समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली,21 अप्रैल। जम्मू-कश्मीर: रविवार सुबह जम्मू-कश्मीर के रामबन जिले में जोरदार बारिश ने कुदरत का रौद्र रूप दिखाया। तेज़ बरसात के बाद अचानक बाढ़ आ गई, जिसने धरम कुंड गांव और आसपास के इलाकों में अचानक तबाही मचा दी। भारी जलधर से लोग न संभल सके और सिर्फ कुछ ही मिनटों में यहां का नजारा डरावना हो उठा।
धरम कुंड गांव बाढ़ के सबसे ज्यादा प्रभावित इलाक़ों में रहा। करीब 40 मकानों को नुकसान हुआ, जिनमें से लगभग 10 मकान पूरी तरह दब गए। मलबे में दबे वाहन, टूटी फर्श और दरवाज़े—यह दृश्य किसी भयानक हादसे का याद दिलाता था। एक ग्रामीण ने कहा, “पानी इतनी तेज़ी से आया कि हम घर छोड़कर भागने तक नहीं सोच सके।”
बताया जा रहा हैं की इस दर्दनाक घटना में दो मासूम बच्चों और एक बुज़ुर्ग की मौत हो गई। डिप्टी कमिश्नर बसीर उल-हक चौधरी ने पुष्टि की कि तीन लोगों ने आपदा में अपनी जान गंवाई, जबकि कई अन्य गुमशुदा बताए जा रहे हैं। मृतकों के परिवार आज भी सदमे में हैं और गांव में शोक की लहर है।
प्रशासन ने तुरंत रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया। एनडीआरएफ, स्थानीय पुलिस और बीआरओ (ब्रिज रोड्स ऑर्गनाइजेशन) के टीमों ने मिलकर 250 से ज़्यादा लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया। 100 से अधिक ग्रामीणों को निकाला गया और पास के राहत शिविरों में ठहराया गया। बसीर उल-हक चौधरी ने कहा, “हमारी प्राथमिकता ज़िंदगियाँ बचाना है। आगे भी बचाव दल सतर्क रहेगा।”
बारिश का अँधेरा सड़क तक पहुंचा। जम्मू-श्रीनगर नेशनल हाईवे के नशरी से बनिहाल तक के हिस्से में भूस्खलन और मिट्टी धंसने की घटनाएँ हुईं। इससे हाईवे पर यातायात ठप हो गया, यात्रियों को खड़ी गाड़ियों में घंटों इंतज़ार करना पड़ा। पुलों और कट पाथ पर बचाव दल रात-दिन काम करते रहे ताकि आपूर्ति सुचारू हो सके।
तबाही ने कई परिवारों की रोज़ी-रोटी भी छीन ली। घर ढहने से बचे लोगों के पास रहने की जगह और ज़रूरी सामग्री भी नहीं बची। एक परिवार के मुखिया ने बताया, “सारा सामान बह गया, कपड़े और बर्तन भी नहीं बचे। हमें बिसात विछाई जाने वाली ज़मीन पर रात बितानी पड़ रही है।” प्रशासन ने राहत सामग्री भेजी, लेकिन जरूरतें बहुत बड़ी हैं। वहीं मौसम विभाग ने अगले 48 घंटों में फिर से मध्यम से तेज़ बारिश का पूर्वानुमान जारी किया है। इससे बाढ़ और भूस्खलन का खतरा बना रहेगा। प्रशासन ने गांवों में सतर्कता बरतने और ऊंचे स्थानों पर रहने की सलाह दी है।
यह घटना याद दिलाती है कि नदियाँ और पहाड़ बारिश में कितने ख़तरनाक हो सकते हैं। रामबन के इस दर्दनाक अनुभव से सीख लेकर सरकार और स्थानीय प्रशासन को राहत एवं बचाव तंत्र को और मजबूत करना होगा। भविष्य में फटाफट सूचना, बेहतर बांध-नालों की व्यवस्था और सामुदायिक चेतना ज़रूरी है।