राज्य बिजली कंपनियों के लिए ऊर्जा भंडारण अनिवार्य करने की तैयारी
स्वच्छ ऊर्जा को रात तक पहुंचाने पर जोर
- केंद्र सरकार राज्य बिजली उपयोगिताओं के लिए ऊर्जा भंडारण क्षमता जोड़ना अनिवार्य करने की तैयारी में।
- उद्देश्य—दिन में पैदा होने वाली अतिरिक्त सौर और पवन बिजली को शाम और रात की मांग के लिए सुरक्षित रखना।
- सरकार ने ऊर्जा भंडारण परियोजनाओं के लिए लगभग ₹14,500 करोड़ की सहायता योजना की घोषणा की है।
- जुलाई 2027 से नई सरकारी सौर और पवन परियोजनाओं में बैटरी भंडारण अनिवार्य करने की भी योजना।
समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली, 5 नवंबर:भारत की तेजी से बढ़ती सौर और पवन ऊर्जा क्षमता के सामने सबसे बड़ी समस्याओं में से एक यह है कि उत्पादन और मांग का समय अक्सर एक जैसा नहीं होता। दिन में सौर ऊर्जा बड़ी मात्रा में उपलब्ध होती है, लेकिन बिजली की मांग शाम और रात में भी ऊंची बनी रहती है।
इसी अंतर को दूर करने के लिए केंद्र सरकार राज्य बिजली कंपनियों को ऊर्जा भंडारण क्षमता विकसित करने के लिए बाध्य करने की योजना बना रही है। केंद्रीय विद्युत सचिव पंकज अग्रवाल ने भारत नवीकरणीय ऊर्जा सम्मेलन में कहा कि इस दिशा में नीति तैयार की जा रही है।
बैटरी में सुरक्षित होगी अतिरिक्त बिजली
ऊर्जा भंडारण प्रणाली के माध्यम से दिन में उत्पन्न अतिरिक्त सौर और पवन बिजली को बैटरियों या अन्य भंडारण माध्यमों में सुरक्षित रखा जा सकता है और शाम या रात में अधिक मांग के समय इस्तेमाल किया जा सकता है।
अभी पर्याप्त भंडारण सुविधा नहीं होने के कारण कई राज्यों को शाम की मांग पूरी करने के लिए कोयला आधारित बिजली उत्पादन बढ़ाना पड़ता है, भले ही देश में गैर-जीवाश्म ऊर्जा क्षमता 300 गीगावाट से अधिक हो चुकी हो।
सरकार ने फिलहाल यह स्पष्ट नहीं किया है कि राज्य बिजली कंपनियों को कितनी भंडारण क्षमता अनिवार्य रूप से स्थापित करनी होगी। नीति के विवरण पर अभी काम चल रहा है।
₹14,500 करोड़ की सहायता योजना
केंद्र सरकार ने ऊर्जा भंडारण परियोजनाओं के विकास के लिए लगभग ₹145 अरब, यानी करीब ₹14,500 करोड़ की वित्तीय सहायता योजना की भी घोषणा की है।
इसका उद्देश्य ऐसी परियोजनाओं की आर्थिक व्यवहार्यता बढ़ाना है, क्योंकि बड़े स्तर पर बैटरी भंडारण अभी भी महंगा है।
सरकार ने यह भी संकेत दिया है कि भविष्य की नवीकरणीय ऊर्जा निविदाओं में भंडारण को बढ़ती प्राथमिकता दी जाएगी। जुलाई 2027 से सरकारी क्षेत्र की नई सौर और पवन परियोजनाओं में बैटरी भंडारण अनिवार्य करने की योजना है।
कोयले पर दबाव कम करने की कोशिश
भारत ने नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता में तेजी से विस्तार किया है, लेकिन बिजली प्रणाली को विश्वसनीय बनाए रखने के लिए केवल उत्पादन क्षमता पर्याप्त नहीं है।
कम वर्षा और अल नीनो जैसी परिस्थितियों के कारण जलविद्युत उत्पादन में गिरावट ने भी बिजली व्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव डाला है। ऐसे में भंडारण क्षमता ऊर्जा सुरक्षा का महत्वपूर्ण हिस्सा बन रही है।
यदि सौर और पवन बिजली को बड़े स्तर पर संग्रहित किया जा सके, तो पीक समय में कोयला आधारित बिजली संयंत्रों पर निर्भरता कम हो सकती है।
महत्त्व
यह नीति भारत के ऊर्जा परिवर्तन का अगला महत्वपूर्ण चरण हो सकती है। नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन बढ़ाने के बाद अब चुनौती उसे चौबीसों घंटे उपलब्ध कराने की है। ऊर्जा भंडारण से ग्रिड स्थिरता, बिजली आपूर्ति और स्वच्छ ऊर्जा के उपयोग में सुधार हो सकता है।