- नए FCRA नियमों में विदेशी फंड पाने वाली संस्थाओं के लिए कड़े अनुपालन प्रावधान
- नियम 14A के तहत दो साल में कम से कम 10 लाख रुपये खर्च न करने पर पंजीकरण रद्द/नवीनीकरण न होने का खतरा
- सभी वेबसाइट, सोशल मीडिया, प्रकाशन आदि का खुलासा अनिवार्य, फंड के उपयोग में बदलाव के लिए सरकार की मंजूरी जरूरी
- “धर्मांतरण” पर रोक, परिभाषा अस्पष्ट; छोटे एनजीओ पर अनुपातहीन प्रशासनिक बोझ की चिंता
समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली : 22 जुलाई : केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचित नए विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन नियम, 2026 (FCRA) नियम लागू । इन नियमों के लागू होते ही चैरिटी, स्कूल, चर्च और एनजीओ में पारदर्शिता और अनुपालन को लेकर सवाल उठने लगे हैं। संसद में इन संशोधनों पर अभी चर्चा नहीं हुई है, लेकिन गृह मंत्रालय ने 22 जून 2026 को इन्हें अधिसूचित कर दिया था, जिससे हजारों संस्थाओं ने नए नियमों का पालन शुरू कर दिया।
नई व्यवस्था के तहत विदेशी फंड का इस्तेमाल “प्रोसेलिटाइजेशन” (धर्मांतरण) के लिए नहीं किया जा सकेगा। सरकार का कहना है कि ये नियम पारदर्शिता, जवाबदेही और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए जरूरी हैं। गृह मंत्री अमित शाह ने कैथोलिक बिशप्स कॉन्फ्रेंस ऑफ इंडिया को भरोसा दिलाया कि ये नियम धर्म-निरपेक्ष हैं और किसी समुदाय को लक्षित नहीं करते।
ईसाई संस्थाएं और छोटे एनजीओ इन नियमों से सबसे ज्यादा प्रभावित माने जा रहे हैं। कई चर्च, स्कूल, हॉस्पिटल, अनाथालय आदि विदेशी सहायता पर निर्भर हैं। आलोचकों का तर्क है कि छोटे संगठनों के लिए इतने कड़े नियम पालन करना संभव नहीं है, जबकि बड़े संस्थानों के पास कानूनी संसाधन उपलब्ध हैं।
। संसद में बहस के दौरान पारदर्शिता और सुरक्षा के संतुलन के साथ-साथ कानूनी स्पष्टता व अपीलीय व्यवस्था की भी मांग उठ सकती है।