- बस्तर संभाग के 506 भवनविहीन आंगनबाड़ी केन्द्रों के लिए पक्के भवन निर्माण को प्राथमिकता दी गई, मार्च 2027 तक काम पूरा करने का लक्ष्य रखा गया।
- नए आंगनबाड़ी भवनों में BaLA (Building as Learning Aid) कॉन्सेप्ट अपनाया जाएगा, जिससे बच्चों के सीखने, खेलने और मानसिक विकास के लिए बेहतर वातावरण तैयार होगा।
- प्रत्येक भवन के निर्माण पर 11.69 लाख रुपये खर्च होंगे, जिसमें महिला एवं बाल विकास विभाग, मनरेगा और स्थानीय संसाधनों से राशि जुटाई जाएगी।
- मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि यह पहल बच्चों और माताओं को बेहतर सुविधाएं देने के साथ नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में विकास, विश्वास और सुशासन को नई मजबूती देगी।
समग्र समाचार सेवा
रायपुर, 26 मई: मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में प्रदेश सरकार बस्तर संभाग के नक्सल प्रभावित एवं अब तेजी से विकास की मुख्यधारा से जुड़ रहे जिलों में बच्चों और माताओं के लिए आधारभूत सुविधाओं को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठा रही है। राज्य सरकार ने भवनविहीन आंगनबाड़ी केन्द्रों के निर्माण को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए बस्तर संभाग के जिलों में संचालित शेष 506 भवनविहीन आंगनबाड़ी केन्द्रों के लिए भवन स्वीकृति की प्रक्रिया तेज करने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा है कि सरकार का लक्ष्य है कि नक्सल मुक्त घोषित जिलों में कोई भी आंगनबाड़ी भवनविहीन न रहे और प्रत्येक बच्चे तथा माता को बेहतर, सुरक्षित एवं सुविधायुक्त वातावरण उपलब्ध हो।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि आंगनबाड़ी केन्द्र केवल पोषण वितरण का माध्यम नहीं, बल्कि बच्चों के समग्र विकास, मातृ स्वास्थ्य, प्रारंभिक शिक्षा और सामाजिक सशक्तिकरण की मजबूत नींव हैं। उन्होंने कहा कि विशेषकर दूरस्थ एवं आदिवासी क्षेत्रों में गुणवत्तापूर्ण आंगनबाड़ी व्यवस्था बच्चों के पोषण, स्वास्थ्य जांच, टीकाकरण, पूर्व-प्राथमिक शिक्षा तथा गर्भवती एवं धात्री माताओं की देखभाल को नई मजबूती प्रदान करेगी। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्माण कार्यों में गुणवत्ता, समयबद्धता और स्थानीय आवश्यकताओं का विशेष ध्यान रखने के निर्देश दिए हैं।
महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा बस्तर, बीजापुर, दंतेवाड़ा, कांकेर, नारायणपुर और सुकमा जिलों में भवनविहीन आंगनबाड़ी केन्द्रों की पहचान कर प्राथमिकता के आधार पर भवन निर्माण सुनिश्चित करने के निर्देश जारी किए गए हैं। मुख्य सचिव स्तर पर 16 मई 2026 को आयोजित समीक्षा बैठक में दिए गए निर्देशों के अनुरूप बस्तर संभाग की प्रत्येक ग्राम पंचायत में आंगनबाड़ी भवन निर्माण को शासन की प्राथमिकता बताया गया है। इस संबंध में संबंधित जिलों के कलेक्टरों को संयुक्त निर्देश जारी किए गए हैं।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल भवन निर्माण कराना नहीं, बल्कि ऐसे आंगनबाड़ी केन्द्र विकसित करना है जो बच्चों के सीखने, खेलने और मानसिक विकास के लिए प्रेरक वातावरण तैयार करें। इसी उद्देश्य से भवन निर्माण में “BaLA (Building as Learning Aid)” कॉन्सेप्ट को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि भवन स्वयं बच्चों के लिए सीखने और समझने का माध्यम बन सके तथा आंगनबाड़ी केन्द्र आकर्षक और पूर्व-प्राथमिक शिक्षा के अनुकूल वातावरण विकसित कर सकें।
आंगनबाड़ी भवन निर्माण हेतु प्रति भवन 11 लाख 69 हजार रुपये की राशि निर्धारित की गई है। इसमें महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा 2 लाख रुपये, महात्मा गांधी नरेगा योजना के अंतर्गत 8 लाख रुपये तथा शेष 1.69 लाख रुपये की राशि जिले में उपलब्ध अन्य स्थानीय संसाधनों जैसे डीएमएफ, सीएसआर अथवा अन्य मदों से उपलब्ध कराई जाएगी। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि विभिन्न योजनाओं और स्थानीय संसाधनों के प्रभावी अभिसरण के माध्यम से विकास कार्यों को गति देना राज्य सरकार की कार्यशैली का महत्वपूर्ण हिस्सा है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने अधिकारियों को निर्देशित किया है कि मांग आधारित प्रक्रिया के अंतर्गत भवनविहीन आंगनबाड़ी केन्द्रों को प्राथमिकता के साथ स्वीकृति प्रदान की जाए और मार्च 2027 तक निर्माण कार्य पूर्ण कराना सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि विकास योजनाओं के क्रियान्वयन में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी और नियमित मॉनिटरिंग के माध्यम से कार्यों की प्रगति की समीक्षा की जाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर संभाग में शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण और बुनियादी सुविधाओं को सुदृढ़ करना राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। प्रदेश सरकार सड़क, स्वास्थ्य, बिजली, पेयजल और जनसुविधाओं के विस्तार के साथ अब बच्चों और महिलाओं के भविष्य को सुरक्षित करने वाले सामाजिक ढांचे को भी मजबूत कर रही है। उन्होंने कहा कि मजबूत आंगनबाड़ी अवसंरचना गांवों में सकारात्मक सामाजिक परिवर्तन का आधार बनेगी। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छोटे बच्चों का प्रारंभिक विकास ही भविष्य के सशक्त समाज की नींव तैयार करता है। आंगनबाड़ी केन्द्रों के माध्यम से बच्चों को पोषण, स्वास्थ्य और प्रारंभिक शिक्षा का जो आधार मिलता है, वही आगे चलकर उनके व्यक्तित्व निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। बेहतर भवन, सुरक्षित वातावरण और गुणवत्तापूर्ण सुविधाएं बच्चों में आत्मविश्वास और सीखने की क्षमता को नई दिशा देंगी। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने विश्वास व्यक्त किया कि विभागों के समन्वित प्रयास, जिला प्रशासन की सक्रियता तथा स्थानीय संसाधनों के प्रभावी उपयोग से बस्तर संभाग के सभी भवनविहीन आंगनबाड़ी केन्द्रों को शीघ्र पक्के भवन उपलब्ध होंगे। उन्होंने कहा कि यह पहल मातृ एवं शिशु कल्याण को नई मजबूती देने के साथ-साथ नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में विकास, विश्वास और सुशासन के नए अध्याय को भी मजबूत करेगी।
नक्सल मुक्त जिलों के भवनविहीन आंगनबाड़ी केन्द्रों को मिलेंगे पक्के भवन
नक्सल मुक्त जिलों में आंगनबाड़ी भवन निर्माण को मिलेगी गति, 506 भवनविहीन केंद्रों को मिलेंगे पक्के भवन, बच्चों और माताओं को बेहतर सुविधाएं, BaLA कॉन्सेप्ट से होंगे आकर्षक भवन, 11.69 लाख रुपये प्रति भवन खर्च, विकास और सुशासन को मिलेगा बल
रायपुर। विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार ने बस्तर संभाग के नक्सल प्रभावित जिलों में संचालित 506 भवनविहीन आंगनबाड़ी केंद्रों के लिए पक्के भवन निर्माण की प्रक्रिया तेज कर दी है। सरकार का लक्ष्य है कि नक्सल मुक्त घोषित क्षेत्रों में कोई भी आंगनबाड़ी केंद्र भवनविहीन न रहे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आंगनबाड़ी केंद्र केवल पोषण वितरण का माध्यम नहीं, बल्कि बच्चों के समग्र विकास, मातृ स्वास्थ्य, टीकाकरण और पूर्व-प्राथमिक शिक्षा की मजबूत नींव हैं। दूरस्थ आदिवासी क्षेत्रों में गुणवत्तापूर्ण आंगनबाड़ी व्यवस्था से बच्चों और गर्भवती महिलाओं को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी।
महिला एवं बाल विकास विभाग ने बस्तर, बीजापुर, दंतेवाड़ा, कांकेर, नारायणपुर और सुकमा जिलों में भवन निर्माण को प्राथमिकता देने के निर्देश जारी किए हैं। नए भवनों में “BaLA (Building as Learning Aid)” कॉन्सेप्ट अपनाया जाएगा, जिससे भवन बच्चों के सीखने और खेलने के अनुकूल बन सकें।
प्रत्येक आंगनबाड़ी भवन के निर्माण पर 11.69 लाख रुपये खर्च किए जाएंगे। इसमें 2 लाख रुपये महिला एवं बाल विकास विभाग, 8 लाख रुपये मनरेगा और शेष राशि डीएमएफ, सीएसआर तथा अन्य स्थानीय संसाधनों से जुटाई जाएगी। सरकार ने मार्च 2027 तक निर्माण कार्य पूर्ण करने के निर्देश दिए हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि मजबूत आंगनबाड़ी व्यवस्था बच्चों के बेहतर भविष्य और सामाजिक परिवर्तन की आधारशिला बनेगी। यह पहल नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में विकास, विश्वास और सुशासन को नई मजबूती देगी।