राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ: दिल्ली प्रान्त के 15 दिवसीय संघ शिक्षा वर्ग का हुआ समापन
हरिश्चंद्र जी ने व्यक्ति निर्माण को राष्ट्र निर्माण का आधार बताया, शिक्षार्थियों से पंच परिवर्तन अपनाने का आह्वान
समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के दिल्ली प्रान्त में 15 दिनों से संचालित संघ शिक्षा वर्ग (सामान्य) – महाविद्यालयीन विद्यार्थी एवं तरुण व्यवसायी वर्ग का समापन समारोह रविवार को वसंत विहार स्थित ललित महाजन विद्यालय में संपन्न हुआ। इस वर्ग में कुल 159 शिक्षार्थियों ने भाग लेकर शारीरिक, बौद्धिक और व्यक्तित्व निर्माण संबंधी प्रशिक्षण प्राप्त किया।
समापन कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के उत्तर क्षेत्र बौद्धिक शिक्षण प्रमुख श्री हरिश्चंद्र जी मुख्य वक्ता तथा IndCEPI की मुख्य परियोजना निदेशक डॉ. शैलजा गुप्ता मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहीं। कार्यक्रम में दिल्ली प्रान्त संघचालक डॉ. अनिल अग्रवाल और वर्ग के सर्वाधिकारी डॉ. शशांक की भी विशेष उपस्थिति रही।
अपने संबोधन में श्री हरिश्चंद्र जी ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संस्थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार के जीवन, विचार और राष्ट्र निर्माण की दृष्टि पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि डॉ. हेडगेवार का मानना था कि सशक्त चरित्र, उच्च नैतिक मूल्यों और राष्ट्रनिष्ठ व्यक्तियों का निर्माण ही एक सशक्त एवं समृद्ध राष्ट्र की नींव है।
उन्होंने कहा कि पूर्ण एकाग्रता, दृढ़ संकल्प और समर्पण भाव से किए गए प्रयासों को सफलता अवश्य प्राप्त होती है। संघ शताब्दी वर्ष की चर्चा करते हुए उन्होंने बताया कि वर्तमान में देशभर में संघ की 83 हजार से अधिक शाखाएं तथा 1 लाख 77 हजार से अधिक सेवा परियोजनाएं संचालित हैं। उन्होंने बताया कि संघ के विभिन्न प्रशिक्षण वर्गों में 21 हजार से अधिक शिक्षार्थी प्रशिक्षण प्राप्त कर चुके हैं।
श्री हरिश्चंद्र जी ने कहा कि संघ ने सदैव “भारत माता की जय” को अपने उद्घोष का आधार बनाया है और कभी संगठन के नाम का जयघोष नहीं किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि संघ अपने कार्यों का श्रेय स्वयं नहीं लेता, बल्कि इसे समाज की सज्जन एवं राष्ट्रनिष्ठ शक्तियों के सहयोग का परिणाम मानता है।

उन्होंने शिक्षार्थियों और समाज से जीवन में पंच परिवर्तन — सामाजिक समरसता, परिवार प्रबोधन, पर्यावरण अनुकूल जीवनशैली, नागरिक कर्तव्य पालन और स्वदेशी — को अपनाने का आह्वान किया।
मुख्य अतिथि डॉ. शैलजा गुप्ता ने कहा कि संघ शिक्षा वर्ग में उपस्थित होकर उन्हें प्रेरणा मिली। उन्होंने संघ के अनुशासन, समयपालन, समर्पण, संगठनबद्धता और एकात्मता की सराहना करते हुए कहा कि किसी भी संगठन की वास्तविक शक्ति उसके कार्यकर्ताओं के चरित्र, अनुशासन और राष्ट्रहित के प्रति समर्पण में निहित होती है।
उन्होंने संघ के घोष की भी प्रशंसा करते हुए कहा कि यह केवल संगीत का माध्यम नहीं बल्कि संगठनात्मक अनुशासन, सांस्कृतिक चेतना और राष्ट्रीय गौरव का प्रतीक है। घोष के माध्यम से स्वयंसेवकों में सामूहिकता, कर्तव्यनिष्ठा और राष्ट्रभक्ति की भावना विकसित होती है।

वर्ग के दौरान शिक्षार्थियों को प्रतिदिन शारीरिक प्रशिक्षण के साथ बौद्धिक एवं वैचारिक मार्गदर्शन दिया गया। उन्हें सामूहिक जीवन, अनुशासन, सेवा भाव, संवेदनशीलता तथा समाज के प्रति उत्तरदायित्व की भावना विकसित करने का प्रशिक्षण भी प्रदान किया गया।
संघ के अनुसार, संघ शिक्षा वर्ग केवल प्रशिक्षण का माध्यम नहीं बल्कि व्यक्तित्व निर्माण, समाज जागरण और राष्ट्र निर्माण की एक सतत प्रक्रिया है। शिक्षार्थियों से अपेक्षा की गई कि वे वर्ग से प्राप्त संस्कारों और प्रेरणाओं को समाज तक पहुंचाते हुए अधिक से अधिक लोगों को राष्ट्रहित के कार्यों से जोड़ने का प्रयास करें।
उल्लेखनीय है कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना वर्ष 1925 में डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार ने भारत को परम वैभव तक पहुंचाने के ध्येय से की थी। संघ शिक्षा वर्गों की शुरुआत वर्ष 1927 में हुई थी। वर्तमान स्वरूप के अनुसार सामान्य संघ शिक्षा वर्ग 15 दिनों का होता है, जिसमें 18 से 40 वर्ष आयु वर्ग के स्वयंसेवकों को प्रशिक्षण दिया जाता है।