समग्र समाचार सेवा नई दिल्ली, 6 जून : एलन मस्क की सैटेलाइट इंटरनेट सेवा कंपनी स्टारलिंक को भारत सरकार में निवेश की अनुमति मिली है। दूरसंचार मंत्रालय ने शुक्रवार को स्टारलिंक को भारत में व्यावसायिक संचालन के लिए आवश्यक लाइसेंस जारी कर दिया है। 2022 से लंबित यह लाइसेंस सुरक्षा कारणों और नीति विवादों के चलते अटका हुआ था।
सूत्रों के अनुसार, स्टारलिंक अब भारत में हाई-स्पीड सैटेलाइट इंटरनेट सेवा शुरू करने के एक कदम और करीब पहुँच गई है। स्टारलिंक तीसरी कंपनी बन गई है जिसे भारत सरकार ने लाइसेंस प्रदान किया है। इससे पहले यूटेलसैट की वनवेब और रिलायंस जियो को यह अनुमति मिल चुकी है।
स्टारलिंक और दूरसंचार विभाग की ओर से इस खबर पर तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।
दिलचस्प बात यह है कि पिछले कुछ महीनों में एलन मस्क की कंपनी और मुकेश अंबानी की जियो के बीच भारत में स्पेक्ट्रम नीति को लेकर खुला टकराव देखा गया है।
जियो चाहती है कि सैटेलाइट सेवाओं के लिए स्पेक्ट्रम की नीलामी (auction) हो, वहीं मस्क की राय है कि इसे सीधे आवंटित (allocation) किया जाना चाहिए। केंद्र सरकार ने इस बहस में स्टारलिंक का समर्थन करते हुए स्पेक्ट्रम आवंटन के पक्ष में रुख अपनाया है।
इस बीच अमेजन की ‘कुइपर’ (Kuiper) परियोजना अब भी भारतीय लाइसेंस के इंतजार में है।
इस अनुमति के बाद भारत के दूरदराज और ग्रामीण क्षेत्रों में हाई-स्पीड इंटरनेट कनेक्टिविटी को लेकर नई उम्मीद जगी है। आने वाले महीनों में स्टारलिंक के पायलट प्रोजेक्ट और सर्विस लॉन्च को लेकर बड़ी घोषणाएं होने की संभावना है।