सोनिया गांधी की आत्मकथा 10 नवंबर को होगी रिलीज

कांग्रेस नेता सोनिया गांधी ने अपनी आने वाली किताब को लेकर कहा— दशकों तक दूसरे मेरी कहानी सुनाते रहे, अब मेरी बारी है।

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  • सोनिया गांधी की आत्मकथा 10 नवंबर 2026 को होगी रिलीज।
  • कहा- दशकों तक दूसरों ने मेरी कहानी सुनाई, अब मेरी बारी।
  • राजीव गांधी के प्रधानमंत्री बनने के खिलाफ थीं सोनिया।

समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली, 27 अक्तूबर: भारतीय राजनीतिक गलियारों में इन दिनों कांग्रेस पार्टी की वरिष्ठ नेता और पूर्व अध्यक्षा सोनिया गांधी की आगामी आत्मकथा को लेकर सरगर्मी काफी बढ़ गई है। आगामी 10 नवंबर 2026 को रिलीज होने वाली उनकी इस किताब को लेकर राजनीतिक जानकारों और समर्थकों में भारी उत्सुकता है। हाल ही में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक वीडियो संदेश जारी करते हुए सोनिया गांधी ने अपनी इस किताब के बारे में खुलकर बात की है। उन्होंने कहा कि उनके जीवन और राजनीतिक यात्रा को लेकर अब तक तमाम लोगों ने अपने-अपने नजरिए से बहुत कुछ लिखा और कहा है, लेकिन अब वक्त आ गया है कि वे खुद अपनी कहानी दुनिया के सामने रखें।

सोनिया गांधी के इस बयान और उनकी आत्मकथा के खुलासों ने भारतीय राजनीति के कई अनछुए पहलुओं पर से पर्दा उठाने के संकेत दे दिए हैं, जिससे राजनीतिक हलकों में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है।

‘जब किताब आएगी तो तमाशा होना तय है’

अपने वीडियो संदेश में बेहद स्पष्ट और बेबाक अंदाज में सोनिया गांधी ने कहा कि जब कोई व्यक्ति सार्वजनिक जीवन (Public Life) में लंबा वक्त बिताता है और उसके बाद अपनी आत्मकथा लिखता है, तो यह स्वाभाविक है कि उस पर विभिन्न प्रतिक्रियाएं सामने आएंगी। उन्होंने तंज भरे लहजे में कहा, “जब यह किताब आएगी, तो तमाशा होना तय है। आखिर, इतने दशकों तक दूसरे लोग मेरी कहानी सुनाते रहे हैं, अब मेरी बारी है।”

उन्होंने आगे कहा कि उनके जीवन के बारे में पहले ही बहुत कुछ लिखा जा चुका है, जिसमें से कई बातें ऐसी थीं जो पूरी तरह सही नहीं थीं या जिन्हें बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया था। यही वजह है कि उन्होंने महसूस किया कि उनके जीवन के वास्तविक तथ्यों को ठीक वैसे ही सामने रखा जाना चाहिए जैसे वे वास्तव में थे। यह केवल किसी का दृष्टिकोण या वर्जन नहीं है, बल्कि उनके जीवन की सच्ची कहानी है।

राजीव गांधी के प्रधानमंत्री बनने के खिलाफ थीं सोनिया

सोनिया गांधी ने अपनी इस प्रेम-यात्रा और पारिवारिक जीवन के शुरुआती पन्नों को याद करते हुए साझा किया कि कैम्ब्रिज के एक छोटे से ग्रीक रेस्तरां से उनकी प्रेम-यात्रा शुरू हुई थी। उन्होंने और राजीव गांधी ने प्यार, हंसी और अनमोल यादों से भरी एक खूबसूरत दुनिया बनाई थी। हालांकि, राजनीतिक मोर्चे पर जीवन तब पूरी तरह बदल गया जब देश की परिस्थितियों के चलते राजीव गांधी को राजनीति में आना पड़ा।

सोनिया ने खुलासा किया कि जब उनके दिवंगत पति राजीव गांधी को देश का प्रधानमंत्री बनने के लिए कहा गया था, तब वह इसके पूरी तरह खिलाफ थीं। वह नहीं चाहती थी कि उनका परिवार इस जटिल राजनीतिक दलदल में उतरे, क्योंकि वे एक शांत और साधारण पारिवारिक जीवन बिताना चाहती थी। हालांकि, देश के हालात और राजनीतिक जिम्मेदारियों के बीच उन्हें इस वास्तविकता को स्वीकार करना पड़ा।

राजनीतिक और व्यक्तिगत जीवन के कई अनछुए पहलू आएंगे सामने

कांग्रेस पार्टी के भीतर और देश के राजनीतिक इतिहास में कई उतार-चढ़ाव देखने वाली सोनिया गांधी की यह आत्मकथा कई मायनों में ऐतिहासिक होने जा रही है। 10 नवंबर को रिलीज होने वाली इस पुस्तक में न केवल उनके विदेशी मूल से लेकर भारतीय राजनीति के शीर्ष तक के सफर का जिक्र होगा, बल्कि देश की कई महत्वपूर्ण राजनीतिक घटनाओं के पीछे की अंदरूनी कहानियों का भी खुलासा होने की उम्मीद है।

निष्कर्ष

सोनिया गांधी की यह आत्मकथा भारतीय राजनीति के इतिहास में एक महत्वपूर्ण दस्तावेज साबित हो सकती है। किताब के आने से पहले ही उनके बयानों ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है, और यह देखना दिलचस्प होगा कि इस पुस्तक के प्रकाशन के बाद राजनीतिक परिदृश्य पर इसका क्या असर पड़ता है।

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