- विजय ने तमिलनाडु के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली
- 59 साल बाद गैर-द्रविड़ दल सत्ता में आया
- पहली स्पीच में भ्रष्टाचार और कानून व्यवस्था पर सख्त संदेश
- एम के स्टालिन ने आर्थिक हालात वाले बयान पर पलटवार किया
समग्र समाचार सेवा
चेन्नई तमिलनाडु 11 मई: 59 साल बाद बदला तमिलनाडु का राजनीतिक समीकरण
तमिलनाडु की राजनीति में रविवार को एक ऐतिहासिक मोड़ देखने को मिला, जब अभिनेता से नेता बने C Joseph Vijay ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। चेन्नई के नेहरू स्टेडियम में आयोजित समारोह सिर्फ एक संवैधानिक कार्यक्रम नहीं बल्कि राज्य में नई राजनीतिक संस्कृति की शुरुआत के रूप में देखा गया।
करीब 59 वर्षों बाद किसी गैर-द्रविड़ दल ने तमिलनाडु की सत्ता संभाली है। इसके साथ ही राज्य में गठबंधन राजनीति की वापसी भी हुई है। इससे पहले 1952 में राजाजी सरकार के दौरान ऐसा राजनीतिक समीकरण देखने को मिला था।
फिल्मी अंदाज में शपथ ने खींचा सबका ध्यान
विजय का शपथ ग्रहण समारोह पूरी तरह अलग अंदाज में नजर आया। पारंपरिक सफेद शर्ट और धोती की जगह उन्होंने ब्लेजर और सफेद शर्ट पहनकर मंच पर एंट्री की। उनके शपथ लेने का अंदाज भी किसी फिल्मी संवाद जैसा दिखाई दिया, जिस पर समर्थकों ने जोरदार तालियों और नारों के साथ प्रतिक्रिया दी।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विजय ने अपने पहले सार्वजनिक कार्यक्रम से ही यह संकेत देने की कोशिश की कि उनकी राजनीति पारंपरिक शैली से अलग होगी।
पहली स्पीच में दिए सख्त संदेश
मुख्यमंत्री बनने के बाद विजय ने अपने पहले संबोधन में कई बड़े राजनीतिक संदेश दिए। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार भारी कर्ज और आर्थिक दबाव के बीच काम शुरू कर रही है। विजय ने महिलाओं की सुरक्षा, शिक्षा, स्वास्थ्य और जल आपूर्ति को अपनी सरकार की प्राथमिकता बताया।
उन्होंने साफ कहा कि भ्रष्टाचार या सत्ता के दुरुपयोग को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। विजय का यह बयान भी चर्चा में रहा कि “सरकार में सिर्फ एक ही पावर सेंटर होगा।”
स्टालिन का पलटवार और बढ़ी सियासी गर्मी
पूर्व मुख्यमंत्री M K Stalin ने विजय के “खाली खजाने” वाले बयान पर तुरंत प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि राज्य की आर्थिक स्थिति पहले ही बजट सत्र में स्पष्ट की जा चुकी है और सरकार चलाने के लिए अनुभव और इच्छाशक्ति की जरूरत होती है।
शपथ समारोह के कुछ घंटों बाद विवाद भी शुरू हो गया, जब तमिल थाई वंदनम को वंदे मातरम् और राष्ट्रगान के बाद बजाया गया। विपक्षी दलों ने इस पर आपत्ति जताई, जिसके बाद सत्तारूढ़ दल ने भविष्य में तमिल गान को प्राथमिकता देने का आश्वासन दिया।