मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ प्रदर्शन के बीच जंतर-मंतर की मान्यता समाप्त

विपक्ष को मुख्य न्यायाधीश से मुलाकात की अनुमति नहीं,दिल्ली पुलिस ने तीन नए प्रदर्शन स्थल तय किए

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  • दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर को अधिसूचित प्रदर्शन स्थल की सूची से हटाया।
  • रामलीला मैदान, बुराड़ी मैदान और पूर्वी दिल्ली के सीबीडी ग्राउंड को तीन नए प्रदर्शन स्थल बनाया गया।
  • इंडिया गठबंधन ने कनॉट प्लेस–बाराखंबा रोड चौराहे से सुप्रीम कोर्ट तक मार्च का आह्वान किया।
  • मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे से मुलाकात का अनुरोध ठुकराते हुए न्यायिक प्रक्रिया अपनाने की सलाह दी।

समग्र समाचार सेवा

नई दिल्ली, 12 अक्टूबर : मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्षी दलों के विरोध-प्रदर्शन और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर जारी राजनीतिक विवाद के बीच दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर को आधिकारिक धरना-प्रदर्शन स्थल की सूची से हटा दिया है। इसके स्थान पर राष्ट्रीय राजधानी में तीन नए स्थान निर्धारित किए गए हैं। दूसरी ओर, कांग्रेस नेता राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे के नेतृत्व में इंडिया गठबंधन ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट तक मार्च का आह्वान किया है।

इस बीच भारत के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने विपक्षी नेताओं के मुलाकात संबंधी अनुरोध को अस्वीकार कर दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जिन विषयों को लेकर विपक्ष उनसे मिलना चाहता है, वे पहले से सर्वोच्च न्यायालय में विचाराधीन हैं। ऐसे मामलों में संबंधित पक्षों को निर्धारित न्यायिक प्रक्रिया अपनानी चाहिए।

जंतर-मंतर अब आधिकारिक प्रदर्शन स्थल नहीं

दिल्ली पुलिस ने धरना-प्रदर्शनों के आयोजन से संबंधित व्यवस्था में महत्वपूर्ण बदलाव करते हुए जंतर-मंतर की अधिसूचित प्रदर्शन स्थल के रूप में मान्यता समाप्त कर दी है।

नई व्यवस्था के तहत रामलीला मैदान, बुराड़ी मैदान और पूर्वी दिल्ली स्थित सीबीडी ग्राउंड को सार्वजनिक धरना-प्रदर्शनों के लिए निर्धारित किया गया है।

रिपोर्टों के अनुसार, यह निर्णय केंद्रीय गृह मंत्रालय की एक विशेष समिति की सिफारिशों के आधार पर लिया गया है। नए स्थानों पर प्रदर्शन आयोजित करने के लिए मानक संचालन प्रक्रियाएं और विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए जाएंगे।

जंतर-मंतर लंबे समय से राष्ट्रीय राजधानी में विभिन्न राजनीतिक दलों, कर्मचारी संगठनों, छात्र समूहों और सामाजिक संस्थाओं के विरोध-प्रदर्शनों का प्रमुख केंद्र रहा है।

ऐसे में इस स्थान की आधिकारिक मान्यता समाप्त किए जाने से दिल्ली में सार्वजनिक प्रदर्शनों की व्यवस्था में महत्वपूर्ण परिवर्तन होगा।

बाराखंबा रोड से सुप्रीम कोर्ट तक विपक्ष का मार्च

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर सवाल उठाते हुए इंडिया गठबंधन ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट तक मार्च करने की घोषणा की।

कांग्रेस ने इस अभियान को ‘चलो दिल्ली—मार्च फॉर डेमोक्रेसी’ नाम दिया है।

निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, विपक्षी नेताओं और समर्थकों को दोपहर 1:30 बजे कनॉट प्लेस और बाराखंबा रोड के चौराहे पर एकत्र होकर सर्वोच्च न्यायालय की ओर बढ़ना था।

राहुल गांधी ने युवाओं, विपक्षी दलों और नागरिक समाज के संगठनों से इस मार्च में शामिल होने का आह्वान किया।

विपक्ष का आरोप है कि मतदाता सूचियों के पुनरीक्षण के दौरान बड़ी संख्या में पात्र मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं। निर्वाचन आयोग इन आरोपों को खारिज करता रहा है और उसका कहना है कि पुनरीक्षण का उद्देश्य मतदाता सूची की शुद्धता सुनिश्चित करना है।

राहुल गांधी और खरगे ने मुख्य न्यायाधीश से मांगा था समय

लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत को पत्र लिखकर 12 अक्टूबर को शाम चार से पांच बजे के बीच मुलाकात का समय मांगा था।

विपक्षी नेता कथित चुनावी अनियमितताओं, मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे, SIR प्रक्रिया को रोकने और मतपत्रों से मतदान की व्यवस्था बहाल करने जैसी मांगों को लेकर ज्ञापन सौंपना चाहते थे।

हालांकि, मुख्य न्यायाधीश ने इस अनुरोध को स्वीकार नहीं किया।

मुख्य न्यायाधीश ने बताया—मामला पहले से न्यायालय में विचाराधीन

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने स्पष्ट किया कि विपक्षी नेताओं द्वारा उठाए गए विषय पहले से न्यायालय के समक्ष लंबित हैं।

उन्होंने मुलाकात नहीं कर पाने के कारणों का उल्लेख करते हुए संबंधित नेताओं को ईमेल के माध्यम से उत्तर भेजा।

मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय के दरवाजे सभी नागरिकों के लिए खुले हैं। कोई भी नागरिक या निर्वाचित प्रतिनिधि उचित कानूनी प्रक्रिया के माध्यम से अपनी शिकायत लेकर न्यायालय आ सकता है।

इस स्थिति में विपक्षी प्रतिनिधिमंडल के साथ प्रशासनिक स्तर पर मुलाकात के बजाय औपचारिक याचिका के माध्यम से मामले को न्यायालय के समक्ष रखना उचित होगा।

यह निर्णय न्यायपालिका की संस्थागत प्रक्रिया और न्यायालय में लंबित मामलों के निस्तारण के निर्धारित तरीकों को रेखांकित करता है।

दिल्ली में सुरक्षा बढ़ी, मेट्रो और यातायात प्रभावित

विपक्षी दलों के प्रस्तावित मार्च और हाल के प्रदर्शनों के मद्देनजर दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की गई है।

सोमवार को सुरक्षा कारणों से छह मेट्रो स्टेशनों पर प्रवेश और निकास संबंधी प्रतिबंध लगाए गए। राजधानी के विभिन्न मार्गों पर यातायात प्रतिबंध और मार्ग परिवर्तन की व्यवस्था भी की गई।

पिछले दिनों प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच टकराव तथा कई लोगों को हिरासत में लिए जाने की घटनाओं के बाद प्रशासन ने अतिरिक्त सतर्कता बरती है।

पुलिस के सामने कानून-व्यवस्था बनाए रखने और आम नागरिकों की आवाजाही सुनिश्चित करने की चुनौती है। दूसरी ओर, विपक्षी दल शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शन के अपने संवैधानिक अधिकार का उल्लेख कर रहे हैं।

लोकतांत्रिक अधिकार और सार्वजनिक व्यवस्था के बीच संतुलन का प्रश्न

जंतर-मंतर की अधिसूचित प्रदर्शन स्थल के रूप में मान्यता समाप्त करने का निर्णय केवल प्रशासनिक बदलाव तक सीमित नहीं है। इससे सार्वजनिक स्थानों पर विरोध-प्रदर्शन के अधिकार और कानून-व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी के बीच संतुलन का प्रश्न भी सामने आया है।

भारतीय संविधान का अनुच्छेद 19 नागरिकों को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और शांतिपूर्ण सभा का अधिकार देता है। हालांकि, सार्वजनिक व्यवस्था के हित में इन अधिकारों पर कानून के अनुसार उचित प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं।

सर्वोच्च न्यायालय भी पूर्व के विभिन्न मामलों में स्पष्ट कर चुका है कि सार्वजनिक स्थानों पर प्रदर्शन को विनियमित किया जा सकता है, लेकिन प्रतिबंध मनमाने नहीं होने चाहिए।

मुख्य चुनाव आयुक्त को लेकर जारी राजनीतिक विवाद, विपक्ष के मार्च और जंतर-मंतर की मान्यता समाप्त किए जाने के बीच आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि दिल्ली में सार्वजनिक प्रदर्शनों की नई व्यवस्था किस प्रकार लागू होती है।

साथ ही SIR और मतदाता सूची से जुड़े आरोपों का कानूनी परीक्षण न्यायालय में उपलब्ध साक्ष्यों और निर्धारित संवैधानिक प्रक्रियाओं के आधार पर ही होगा।

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