रतलाम में शिक्षा की नई तस्वीर: IAS अधिकारी वैशाली जैन ने 42 हजार बच्चों के लिए बदली सरकारी स्कूलों की व्यवस्था

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  •  रतलाम के 1,011 सरकारी प्राथमिक स्कूलों में 21 हजार से अधिक बेंच-डेस्क लगाने का अभियान चलाया जा रहा है।
  • इस पहल से 42 हजार से अधिक विद्यार्थियों को लाभ मिलने की उम्मीद है।
  •  कक्षा 9 और 10 के विद्यार्थियों के लिए E-Gyan Setu के जरिए डिजिटल शिक्षण सामग्री उपलब्ध कराई जा रही है।
  • ग्रामीण विद्यार्थियों के लिए सरकारी भवनों को पुस्तकालय और अध्ययन केंद्रों में बदलने की योजना बनाई गई है।

समग्र समाचार सेवा

रतलाम, मध्य प्रदेश 9 अगस्त: मध्य प्रदेश के रतलाम जिले में सरकारी स्कूलों की तस्वीर बदलने की दिशा में एक व्यापक शिक्षा अभियान शुरू किया गया है। जिला पंचायत की मुख्य कार्यपालन अधिकारी और अतिरिक्त कलेक्टर IAS अधिकारी वैशाली जैन के नेतृत्व में चल रही इस पहल का उद्देश्य केवल स्कूलों में बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के लिए बेहतर और आधुनिक सीखने का माहौल तैयार करना है।

रतलाम में पदभार संभालने के बाद जैन के सामने सबसे पहले सरकारी प्राथमिक स्कूलों में फर्नीचर की कमी की समस्या सामने आई। कई बच्चे पर्याप्त डेस्क-बेंच नहीं होने के कारण जमीन पर बैठकर पढ़ने को मजबूर थे। जिला स्तर पर किए गए सर्वे के बाद ज्ञानोदय-शाला उन्नयन अभियान’ शुरू किया गया।

इस अभियान के तहत जिले के 1,011 सरकारी प्राथमिक स्कूलों में 21 हजार से अधिक बेंच-डेस्क लगाने का लक्ष्य रखा गया है। इससे 42 हजार से ज्यादा विद्यार्थियों को लाभ मिलेगा। प्रशासन ने केवल सरकारी बजट पर निर्भर रहने के बजाय कॉरपोरेट सामाजिक जिम्मेदारी (CSR), विधायक निधि और ग्रामीणों की भागीदारी को भी अभियान से जोड़ा है।

इसके लिए स्कूलों को गोद लेने की खुली व्यवस्था बनाई गई है। पारदर्शिता बनाए रखने के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (SOP), गूगल फॉर्म, अधिकृत विक्रेताओं की सूची और हेल्पलाइन जैसी व्यवस्थाएं लागू की गई हैं। इच्छुक दानदाता अपनी पसंद का स्कूल चुनकर वहां आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने में सहयोग कर सकते हैं। अब तक करीब 200 स्कूलों में बेंच लगाई जा चुकी हैं, जबकि लगभग 100 स्कूलों में मरम्मत का काम भी किया गया है।

जैन के अनुसार, बच्चों के लिए सम्मानजनक माहौल उनकी शिक्षा का पहला कदम है। स्कूल में बैठने की उचित व्यवस्था केवल सुविधा नहीं, बल्कि बच्चे को यह एहसास भी कराती है कि उसकी शिक्षा और उसका भविष्य महत्वपूर्ण है।

डिजिटल शिक्षा पर जोर

स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं के बाद प्रशासन ने शिक्षण की गुणवत्ता पर ध्यान केंद्रित किया। जिले के माध्यमिक विद्यालयों में स्मार्ट बोर्ड तो उपलब्ध थे, लेकिन उनके लिए पर्याप्त डिजिटल सामग्री नहीं थी। इस कमी को दूर करने के लिए

E-Gyan Setu कार्यक्रम शुरू किया गया।

इस पहल के तहत 16 विषय विशेषज्ञ कक्षा 9 और 10 के विद्यार्थियों के लिए वीडियो लेक्चर, चैप्टर आधारित सामग्री, ब्रिज कोर्स, रिवीजन मॉड्यूल, वर्कशीट और AI आधारित शिक्षण सामग्री तैयार कर रहे हैं। यह सामग्री पाठ्यक्रम के अनुरूप तैयार की जा रही है और मौजूदा स्मार्ट क्लासरूम के जरिए विद्यार्थियों तक पहुंचाई जा रही है।

फिलहाल यह कार्यक्रम 100 सरकारी स्कूलों में चल रहा है। हर दो सप्ताह में विद्यार्थियों का आकलन किया जाता है, जिससे पढ़ाई में कमजोर क्षेत्रों की पहचान कर समय रहते सुधारात्मक सहायता दी जा सके। भविष्य में इसके लिए एक विशेष रिकॉर्डिंग स्टूडियो बनाने और मालवी तथा भीली जैसी स्थानीय भाषाओं में भी सामग्री तैयार करने की योजना है।

 स्कूल के बाहर भी पढ़ाई का माहौल

प्रशासन का ध्यान केवल स्कूलों तक सीमित नहीं है। ग्रामीण क्षेत्रों के ऐसे विद्यार्थी जो प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करना चाहते हैं, उनके लिए शांत और सुविधाजनक अध्ययन स्थल उपलब्ध कराने की योजना भी शुरू की गई है।

इसके तहत जिले की छह जनपद पंचायतों में खाली पड़े सरकारी भवनों को ग्रामीण पुस्तकालय एवं अध्ययन केंद्रों में बदला जा रहा है। इन पुस्तकालयों में बैठने की सुविधा, कंप्यूटर और इंटरनेट उपलब्ध कराने की योजना है। इन केंद्रों का संचालन स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाएं करेंगी। पुस्तकालयों के साथ ‘दीदी कैफे’ भी संचालित किए जाएंगे, जिससे शिक्षा के साथ स्थानीय महिलाओं के लिए रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे।

रतलाम से पहले रीवा में भी वैशाली जैन ने प्रशासनिक स्तर पर कई उल्लेखनीय काम किए थे। वहां उन्होंने 9 हजार से अधिक राजस्व न्यायालय मामलों के निपटारे में भूमिका निभाई। इसके अलावा भूमि मुआवजे से जुड़े करीब 200 निष्क्रिय बैंक खातों का पता लगाकर किसानों के लिए लगभग 100 करोड़ रुपये की राशि वापस दिलाने में मदद की गई।

हालांकि, जैन का मानना है कि शिक्षा में किए गए बदलावों का वास्तविक परिणाम तुरंत दिखाई नहीं देता। उनके अनुसार शिक्षा के क्षेत्र में लगातार प्रयास की जरूरत होती है और परिणाम सामने आने में एक-दो साल या उससे भी अधिक समय लग सकता है।

रतलाम में प्रशासन अब आदिवासी बहुल इलाकों में अभिभावकों से संपर्क, विद्यार्थियों की उपस्थिति की निगरानी, स्कूलों की रंगाई-पुताई, फर्नीचर की व्यवस्था और डिजिटल शिक्षा जैसे कई स्तरों पर काम कर रहा है। उद्देश्य साफ है—सरकारी स्कूलों को ऐसा स्थान बनाना जहां बच्चे केवल पढ़ने के लिए नहीं, बल्कि बेहतर भविष्य की उम्मीद के साथ जाना चाहें।

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