समग्र समाचार सेवा कोलकाता, 6 जून :कभी बंगाल बीजेपी का चेहरा रहे दिलीप घोष इन दिनों न केवल पार्टी आयोजनों से दूर दिख रहे हैं, बल्कि राजनीतिक हलकों में उनके भविष्य को लेकर भी चर्चाएं तेज हो गई हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के हालिया पश्चिम बंगाल दौरों के दौरान घोष की अनुपस्थिति ने इन अटकलों को और बल दे दिया है।
प्रधानमंत्री मोदी ने 29 मई को अलीपुरद्वार में एक बड़ी रैली की और अमित शाह ने 1 जून को कोलकाता के नेताजी इंडोर स्टेडियम में कार्यकर्ताओं की बैठक को संबोधित किया। लेकिन इन दोनों प्रमुख कार्यक्रमों में दिलीप घोष नजर नहीं आए। मीडिया के सवालों पर उन्होंने कहा, “मेरे पास पार्टी में अभी कोई पद नहीं है, इसलिए बुलाना जरूरी नहीं समझा गया।”
हालांकि पार्टी की ओर से कोई औपचारिक सफाई नहीं दी गई है, लेकिन बंगाल बीजेपी के एक वरिष्ठ नेता ने कहा, “सभी राज्य समिति सदस्यों को आमंत्रित किया गया था। हो सकता है पार्टी जानबूझकर घोष से दूरी बना रही हो, या वे खुद दूरी बना रहे हों।”
2015 में राज्य अध्यक्ष बनाए गए घोष ने 2016 विधानसभा चुनाव में बीजेपी को एक नई पहचान दी थी। फिर 2019 लोकसभा चुनाव में पार्टी ने बंगाल में 18 सीटें जीत लीं। लेकिन 2021 के विधानसभा चुनाव में पार्टी की हार के बाद उन्हें पद से हटा दिया गया और धीरे-धीरे वे हाशिये पर चले गए।
2024 के लोकसभा चुनाव में भी उन्हें उनकी पुरानी सीट मिदनापुर से टिकट नहीं दिया गया, बल्कि उन्हें बर्दवान-दुर्गापुर से चुनाव लड़वाया गया, जहां वे पूर्व क्रिकेटर और टीएमसी प्रत्याशी कीर्ति आजाद से हार गए।
इसके बाद अप्रैल में उन्होंने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की उपस्थिति में जगन्नाथ मंदिर के उद्घाटन में शिरकत की और मंदिर की तारीफ की। पार्टी ने इस कार्यक्रम का बहिष्कार किया था, जिससे घोष की आलोचना भी हुई।
ऐसे में यह स्पष्ट होता जा रहा है कि दिलीप घोष की बीजेपी में भूमिका सीमित होती जा रही है। क्या यह अंत की शुरुआत है, या वे पार्टी में नए सिरे से वापसी करेंगे — यह आने वाले वक्त में साफ होगा।