छठ पूजा से पहले मुंबई में प्रदूषण SOP पर सियासी घमासान
मुंबई में छठ पूजा के दौरान प्रदूषण नियंत्रण के लिए विशेष एसओपी (SOP) जारी करने की मनसे (MNS) की मांग पर गरमाई सियासत, एकनाथ शिंदे की शिवसेना और मनसे आमने-सामने।
- मनसे ने छठ पूजा के लिए विशेष प्रदूषण SOP जारी करने की मांग की।
- शिंदे गुट की शिवसेना ने मनसे पर लगाया त्योहारों की राजनीति करने का आरोप।
- समुद्र और नदियों के किनारों पर कचरा रोकने के लिए कड़े नियमों की वकालत।
समग्र समाचार सेवा
मुंबई, 05 नवंबर: देशभर में आस्था के महापर्व ‘छठ पूजा’ (Chhath Puja) की तैयारियां जोरों पर हैं, लेकिन वित्तीय राजधानी मुंबई में इस पावन पर्व से ठीक पहले एक बड़ा राजनीतिक घमासान छिड़ गया है। महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) द्वारा छठ पूजा के दौरान पर्यावरण सुरक्षा और प्रदूषण नियंत्रण को ध्यान में रखते हुए एक विशेष मानक संचालन प्रक्रिया (Standard Operating Procedure – SOP) जारी करने की मांग किए जाने के बाद राज्य का सियासी पारा पूरी तरह चढ़ गया है। इस मांग के सामने आने के बाद राज ठाकरे की पार्टी मनसे और मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना (Shinde Shiv Sena) के नेता आमने-सामने आ गए हैं। दोनों दलों के बीच बयानबाजी का दौर तेज हो गया है, जिससे आने वाले दिनों में यह मुद्दा और तूल पकड़ सकता है।
मनसे की मांग: पर्यावरण संरक्षण और कृत्रिम तालाबों पर जोर
राज ठाकरे की पार्टी मनसे के नेताओं और पदाधिकारियों ने मांग उठाई है कि जिस प्रकार दीवाली, गणेशोत्सव और अन्य बड़े त्योहारों के दौरान प्रदूषण नियंत्रण और कचरा प्रबंधन के लिए प्रशासन द्वारा विशेष दिशा-निर्देश (SOP) जारी किए जाते हैं, उसी प्रकार छठ पूजा के लिए भी सख्त नियम होने चाहिए।
मनसे का तर्क है कि मुंबई के समुद्र तटों और नदियों के किनारों पर भारी संख्या में लोग पूजा के लिए इकट्ठा होते हैं, जिसके बाद जल स्रोतों में प्रदूषण और प्लास्टिक कचरे के फैलने की आशंका बनी रहती है। पार्टी का कहना है कि वे किसी भी धार्मिक आयोजन के विरोधी नहीं हैं, लेकिन पर्यावरण और जल संरक्षण को प्राथमिकता देते हुए तटीय इलाकों के बजाय कृत्रिम तालाबों (Artificial Ponds) में पूजा की व्यवस्था को बढ़ावा दिया जाना चाहिए ताकि समुद्री जीव-जंतुओं और प्रकृति को नुकसान न पहुंचे।
शिंदे शिवसेना का तीखा पलटवार: “हर बार हिंदू त्योहारों को ही क्यों बनाया जाता है निशाना?”
मनसे की इस मांग पर एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना ने कड़ी आपत्ति जताई है और इसे विपक्ष की राजनीतिक साजिश करार दिया है। महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अध्यक्ष और शिंदे शिवसेना के वरिष्ठ नेताओं ने कहा कि प्रशासन पर्यावरण सुरक्षा को लेकर पहले से ही पूरी तरह सतर्क रहता है, लेकिन कुछ दल जानबूझकर हर बार सनातन और हिंदू त्योहारों को ही निशाना बनाते हैं।
शिंदे शिवसेना के प्रवक्ता और उत्तर भारतीय नेता आनंद दुबे ने मनसे पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि सनातन संस्कृति और परंपराओं में हमेशा से प्रकृति, नदियों और पर्यावरण का सम्मान करना सिखाया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग राजनीतिक रोटियां सेकने के लिए इस तरह के विवाद खड़े कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि छठ मइया और अन्य धार्मिक आस्थाओं से जुड़े आयोजनों में रुकावट डालने या उनके खिलाफ इस तरह की बयानबाजी करने के बजाय समाज को जोड़ने का प्रयास किया जाना चाहिए।
उत्तर भारतीय मतदाताओं और आगामी राजनीति पर नजर
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मुंबई और महानगरपालिका (BMC) के आगामी चुनावों को ध्यान में रखते हुए इस प्रकार के सांस्कृतिक और धार्मिक मुद्दे तेजी से तूल पकड़ते हैं। मुंबई में उत्तर भारतीय समुदाय की एक बड़ी आबादी निवास करती है, जो छठ पूजा के पर्व को बेहद श्रद्धा और भव्यता के साथ मनाती है। ऐसे में किसी भी दल द्वारा इस पर्व से जुड़े नियमों या एसओपी पर सवाल उठाना सीधे तौर पर राजनीतिक नफा-नुकसान से जुड़ा माना जा रहा है।
फिलहाल, महाराष्ट्र सरकार और प्रशासनिक निकायों की ओर से इस मामले में कोई अंतिम निर्देश जारी नहीं किया गया है, लेकिन राजनीतिक दलों के बीच छिड़ी इस तनातनी ने माहौल को गरमा दिया है।
निष्कर्ष
छठ पूजा से ठीक पहले मुंबई में उठा यह प्रदूषण एसओपी विवाद एक बार फिर इस बात की ओर इशारा करता है कि महाराष्ट्र की राजनीति में सांस्कृतिक आयोजनों और पर्यावरण संरक्षण के मुद्दों को किस प्रकार राजनीतिक चश्मे से देखा जाने लगा है। प्रशासन के लिए यह संतुलन बनाना एक बड़ी चुनौती होगा कि वह धार्मिक आस्थाओं का सम्मान करते हुए पर्यावरण की रक्षा कैसे सुनिश्चित करे।