- देश की महिलाओं से प्रधानमंत्री ने मांगी माफी
- महिला आरक्षण विधेयक का विरोध “संविधान और नारी शक्ति के खिलाफ अपराध” बताया
- भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस,अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस,द्रविड़ मुनेत्र कड़गम ,समाजवादी पार्टी पर तीखा हमला
- “नारी शक्ति वंदन संशोधन” को 21वीं सदी की महिलाओं के लिए नया अवसर बताया
- महिलाओं के प्रतिनिधित्व की राह में आने वाली बाधाएँ हटाने का आश्वासन
- लोकसभा में महिला आरक्षण विधेयक पास न होने पर प्रधानमंत्री की तीखी प्रतिक्रिया; विपक्षी दलों पर “नारी शक्ति के खिलाफ साज़िश” का आरोप
समग्र समाचार सेवा
दिल्ली,१9 अप्रैल: महिला आरक्षण विधेयक लोकसभा में पारित न हो पाने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्र को संबोधित करते हुए देश की महिलाओं से माफी मांगी। उन्होंने कहा कि सरकार ने “नारी शक्ति” को सशक्त बनाने के लिए एक ऐतिहासिक कदम उठाने की कोशिश की थी, लेकिन विपक्षी दलों के विरोध के कारण यह विधेयक पारित नहीं हो सका।
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि पूरे देश ने देखा है कि किस तरह भारतीय महिलाओं की उड़ान को रोका गया। उन्होंने बताया कि यह विधेयक 21वीं सदी की महिलाओं को नए अवसर देने और आगामी चुनावों में उनकी भागीदारी बढ़ाने के उद्देश्य से लाया गया था।
प्रधानमंत्री ने आरोप लगाया कि कुछ राजनीतिक दलों ने पार्टी राजनीति को देश और महिलाओं के सशक्तिकरण से ऊपर रखा, जिसके कारण यह स्थिति पैदा हुई। उनके अनुसार, महिला आरक्षण विधेयक का विरोध “नारी शक्ति का अपमान” है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि कांग्रेस और उसके सहयोगी दल वर्षों से “divide and rule” की राजनीति करते आए हैं और देश के महत्वपूर्ण सुधारात्मक निर्णयों में बाधा डालते रहे हैं। उन्होंने सीमा विवादों जैसे मुद्दों के लिए भी कांग्रेस को जिम्मेदार ठहराया।
अपने संबोधन के अंत में प्रधानमंत्री ने देश की महिलाओं को भरोसा दिलाया कि महिलाओं के प्रतिनिधित्व को मजबूत करने की दिशा में सरकार आगे भी प्रयास जारी रखेगी। उन्होंने कहा कि “एक महिला सब कुछ भूल सकती है, लेकिन अपना अपमान नहीं भूलती—यह अपमान देश की हर महिला के दिल में रहेगा।”