- 18 वर्षीय ड्रॉपआउट ने AI और टेलीग्राम की मदद से फर्जी बैंकिंग/सरकारी ऐप बनाए
- आरोपी ने साइबर अपराधियों को 15,000 रुपये प्रति माह की सब्सक्रिप्शन पर खतरनाक APK फाइलें बेचीं
- फर्जी ऐप्स की मदद से भारतभर के लोगों से 64 करोड़ रुपये से ज्यादा ठगे गए
- सूरत पुलिस ने आरोपी के पास से दो मोबाइल फोन और एक लैपटॉप बरामद कर डिजिटल फॉरेंसिक जांच शुरू की
समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली 22 जुलाई : सूरत सिटी साइबर क्राइम सेल ने एक ऐसे देशव्यापी साइबर फ्रॉड नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है, जिसका मास्टरमाइंड केवल 18 साल का एक 11वीं कक्षा का ड्रॉपआउट है। आरोपी रोहित वीरेंद्रसिंह शाक्य को उत्तर प्रदेश के कानपुर के एक होटल से गिरफ्तार किया गया। पुलिस के अनुसार, शाक्य 16 साल की उम्र में ही एक्सपर्ट कोडर बन गया था और उसने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस टूल्स व टेलीग्राम चैनलों की मदद से ऐसे फेक मोबाइल ऐप्स बनाए, जो असली बैंकिंग, सरकारी और प्राइवेट सेक्टर के ऐप्स जैसे ही दिखते थे।
शाक्य के बनाए ये मैलिशियस APK फाइलें झारखंड के जामताड़ा, हरियाणा और राजस्थान के अपराधी गिरोहों को सप्लाई की जाती थीं। आरोपी लगातार अपना लोकेशन बदलता था ताकि गिरफ्तारी से बच सके। पुलिस ने तीन दिन तक ट्रैकिंग के बाद उसे गिरफ्तार किया। यह भी सामने आया है कि वह बेंगलुरु से MBA कर चुका है।
पुलिस जांच में पता चला है कि आरोपी ने सैकड़ों पीड़ितों से करोड़ों रुपये ठगने के लिए AI और सोशल मीडिया का इस्तेमाल किया। पुलिस ने कहा कि ऐसे फर्जी ऐप्स का कारोबार सब्सक्रिप्शन मॉडल पर चलता था। फिलहाल आरोपी से पूछताछ जारी है और उसके नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की तलाश हो रही है।