हैं ,जिसके तहत सभी कार्य उस प्रोटोकाल बुक में दर्ज होते हैं.राष्ट्रपति द्वारा किसी भी राजनीतिक दल/प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात के दौरान ज्यादा से ज्यादा कहना होता हैं -देखेंगे,विचार करेंगे,छानबीन करवाएंगे। जैसा कि उस प्रतिनिधिमंडल से महामहिम ने वोट चोरी के सबूत मांगे। जो राहुल गाँधी और सहयोगी दलों ने नहीं दियां।
राष्ट्रपति ने कहा सोचेगी।ये ठीक हो सकता हैं।लेकिन बकौल राहुल गाँधी -राष्ट्रपति उनकी सभी मांगो से सहमत दिखी,कहा- वोट चोरी हुई हैं और कहा एक्शन लेंगे.ये सरासर बहुत बड़ा वाला झूठ है.मेरा मानना हैं राष्ट्रपति,एक्शन लेने या उनकी मांगो से कभी भी अपनी सहमति ज़ाहिर नहीं कर सकती,जबकि वही पर टीएमसी नेता ममता बनर्जी ने संतुलित बोला.वही राहुल ने राष्ट्रपति को गलत तौर पर निरुपित कर देश के संविधान और उस पर आसीन व्यक्तित्व का घोर अपमान किया.क्या राहुल गाँधी का इतना घोर नैतिक पतन हो चुका हैं?
चुनाव प्रक्रिया और Form 6 संबंधी दावे- राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर आरोप लगाया कि मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार ने मतदाता पंजीकरण के फॉर्म 6 में ‘अवैध और एकतरफा’ तरीके से बदलाव किए हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि मुख्य चुनाव आयुक्त आयोग में अकेले फैसले लेते हैं। जबकि जवाबी तौर पर भारत निर्वाचन आयोग ने राहुल गांधी के इन दावों को “भ्रामक और गुमराह करने वाला” करार दिया। आयोग ने स्पष्ट किया कि बिहार में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के लिए फॉर्म 6 से जुड़े आदेश पूरी तरह सामूहिक सहमति से जारी किए गए थे, जिसे माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने 27 मई 2026 के अपने फैसले में सही ठहराया था।
13 करोड़ 27 लाख वोट चोरी का दावा- ये भी झूठ हैं।सच पूरी मीडिया भी दिखा रही हैं ,शायद कांग्रेस और उनके सहयोगी दलों को ये सच पता होगा ,लेकिन क्या करे? कोई मुद्दा है ही नहीं ,तो ये झूठ ही सही.13 करोड़ 27 लाख वोट चोरी का डाटा देखिये -जिसमे 2.77 करोड़ पुराने मतदाताओ की मृत्यु हो चुकी हैं.7.91 करोड़ मतदाता अपने पुराने स्थान से शिफ्ट हो चुके हैं। 1.01 करोड़ मतदाता डुप्लीकेट पाए गए। 1.48 करोड़ मतदाता का पता ही लग रहा हैं। ये डाटा कई प्रदेशो के हैं ,जिनमे कांग्रेस शासित राज्य भी हैं जिनमे कांग्रेस वाले राज्यों की संख्या काफी कम हैं,ज्यादातर राज्य तो भाजपा और एनडीए वाले राज्य ज्यादा हैं.इससे कांग्रेस का कितना नुकसान? ये भी सोचने वाली बात हैं। कांग्रेस और उनके समर्थक राज्यों में कर्नाटक,तेलंगाना,तमिलनाडु,पंजाब,केरलम हैं,जो SIR में आये हैं।
‘छात्रों की गूंज’ और डिजिटल फैक्ट-चेक प्लेटफॉर्म 2026- राहुल गांधी ने अपने अलग-अलग ‘छात्रों की गूंज’ और सार्वजनिक कार्यक्रमों में युवाओं, रोजगार और सामाजिक अपराधों को लेकर कई बड़े आंकड़े पेश किए थे।जबकि अगस्त 2026 में सामने आए एक स्वतंत्र और नेटिजन्स-संचालित डिजिटल फैक्ट-चेकिंग प्लेटफॉर्म ‘झूठ की गूंज’ ने उनके द्वारा किए गए 40 प्रमुख दावों की पड़ताल की। आधिकारिक सरकारी डेटा और 134 से अधिक विश्वसनीय स्रोतों का मिलान करने के बाद इस प्लेटफॉर्म ने राहुल गांधी के 29 दावों को गलत या भ्रामक पाया था.
सेना और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े झूठ – राहुल गांधी ने संसद और सार्वजनिक मंचों पर सीमा विवाद और सेना की रणनीतिक तैयारियों को लेकर सरकार पर गंभीर आरोप लगाए थे, जिसमें एक अप्रकाशित संस्मरण पुस्तक का भी हवाला दिया गया था। जबकि पूर्व सेना प्रमुख जनरल एम. एम. नरवणे और स्वयं रक्षा मंत्रालय ने इन रणनीतिक दावों को खारिज किया। आलोचकों और राष्ट्रीय सुरक्षा विशेषज्ञों ने संसद के भीतर बिना पुष्टि वाले दावों को रखने के लिए उनकी आलोचना की और इसे लोकतांत्रिक स्क्रूटनी के बजाय ‘पॉलिटिकल थिएटर’ करार दिया।
पवन खेडा और असम विवाद 2026- कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेडा ने अप्रैल 26 चुनाव में असम मुख्यमंत्री की पत्नी रिंकी भुइया सरमा के खिलाफ गंभीर आरोप लगाया था,जो बाद में गलत साबित हुआ.उन आरोपों में दुबई में संपत्ति, वयोमिंग में कंपनी,फेक पासपोर्ट और 52 हजार करोड़ की संपत्ति व शर्मा और एस एच ए आर एम ए. सही स्पेलिंग आदि मसले थे। उन सभी आरोपों में रिंकी भुइया सरमा ने एक एक आरोप का जवाब दिया और न्यायालय में चुनौती दी.बाद में डर के मारे पवन खेडा स्वयं को छुपाते रहे.बाद में पवन को अग्रिम जमानत लेनी पड़ी।
ऐश्वर्या राय और राम मंदिर 2024- अयोध्या में राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा समारोह के दौरान राहुल गाँधी ने दावा किया कि वहां केवल उद्योगपति और ऐश्वर्या राय जैसी हस्तियां मौजूद थीं, जबकि गरीब और आदिवासी गायब थे। फैक्ट-चेक में यह सामने आया कि ऐश्वर्या राय उस कार्यक्रम में शामिल ही नहीं हुई थीं।इसके अलावा और कई गलत तथ्यों का हवाला दियां था।
भारतीय रेलवे के निजीकरण का दावा 2022- राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर दावा किया था कि केंद्र सरकार भारतीय रेलवे की संपत्तियों, जैसे कि 151 ट्रेनों, रेलवे स्टेशनों और अस्पतालों का पूरी तरह से निजीकरण कर रही है।जबकि भारत सरकार के प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB Fact Check) ने इस दावे की पड़ताल की और इसे पूरी तरह से तथ्यहीन और फर्जी बताया। रेल मंत्रालय ने स्पष्ट किया था कि रेलवे की संपत्तियों का कोई निजीकरण नहीं किया जा रहा है।
चीन द्वारा भारतीय जमीन पर कब्जा 2020-2024- गलवान घाटी झड़प के बाद राहुल गाँधी ने दावा किया था कि चीन ने भारत की 2,000 वर्ग किलोमीटर जमीन पर कब्जा कर लिया है। रक्षा मंत्रालय और तत्कालीन कोर कमांडरों ने इस दावे को खारिज करते हुए कहा कि भारत ने अपनी किसी भी जमीन पर नियंत्रण नहीं खोया है और दोनों सेनाएं बफर जोन समझौते के तहत पीछे हटी हैं।गौरतलब हैं कि पूर्व प्रधनामंत्री श्री नेहरु की ऐतिहासिक गलती की वजह से भारत को मिलने वाला UNSC की स्थायी सीट को तोहफ़े में चीन को दे दिया गया था।
‘मोदी सरनेम’ संबंधी टिप्पणी 2019- कर्नाटक के कोलार में एक चुनावी रैली के दौरान राहुल गांधी ने बयान दिया था, “सभी चोरों का सरनेम मोदी ही क्यों होता है? चाहे ललित मोदी हो, नीरव मोदी हो या नरेंद्र मोदी।” इस आपत्तिजनक बयान के खिलाफ सूरत की एक अदालत में आपराधिक मानहानि का मुकदमा दर्ज हुआ, जिसमें उन्हें दोषी ठहराया गया और सजा सुनाई गई। बाद में सुप्रीम कोर्ट ने भी सार्वजनिक जीवन में मर्यादा बनाए रखने की हिदायत दी गयी थी।
राफेल सौदा 2018-2019- राहुल गांधी ने लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान बार-बार दावा किया कि सुप्रीम कोर्ट ने राफेल विमान सौदे में भ्रष्टाचार की बात मानी है और अनिल अंबानी को 30,000 करोड़ रुपये का सीधा फायदा पहुंचाया गया। बाद में, उच्चतम न्यायालय में अवमानना याचिका के बाद उन्हें अपने बयान पर खेद जताना पड़ा था, क्योंकि न्यायालय ने अपनी समीक्षा में प्रक्रियागत गड़बड़ी नहीं पाई।
“चौकीदार चोर है”और राफेल सौदा 2019- 2019 के लोकसभा चुनाव अभियान के दौरान, राहुल गांधी ने राफेल लड़ाकू विमान सौदे को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए और दावा में उच्चतम न्यायालय को लपेटे में लेकर गलत उद्दरण दिया था.उनका दावा था कि न्यायालय ने कहा था कि “चौकीदार चोर है”।
जबकि बाद में माननीय उच्चतम न्यायालय ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई थी। न्यायालय की अवमानना मामले की कार्यवाही के दौरान राहुल गांधी को बिना किसी प्रामाणिक सबूत के ऐसी टिप्पणी करने के लिए न्यायालय से बिना शर्त माफी मांगनी पड़ी थी।न्यायालय ने उन्हें भविष्य में सार्वजनिक जीवन में अधिक सतर्क रहने की चेतावनी दी थी।
जीएसटी और गब्बर सिंह टैक्स 2017- राहुल गाँधी द्वारा गुजरात और अन्य चुनावों के दौरान उन्होंने जीएसटी (GST) को ‘गब्बर सिंह टैक्स’ कहा और दावा किया कि यह केवल छोटे व्यापारियों को बर्बाद करने के लिए लाया गया है। सरकार और अर्थशास्त्रियों ने इसका खंडन करते हुए कहा कि इसमें समय-समय पर छोटे व्यापारियों के लिए राहत और संशोधन किए गए हैं।
बयानबाजी और राजनीतिक संदर्भ-
राजनीति में बयानों को अक्सर दो अलग-अलग चश्मों से देखा जाता है:
सत्तारूढ़ दल भाजपा-एनडीए का रुख: भाजपा का आरोप है कि राहुल गांधी जानबूझकर विदेशी मंचों और घरेलू रैलियों में भारत की छवि खराब करने के लिए झूठे आंकड़े और भ्रामक जानकारियां (जैसे बेरोजगारी और गरीबी के गलत आंकड़े) पेश करते हैं।
दूसरी तरफ कांग्रेस और समर्थकों का रुख: कांग्रेस का तर्क है कि राहुल गांधी के बयानों को अक्सर सत्ता पक्ष द्वारा तोड़-मरोड़ कर पेश किया जाता है या उनके भाषणों के छोटे हिस्से (क्लिपिंग्स) को संदर्भ से बाहर दिखाकर उन्हें ‘झूठ’ का रूप दे दिया जाता है।
बहरहाल,उपरोक्त तथ्यों के साथ संवैधानिक संस्थाओं, आधिकारिक फैक्ट-चेकर्स और न्यायिक फैसलों के अनुसार, कांग्रेस नेता राहुल गांधी द्वारा दिए गए कई बयानों और दावों को भ्रामक या गलत पाया गया है,जबकि कांग्रेस द्वारा उलटे भारतीय जनता पार्टी पर राजनीतिक लाभ के लिए “झूठ और भ्रामक नैरेटिव” फैलाने का आरोप लगाया जाता है, जो कि उचित नहीं है।