पूनम शर्मा
मुसलमान धार्मिक नेताओं की गिरफ्तारी
हाल के समय में रूस की सुरक्षा एजेंसियों ने कारेलिया के पूर्व मुफ्ती विसाम बार्दोव सहित कई प्रभावशाली मुस्लिम धार्मिक नेताओं और उलेमाओं को गिरफ्तार किया है। रूस के विभिन्न समाचार माध्यमों में इन गिरफ्तारियों की खबरें और तस्वीरें प्रकाशित हुई हैं। रूस में लगातार बढ़ रहे इस्लामी कट्टरवाद को रोकने के लिए राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन के निर्देश पर यह कार्रवाई शुरू की गई है। रूस की जनता ने इसे देश की आंतरिक सुरक्षा, सामाजिक स्थिरता और कानून के शासन को मजबूत करने की दिशा में एक दृढ़ और सराहनीय कदम के रूप में स्वागत किया है। राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन के नेतृत्व में रूस कई प्रकार की चुनौतियों का सामना कर रहा है, जिनमें धार्मिक उग्रवाद, विदेशी प्रभाव और आंतरिक विभाजन प्रमुख हैं। इन गिरफ्तारियों को इन चुनौतियों से निपटने के लिए रूस की सतर्कता और जिम्मेदारी का परिचायक बताया जा रहा है।
धार्मिक सभा नियन्त्रण के प्रयास
रूस में वर्ष 2024 में आवासीय भवनों में सामूहिक नमाज पर प्रतिबंध लगाने वाला कानून लागू किया गया था। रूस जैसे विशाल देश में पर्याप्त मस्जिदें न होने के बावजूद सरकार का कहना है कि यदि आवासीय क्षेत्रों में धार्मिक सभाओं को नियंत्रित नहीं किया गया तो इससे स्थानीय लोगों में असंतोष और सामाजिक तनाव पैदा हो सकता है। शीर्ष मुस्लिम नेता मुफ्ती राविल गैनुतदीन सहित कई लोगों ने इस कानून का विरोध किया, लेकिन क्रेमलिन अपने रुख पर कायम रहा। इससे यह संदेश दिया गया कि रूस किसी विशेष धार्मिक समूह के दबाव के आगे नहीं झुकेगा। देश की नीतियों और नागरिकों की शांति बनाए रखने में इस कानून को महत्वपूर्ण माना गया है।
प्रतिबंधित संगठनों से सम्बन्ध के आरोप
दूसरे, गिरफ्तार किए गए नेताओं पर “मुस्लिम ब्रदरहुड” जैसे प्रतिबंधित उग्रवादी संगठनों से संबंध रखने के आरोप लगाए गए हैं। रूस इस संगठन को आतंकवादी संगठन मानता है। यूक्रेन युद्ध की वर्तमान परिस्थितियों में आंतरिक स्थिरता बनाए रखना रूस के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसी कारण कट्टरपंथी विचारधाराओं के प्रसार को रोकने के लिए कठोर कदम उठाए जा रहे हैं।
तीसरे, यूक्रेन संघर्ष के बाद रूस ने अपनी ऐतिहासिक स्लाविक-ऑर्थोडॉक्स पहचान पर अधिक जोर देना शुरू किया है। इसे राष्ट्रीय एकता के लिए आवश्यक माना जा रहा है। साथ ही मुस्लिम संगठनों को राज्य के प्रति पूर्ण निष्ठा प्रदर्शित करने के निर्देश दिए गए हैं। यह स्पष्ट किया गया है कि कोई भी इस्लामी संगठन राज्य विरोधी गतिविधियों या बयानों में शामिल नहीं हो सकता। ऐसा करने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी। जो लोग इस निष्ठा का पालन नहीं करेंगे, उनके विरुद्ध कार्रवाई को राज्य का स्वाभाविक अधिकार बताया गया है।
इसके अलावा, कानून का उल्लंघन करने, पुलिस के कार्य में बाधा पहुंचाने या आपराधिक गतिविधियों में शामिल पाए जाने वाले मुस्लिम व्यक्तियों के खिलाफ भी कड़ी कार्रवाई की जाएगी। स्पष्ट किया गया है कि कोई भी धार्मिक नेता कानून से ऊपर नहीं है। रूसी कानून का पालन न करने पर गिरफ्तारी निश्चित है।
पुतिन का नेतृत्व और राष्ट्रीय हितों की रक्षा
रूस की यह गिरफ्तारी मुहिम देश की संप्रभुता, सुरक्षा और सामाजिक सद्भाव बनाए रखने के लिए एक दूरदर्शी कदम बताई जा रही है। राष्ट्रपति पुतिन के नेतृत्व में रूस ने यह दिखाने का प्रयास किया है कि धार्मिक स्वतंत्रता और राष्ट्रीय हितों के बीच संतुलन बनाए रखा जा सकता है। समर्थकों का मानना है कि यह कदम उग्रवाद की रोकथाम के क्षेत्र में दुनिया के लिए एक उदाहरण बन सकता है। भविष्य में भी ऐसे कदम रूस को और अधिक मजबूत तथा स्थिर बना सकते हैं और बहु-जातीय समाज में स्वस्थ संबंध बनाए रखने में सहायक हो सकते हैं।
इस्लामी जिहाद का बढ़ता प्रभाव
इंग्लैंड और यूरोप में इस्लामी जिहाद के बढ़ते प्रभाव की चर्चा के संदर्भ में रूस की इस कार्रवाई को कई लोग एक चेतावनी संदेश के रूप में देख रहे हैं, विशेषकर भारत के लिए। उनका कहना है कि इंग्लैंड और यूरोप की परिस्थितियों को देखते हुए राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन ने “पॉलिटिकल इस्लाम” को पहचानकर उसके विरुद्ध कार्रवाई शुरू कर दी है। समर्थकों का दावा है कि पुतिन यह स्पष्ट संदेश दे रहे हैं कि रूस की धरती पर “पॉलिटिकल इस्लाम” के लिए कोई स्थान नहीं है। चीन के बाद रूस भी इस मुद्दे पर कठोर रुख अपनाता दिखाई दे रहा है। वहीं आलोचकों का मत है कि भारत की राजनीतिक पार्टियां आज भी “पॉलिटिकल इस्लाम” जैसे मुद्दों पर खुलकर चर्चा करने से बचती हैं। उनके अनुसार, यह राजनीतिक कमजोरी भविष्य में भारत के लिए चुनौती बन सकती है। रूस से सीख लेने की बात भी कही जाती है l