हरियाणा में बिजली कर्मचारियों की हड़ताल हुई समाप्त

मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के साथ कर्मचारी संगठनों की उच्चस्तरीय बैठक सफल, तीन दिन बाद हड़ताल खत्म होने से आम जनता को राहत।

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  • सीएम नायब सिंह सैनी के साथ बैठक के बाद बिजली हड़ताल खत्म।
  • निजीकरण के विरोध में तीन दिन से ठप थी बिजली आपूर्ति।
  • तुरंत काम पर लौटेंगे कर्मचारी, बिजली बहाली का काम शुरू।

समग्र समाचार सेवा
चंडीगढ़, 24 अक्तूबर: हरियाणा राज्य में पिछले तीन दिनों से चल रहा बिजली कर्मचारियों का विरोध प्रदर्शन और हड़ताल आखिरकार समाप्त हो गई है। राज्य के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी के साथ कर्मचारी संगठनों के प्रतिनिधियों की हुई एक उच्चस्तरीय और महत्वपूर्ण बैठक के बाद हड़ताल वापस लेने का बड़ा फैसला लिया गया। इस निर्णय से राज्यभर के आम नागरिकों, औद्योगिक इकाइयों, अस्पतालों और प्रशासनिक संस्थानों ने बड़ी राहत की सांस ली है। हड़ताल समाप्त होने के बाद कर्मचारी तुरंत अपने काम पर लौट आए हैं और युद्धस्तर पर बिजली आपूर्ति बहाल करने के कार्यों में जुट गए हैं।

क्यों शुरू हुई थी बिजली कर्मियों की हड़ताल?

पिछले कुछ दिनों से गुरुग्राम और नूंह जिलों में निजी कंपनी ‘इलेवन पावर’ को बिजली आपूर्ति का लाइसेंस दिए जाने के प्रस्ताव का कड़ा विरोध किया जा रहा था। इसी निजीकरण के फैसले के खिलाफ राज्यभर के बिजली कर्मचारी और विभिन्न यूनियनें अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चली गई थीं। इस हड़ताल के कारण राज्य के कई हिस्सों में बिजली व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई थी, जिससे जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया था। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए ऊर्जा मंत्री अनिल विज ने भी लगातार कर्मचारियों से काम पर लौटने की अपील की थी और सरकार विभिन्न स्तरों पर समाधान तलाश रही थी।

पंचकूला में हुई उच्चस्तरीय बैठक और संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस

पंचकूला स्थित पीडब्ल्यूडी रेस्ट हाउस में सरकार और कर्मचारी संगठनों के बीच एक दौर की मैराथन बैठक हुई। इस संयुक्त बैठक में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी, ऊर्जा मंत्री अनिल विज और मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी विशेष रूप से मौजूद रहे। वहीं, कर्मचारी संगठनों की ओर से संयुक्त मोर्चा के नेता देवेंद्र हुड्डा और अनुबंधित कर्मचारी संघ के प्रदेश महामंत्री जीवन सिंह ठाकुर ने हिस्सा लिया।

विस्तृत चर्चा के बाद सरकार ने कर्मचारियों की प्रमुख मांगों और आपत्तियों पर सकारात्मक रुख दिखाया, जिसके बाद गतिरोध समाप्त हो गया। बैठक के बाद आयोजित संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में कर्मचारी नेताओं ने घोषणा की कि सरकार के साथ बनी सहमति के बाद वे अपनी हड़ताल तुरंत प्रभाव से समाप्त कर रहे हैं।

हड़ताल के दौरान राज्य में दिखा व्यापक असर

इस तीन दिवसीय हड़ताल का व्यापक और नकारात्मक प्रभाव पूरे हरियाणा के जनजीवन पर पड़ा:

औद्योगिक उत्पादन ठप: सोनीपत, करनाल, रोहतक, रेवाड़ी, बहादुरगढ़ और गुरुग्राम जैसे प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों में उत्पादन बुरी तरह प्रभावित हुआ। अकेले गुरुग्राम के उद्यमियों ने एक दिन में 1,500 करोड़ रुपये से अधिक का कारोबार प्रभावित होने की आशंका जताई थी।

स्वास्थ्य और शिक्षा सेवाएं: भिवानी के नागरिक अस्पताल और मेडिकल कॉलेज में बिजली गुल होने से मरीजों को परेशानी हुई। वहीं करनाल और अन्य जिलों में फीडर बंद रहने के कारण शिक्षण संस्थानों को भी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा।

ग्रामीण और शहरी इलाकों में ब्लैकआउट: राज्य के लगभग आठ जिलों के 1,190 से अधिक गांवों और कॉलोनियों में बिजली आपूर्ति बाधित रही। पानीपत, फरीदाबाद, यमुनानगर और रोहतक में लोगों को 15 से 16 घंटे तक बिजली संकट से जूझना पड़ा।

अनाज मंडियों में कामकाज प्रभावित: जीटी बेल्ट की प्रमुख अनाज मंडियों में बिजली न होने के कारण धान की उठान, तुलाई और सफाई का कार्य रुक गया था, जिससे आढ़तियों और किसानों को भारी असुविधा हुई।

सरकार का सकारात्मक रुख और भविष्य की रूपरेखा

मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार कर्मचारियों के हितों की रक्षा करने और जनता को निर्बाध बिजली सेवाएं प्रदान करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। सरकार और कर्मचारियों के बीच संवाद के माध्यम से निकला यह समाधान इस बात का प्रमाण है कि जटिल समस्याओं का हल बातचीत से ही संभव है।

हड़ताल खत्म होने के साथ ही बिजली निगमों के तकनीकी कर्मचारियों ने ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में खराब पड़ी लाइनों और ट्रांसफॉर्मर को ठीक करने का काम युद्धस्तर पर शुरू कर दिया है। उम्मीद जताई जा रही है कि अगले कुछ घंटों में राज्य की पूरी बिजली व्यवस्था सामान्य पटरी पर लौट आएगी।

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