भारतीय पायलट स्मित मच्छार को यूएई का सर्वोच्च सम्मान
गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद अदम्य साहस का परिचय देते हुए 180 यात्रियों की जान बचाने वाले भारतीय कैप्टन स्मित मच्छार को यूएई सरकार ने किया सम्मानित।
- भारतीय पायलट कैप्टन स्मित मच्छार को मिला यूएई का सर्वोच्च सम्मान।
- कॉकपिट में हमले के बावजूद 180 यात्रियों की बचाई थी सुरक्षित जान।
- यूएई के शीर्ष नेतृत्व ने अदम्य साहस और कर्तव्यनिष्ठा की सराहना की।
समग्र समाचार सेवा
दुबई, 28 अक्तूबर: वैश्विक उड्डयन जगत और भारतीय प्रवासियों के लिए एक गर्व से भरा क्षण सामने आया है, जब संयुक्त अरब अमीरात (UAE) की सरकार ने फ्लाईदुबई के भारतीय कैप्टन स्मित मच्छार (Smit Machchhar) को उनके असाधारण साहस, सूझबूझ और कर्तव्यनिष्ठा के लिए देश के सर्वोच्च सम्मान से नवाजा है। कैप्टन स्मित ने कुछ समय पूर्व एक बेहद खतरनाक और संकटपूर्ण स्थिति के दौरान मौत को मात देते हुए विमान में सवार 180 से अधिक यात्रियों की जिंदगियों को सुरक्षित बचाया था।
उनकी इस वीरता और त्वरित निर्णय क्षमता ने न केवल एक बड़े विमान हादसे को टाल दिया, बल्कि पूरी दुनिया में भारत का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया है। यूएई के शीर्ष नेतृत्व ने आधिकारिक रूप से उनके इस साहसी कदम को सलाम करते हुए उन्हें सम्मानित किया है।
क्या थी वह भयावह घटना और कैसे टला बड़ा हादसा?
यह पूरी घटना गत 30 सितंबर को दुबई से तेल अवीव (इजरायल) के लिए उड़ान भरने वाली फ्लाईदुबई की फ्लाइट FZ1073 के दौरान पेश आई थी। उड़ान के दौरान विमान के कॉकपिट में उस समय हड़कंप मच गया जब उनके साथ मौजूद ओमानी को-पायलट ने अचानक उन पर जानलेवा हमला कर दिया। हमलावर को-पायलट ने विमान को नीचे गिराने और क्रैश करने की दुर्भावना से कैप्टन स्मित पर कॉकपिट में ही मौजूद आपातकालीन कुल्हाड़ी से कई वार किए।
इस अचानक हुए हिंसक हमले में कैप्टन स्मित मच्छार गंभीर रूप से घायल हो गए और उनके सिर व शरीर पर गहरी चोटें आईं, जिससे अत्यधिक खून बहने लगा। इसके बावजूद, उन्होंने अपनी व्यक्तिगत पीड़ा और जान की परवाह न करते हुए गजब की मानसिक दृढ़ता का परिचय दिया। उन्होंने अपनी सूझबूझ से कॉकपिट का दरवाजा खुलवाने में मदद की, जिसके बाद फ्लाइट के अन्य क्रू मेंबर और यात्रियों ने अंदर पहुंचकर हमलावर को पूरी तरह काबू में कर लिया।
गंभीर रूप से घायल होने के बाद भी कराई सुरक्षित इमरजेंसी लैंडिंग
हमले और झड़प के दौरान विमान लगभग 17,000 फीट की ऊंचाई से तेजी से नीचे की ओर गोता खाने लगा था, जिससे यात्रियों की सांसें अटक गई थीं। हालांकि, घायल अवस्था में भी कैप्टन स्मित ने विमान से अपहरण (Hijack) से जुड़े आपातकालीन सिग्नल प्रसारित किए। विमान में मौजूद अन्य ऑफ-ड्यूटी पायलटों और क्रू की मदद से मार्ग बदलकर विमान को सऊदी अरब के तबुक हवाई अड्डे पर सुरक्षित उतार लिया गया।
इस आपातकालीन और सफल लैंडिंग के कारण विमान में सवार सभी 180 यात्रियों और क्रू सदस्यों की जान सुरक्षित बचा ली गई। चिकित्सा जांच में सामने आया कि कैप्टन स्मित को गंभीर चोटें आई थीं, लेकिन उनकी तत्परता ने एक भीषण आपदा को टाल दिया।
यूएई के शीर्ष नेतृत्व ने की अदम्य साहस की सराहना
कैप्टन स्मित मच्छार की इस वीरतापूर्ण उपलब्धि पर यूएई के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान और उपराष्ट्रपति व प्रधानमंत्री तथा दुबई के शासक शेख मोहम्मद बिन राशिद अल मकतूम ने विशेष रूप से मुलाकात कर उनकी सराहना की और उन्हें सम्मानित किया। इसके अलावा, दुबई के क्राउन प्रिंस शेख हमदान बिन मोहम्मद बिन राशिद अल नाहयान ने अस्पताल में उपचाराधीन कैप्टन स्मित से स्वयं मुलाकात कर उनके हौसले को दाद दी थी।
यूएई के नेतृत्व ने कहा कि इस प्रकार के संकटपूर्ण क्षणों में यात्रियों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देना और अपनी जान की बाजी लगाकर कर्तव्य निभाना सच्ची मानवता और पेशेवर प्रतिबद्धता की मिसाल है। यूएई सरकार द्वारा मिला यह सर्वोच्च सम्मान इस बात का प्रमाण है कि बहादुरी की कोई सीमा नहीं होती और यह किसी भी राष्ट्रीयता की सीमाओं से परे होती है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मिल रहा है व्यापक सम्मान
यूएई के सर्वोच्च सम्मान के अलावा, अंतरराष्ट्रीय उड्डयन संगठनों और इजरायल सरकार द्वारा भी कैप्टन स्मित मच्छार को उनकी इस ऐतिहासिक बहादुरी के लिए सम्मानित किए जाने की घोषणा की जा चुकी है। मीडिया और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर उन्हें ‘हीरो पायलट’ के रूप में सराहा जा रहा है। गंभीर शारीरिक चोटों से उबरने के बाद भी विमानन के प्रति उनका जुनून और समर्पण कम नहीं हुआ है, जो दुनिया भर के युवाओं के लिए प्रेरणा का एक बड़ा स्रोत बन गया है।
निष्कर्ष
कैप्टन स्मित मच्छार की यह गाथा यह साबित करती है कि कठिन से कठिन और विपरीत परिस्थितियों में भी यदि संयम, साहस और अटूट कर्तव्यनिष्ठा का परिचय दिया जाए, तो बड़े से बड़े संकट को टाला जा सकता है। उनकी यह उपलब्धि हर भारतीय के लिए गर्व का विषय है।