आजम खान की जौहर यूनिवर्सिटी पर ईडी की बड़ी कार्रवाई, सरकारी धन के दुरुपयोग के आरोप में संपत्ति कुर्क
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प्रवर्तन निदेशालय ने आजम खान से जुड़ी मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी की संपत्ति कुर्क करने की कार्रवाई की।
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जांच का संबंध सरकारी धन के कथित दुरुपयोग और वित्तीय अनियमितताओं से है।
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यह कार्रवाई विश्वविद्यालय के वित्तीय संचालन और सार्वजनिक संसाधनों के इस्तेमाल पर सवाल उठाती है।
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संपत्ति की कुर्की जांच प्रक्रिया का हिस्सा है; इससे आरोप स्वतः सिद्ध नहीं होते।
समग्र समाचार सेवा
रामपुर, उत्तर प्रदेश 29 अक्टूबर :रामपुर। समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता एवं उत्तर प्रदेश के पूर्व मंत्री आजम खान से जुड़ी मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बड़ी कार्रवाई की है। सरकारी धन के कथित दुरुपयोग और वित्तीय अनियमितताओं से जुड़े मामले में केंद्रीय जांच एजेंसी ने विश्वविद्यालय से संबंधित संपत्ति कुर्क करने की कार्रवाई की है।
यह मामला सार्वजनिक धन के इस्तेमाल, शैक्षणिक संस्थानों की वित्तीय जवाबदेही और राजनीतिक प्रभाव से जुड़े सवालों के कारण महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
1,170 करोड़ रुपये की संपत्ति पर कार्रवाई
ईडी के अनुसार, 28 अक्टूबर को धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 के तहत विश्वविद्यालय की जमीन और इमारतों को अस्थायी रूप से कुर्क किया गया। एजेंसी ने 426.46 करोड़ रुपये की संपत्ति को कथित अपराध से अर्जित संपत्ति के रूप में चिह्नित किया है, जबकि कुर्क संपत्तियों का वर्तमान बाजार मूल्य लगभग 1,170 करोड़ रुपये बताया गया है।
विश्वविद्यालय का संचालन मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट करता है, जिसकी स्थापना आजम खान ने की थी। वह विश्वविद्यालय के मानद कुलाधिपति भी हैं।
सरकारी ठेकों और विकास निधि के दुरुपयोग के आरोप
जांच एजेंसी का दावा है कि विश्वविद्यालय के निर्माण में सरकारी परियोजनाओं के लिए आवंटित धन और निर्माण सामग्री का कथित रूप से इस्तेमाल किया गया।
ईडी के अनुसार, लोक निर्माण विभाग के लगभग 186 करोड़ रुपये के ठेके प्राप्त करने वाली एक कंपनी के प्रबंध निदेशक ने जांच के दौरान कथित तौर पर बताया कि ठेके की राशि का 30 से 40 प्रतिशत हिस्सा विश्वविद्यालय के निर्माण के लिए सामग्री खरीदने में खर्च किया गया।
इसके अतिरिक्त, विधायक और विधान परिषद सदस्य स्थानीय क्षेत्र विकास निधि से लगभग 6.60 करोड़ रुपये के कार्य विश्वविद्यालय परिसर में कराए जाने का भी आरोप है।
जमीन अधिग्रहण और वित्तीय रिकॉर्ड की जांच
ईडी की जांच रामपुर के अजीमनगर थाने में दर्ज 26 प्राथमिकियों के आधार पर शुरू हुई थी। इनमें किसानों की कृषि भूमि कथित रूप से जबरन लिए जाने और लगभग 34 एकड़ शत्रु संपत्ति पर अवैध कब्जे के आरोप शामिल हैं।
जांच में विश्वविद्यालय परिसर की अनुमानित लागत 499.09 करोड़ रुपये आंकी गई, जबकि एजेंसी के अनुसार केवल 72.63 करोड़ रुपये के व्यय का स्रोत वैध रूप से स्पष्ट हो सका। शेष 426.46 करोड़ रुपये को ईडी ने कथित अपराध से अर्जित संपत्ति माना है।
सार्वजनिक धन की जवाबदेही पर गंभीर सवाल
इस कार्रवाई ने सरकारी संसाधनों के इस्तेमाल और निजी शैक्षणिक संस्थानों की वित्तीय पारदर्शिता को लेकर महत्वपूर्ण प्रश्न खड़े किए हैं।
किसी भी शैक्षणिक संस्थान के विकास में सार्वजनिक धन का उपयोग निर्धारित नियमों, स्वीकृत उद्देश्यों और कानूनी प्रावधानों के अनुरूप होना आवश्यक है।
हालांकि, ईडी द्वारा संपत्ति कुर्क किया जाना अंतिम न्यायिक निर्णय नहीं है। आरोपों की सत्यता और संबंधित व्यक्तियों की आपराधिक जिम्मेदारी का निर्धारण कानूनी प्रक्रिया के तहत होगा।
जांच एजेंसी के अनुसार, मामले में आगे की जांच जारी है।