महाराष्ट्र SIR प्रक्रिया पर सुप्रीम कोर्ट ने ECI से मांगा जवाब
महाराष्ट्र में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) में अनियमितताओं के आरोपों पर सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को नोटिस जारी कर जवाब मांगा।
- चुनाव आयोग को नोटिस: सर्वोच्च न्यायालय ने महाराष्ट्र में चल रही SIR प्रक्रिया में गड़बड़ी के दावों पर चुनाव आयोग से विस्तृत जवाब मांगा है।
- विपक्षी दलों की याचिका: विपक्षी नेताओं ने मतदाता सूचियों से वैध मतदाताओं के नाम हटाए जाने का आरोप लगाते हुए शीर्ष अदालत में याचिका दायर की थी।
- चुनावी पारदर्शिता पर जोर: सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराने के लिए मतदाता सूची की शुद्धता अति आवश्यक है।
समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली, 16 अक्तूबर: देश की सर्वोच्च अदालत (Supreme Court) ने महाराष्ट्र में भारत निर्वाचन आयोग (ECI) द्वारा चलाए जा रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) कार्यक्रम से जुड़ी एक महत्वपूर्ण याचिका पर सुनवाई करते हुए चुनाव आयोग को नोटिस जारी किया है। शीर्ष अदालत ने चुनाव आयोग से महाराष्ट्र में मतदाता सूचियों के अद्यतनीकरण और पुनरीक्षण प्रक्रिया में बरती जा रही कथित अनियमितताओं पर अपना आधिकारिक रुख और विस्तृत जवाब दाखिल करने को कहा है। चुनाव आयोग की निष्पक्षता और SIR प्रक्रिया को लेकर देश भर में जारी राजनीतिक घमासान के बीच सुप्रीम कोर्ट के इस रुख से मामले ने एक नया और निर्णायक मोड़ ले लिया है।
क्या है पूरा मामला और क्या हैं आरोप?
महाराष्ट्र में आगामी निकाय और राज्य स्तरीय चुनावी तैयारियों के तहत निर्वाचन आयोग द्वारा मतदाता सूचियों का विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) कराया जा रहा है। हालांकि, राज्य के विपक्षी दलों, नागरिक अधिकार संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इस प्रक्रिया पर बेहद गंभीर सवाल खड़े किए हैं। सर्वोच्च न्यायालय में दाखिल याचिका में दावा किया गया है कि SIR प्रक्रिया की आड़ में बड़े पैमाने पर धांधली हो रही है और राजनीतिक पूर्वाग्रह के तहत विशिष्ट समुदायों तथा विपक्षी समर्थकों के नाम मतदाता सूची से मनमाने ढंग से हटाए जा रहे हैं।
याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि प्रक्रियात्मक खामियों, बिना उचित भौतिक सत्यापन और मतदाताओं को पर्याप्त नोटिस दिए बिना उनके नाम वोटिंग लिस्ट से काटे जा रहे हैं, जो उनके मौलिक लोकतांत्रिक अधिकार का सीधा हनन है। इन्हीं आधारों पर उन्होंने चुनाव आयोग के फैसले को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की थी।
सुप्रीम कोर्ट का कड़ा रुख और निर्देश
मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ ने याचिका पर प्रारंभिक सुनवाई करते हुए मामले की संवेदनशीलता को स्वीकार किया। शीर्ष अदालत ने कहा कि लोकतंत्र की नींव स्वतंत्र, निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव व्यवस्था पर टिकी होती है, और निष्पक्ष चुनाव की पहली शर्त एक सटीक तथा त्रुटिहीन मतदाता सूची है।
सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को निर्देश दिया है कि वह महाराष्ट्र में अपनाई जा रही SIR प्रक्रिया के क्रियान्वयन, नाम जोड़ने और हटाने के नियमों तथा इस संबंध में प्राप्त शिकायतों पर की गई कार्रवाई की पूरी रिपोर्ट प्रस्तुत करे। अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि मतदाता सूची में किसी भी प्रकार की अनुचित कटौती या प्रशासनिक लापरवाही पाई जाती है, तो उसे कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
राजनीतिक हलकों में भूचाल और तीखी प्रतिक्रियाएं
सुप्रीम कोर्ट द्वारा चुनाव आयोग से जवाब मांगे जाने के बाद महाराष्ट्र और केंद्र की राजनीति में सरगर्मी काफी बढ़ गई है। विपक्षी गठबंधन ‘INDIA’ के घटक दलों, समाजवादी पार्टी, शिवसेना (यूबीटी) और कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) जैसे संगठनों ने इस अदालती कदम का स्वागत किया है। विपक्षी नेताओं का कहना है कि वे लंबे समय से ‘वोट चोरी’ और प्रशासनिक मिलीभगत का आरोप लगा रहे थे, जिसे अब न्यायपालिका के पटल पर गंभीरता से लिया जा रहा है।
दूसरी ओर, सत्तारूढ़ दल और चुनाव आयोग से जुड़े सूत्रों का कहना है कि SIR प्रक्रिया पूरी तरह से पारदर्शी और कानूनी प्रावधानों के तहत चलाई जा रही है। उनका दावा है कि दोहरे मतदाताओं (Duplicate Voters), मृत व्यक्तियों और स्थानांतरित हो चुके लोगों के नाम हटाने के लिए ही यह अभियान चलाया गया है ताकि फर्जी मतदान की संभावनाओं को पूरी तरह खत्म किया जा सके।
पारदर्शी चुनाव और भविष्य की दिशा
महाराष्ट्र में जारी इस SIR विवाद और सुप्रीम कोर्ट के दखल ने देश की चुनावी व्यवस्था पर जन-सामान्य के भरोसे के मुद्दे को केंद्र में ला दिया है। आने वाले दिनों में चुनाव आयोग द्वारा दाखिल किए जाने वाले जवाब से यह तय होगा कि क्या महाराष्ट्र में मतदाता पुनरीक्षण की इस प्रक्रिया पर रोक लगेगी या इसमें संशोधन के आदेश दिए जाएंगे। देश की निगाहें अब सुप्रीम कोर्ट में होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी हुई हैं।