बॉम्बे हाईकोर्ट का फैसला: नाबालिग के साथ किसी भी यौन दुराचार को अपराध माना जाएगा
नाबालिग की सहमति होने पर भी अपराध साबित होने पर सजा दी जाएगी।
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बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा, “नाबालिग के साथ यौन अपराध में थोड़ा पेनिट्रेशन भी बलात्कार माना जाएगा।”
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आरोपी ने 5 और 6 साल की बच्चियों को अमरूद का लालच देकर बुलाकर गलत हरकत की थी।
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ट्रायल कोर्ट की 2019 की सजा हाईकोर्ट ने 2014 के कानून के अनुसार सही ठहराई।
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NCRB 2023 के आंकड़े: POCSO अधिनियम के तहत देशभर में लाखों मामले दर्ज, लड़कियों को सबसे ज्यादा प्रभावित पाया गया।
समग्र समाचार सेवा
मुम्बई, 21 अक्टूबर: बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर बेंच ने पॉक्सो एक्ट के तहत एक मामले में अहम फैसला सुनाते हुए कहा है कि नाबालिग के साथ यौन अपराध में थोड़ी भी पेनिट्रेशन को बलात्कार माना जाएगा। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि नाबालिग की सहमति का कोई महत्व नहीं होगा।
जस्टिस निवेदिता मेहता ने आरोपी की अपील खारिज करते हुए 10 साल की सजा और ₹50,000 जुर्माने की सजा बरकरार रखी। कोर्ट ने बच्चियों और उनकी मां के बयान, मेडिकल-फोरेंसिक सबूतों के आधार पर अपराध साबित पाया।
कोर्ट ने कहा कि 15 दिन बाद की मेडिकल जांच में चोट न होने के बावजूद, आरोपी की हरकत को ‘कोशिश’ मानना सही नहीं होगा क्योंकि बयान भरोसेमंद थे।
मामला वर्धा जिले के एक 38 वर्षीय ड्राइवर का है। आरोपी ने 5 और 6 साल की बच्चियों को अमरूद का लालच देकर बुलाया, अश्लील फिल्म दिखाई और उनसे गलत हरकत की। आरोपी को POCSO अधिनियम की धारा 6 और IPC की धारा 376 (2) (i) एवं धारा 511 के तहत दोषी पाया गया।
अभियुक्त ने पारिवारिक दुश्मनी का हवाला देकर खुद को फंसाया गया बताने की कोशिश की, लेकिन कोर्ट ने सबूतों के अभाव में इसे खारिज कर दिया। FIR दर्ज करने में देरी को भी कोर्ट ने उचित माना।
हाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि अपराध 19 फरवरी 2014 को हुआ था, इसलिए सजा उस समय लागू 2014 के कानून के अनुसार दी जाएगी। ट्रायल कोर्ट की 2019 में दी गई सजा को हाईकोर्ट ने सुधारते हुए सही ठहराया।
POCSO एक्ट क्या है?
इस केस को समझने के लिए जरूरी है कि हम POCSO एक्ट को जानें। POCSO का पूरा नाम है Protection of Children from Sexual Offences Act, 2012, यानी बच्चों को यौन अपराधों से बचाने का कानून। यह 14 नवंबर 2012 से पूरे भारत में लागू है। 18 साल से कम उम्र के सभी बच्चों को यह कानून कवर करता है। इसमें यौन उत्पीड़न, बलात्कार, शोषण, पोर्नोग्राफी और ऑनलाइन हैरेसमेंट जैसे अपराध शामिल हैं। केस स्पेशल कोर्ट में ‘इन कैमरा’ सुनवाई के तहत देखे जाते हैं ताकि बच्चे की सुरक्षा पूरी तरह बनी रहे।
NCRB रिपोर्ट 2023: POCSO आंकड़े
2022 में 38,444 पीड़ित (38,030 लड़कियां और 414 लड़के) दर्ज।
कर्नाटक में अक्टूबर 2023 तक 3,000+ मामले, औसतन 200+ नए केस/माह।
दिल्ली में जनवरी–दिसंबर 2023 तक 9,108 केस पेंडिंग, निपटाने में 27 साल लग सकते हैं।
राज्यवार सबसे अधिक POCSO मामले 2022 में:
उत्तर प्रदेश – 8,151
महाराष्ट्र – 7,572
मध्य प्रदेश – 5,996
राजस्थान – 3,371
तमिलनाडु – 4,968