समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली,8अगस्त। बांग्लादेश में आरक्षण हटाने की मांग को लेकर शुरू हुआ आंदोलन अब भयावह रूप ले चुका है। इस हिंसा में अब तक 400 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है। सोमवार को बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया और भारत आ गईं। वहीं, प्रदर्शनकारियों ने हिंदुओं के घरों पर पत्थराव किया और आग लगा दी। इतना ही नहीं, उन्होंने बांग्लादेश के मंदिरों को भी निशाना बनाया।
योग गुरु बाबा रामदेव ने बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे हमलों की कड़ी निंदा की है। उन्होंने कहा कि वहां के हिंदू घरों, मंदिरों, और व्यापारिक प्रतिष्ठानों पर जानबूझकर हो रहे हमले शर्मनाक और खतरनाक हैं। बाबा रामदेव ने केंद्र सरकार से बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों की सुरक्षा के लिए राजनयिक और राजनीतिक स्तर पर हर संभव प्रयास करने की अपील की है।
बांग्लादेश में चल रहे राजनीतिक उथल-पुथल के बीच वहां रह रहे हिंदुओं की सुरक्षा को लेकर बाबा रामदेव ने चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि भारत को अपने हिंदू भाइयों की मां, बहन, और बेटियों के सम्मान और गरिमा की रक्षा के लिए सतर्क रहना होगा।
बाबा रामदेव ने आरोप लगाया कि कुछ लोग देश में जाति, धर्म और आरक्षण के नाम पर अशांति पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि इन प्रयासों का डटकर मुकाबला करना होगा। इस बीच, कई पूर्व राजनयिकों और विशेषज्ञों ने भी बांग्लादेश की स्थिति पर चिंता जताई है। उन्होंने भारत सरकार से सतर्क रहने की अपील की है।
बांग्लादेश में छात्रों के विरोध प्रदर्शन सिविल सेवा कोटे को खत्म करने की मांग से शुरू हुए थे, लेकिन बाद में ये बड़े पैमाने पर सरकार विरोधी प्रदर्शनों में बदल गए, जिसके कारण प्रधानमंत्री शेख हसीना को इस्तीफा देना पड़ा और उन्हें देश छोड़ना पड़ा। शेख हसीना सोमवार को भारत पहुंची थीं।
योग गुरु बाबा रामदेव ने कहा, “बांग्लादेश में हिंदुओं पर कोई क्रूरता या अत्याचार नहीं होना चाहिए – चाहे वहां व्यापार करने वाले हिंदू हों, या वहां के हिंदू मंदिर हों, या वहां रहने वाले भारतीय हों। इसके लिए पूरे देश को एकजुट होना होगा। मुझे ये देखकर खुशी हो रही है कि पहली बार पूरा विपक्ष सरकार के साथ है और यही भारत की नीति होनी चाहिए। अन्यथा जिस तरह से दुनिया भर में इस्लामिक कट्टरवाद का विस्तार हो रहा है और जिस तरह से भारत के पड़ोस में इसने दस्तक दी है, ये देश के लिए खतरनाक हो सकता है। ये एकता आने वाले समय में भी बनी रहे, जो लोग आरक्षण, जाति, धार्मिक कट्टरता के नाम पर देश को बांटना चाहते हैं, ये ठीक नहीं है। राजनीति मुद्दों पर केंद्रित होनी चाहिए।”
भारत की सुरक्षा के लिए यह स्थिति एक बड़ी चुनौती है। भारत को अपने पड़ोसी देश में चल रहे इस राजनीतिक संकट का प्रभावी ढंग से सामना करना होगा। बाबा रामदेव और अन्य विशेषज्ञों की चेतावनी भारत सरकार को इस मुद्दे पर गंभीरता से विचार करने के लिए प्रेरित कर रही है।
बांग्लादेश में हो रहे इस घटनाक्रम पर भारत के नीतिगत और सुरक्षा से जुड़े निर्णय किस प्रकार होंगे, यह देखना बाकी है। वर्तमान स्थिति में भारत को संतुलित दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता है ताकि वह अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा कर सके और क्षेत्र में शांति और स्थिरता बनाए रख सके।