- कनाडा के दो NDP सांसदों ने RSS प्रमुख मोहन भागवत को देश में प्रवेश से रोकने की मांग की है।
- इसके जवाब में इंडो-कैनेडियन समुदाय के एक समूह ने सांसदों की मांग को विभाजनकारी और पूर्वाग्रहपूर्ण बताया।
- भागवत का 31 अगस्त को टोरंटो में भारतीय प्रवासी समुदाय के कार्यक्रम में शामिल होने का कार्यक्रम है।
- प्रस्तावित दौरे को लेकर सुरक्षा व्यवस्था और संभावित विरोध प्रदर्शनों को लेकर भी तैयारियां की जा रही हैं।
- मोहन भागवत के कनाडा दौरे पर विवाद, इंडो-कैनेडियन समूहों ने NDP सांसदों की मांग का किया विरोध
समग्र समाचार सेवा
कनाडा 9 अगस्त :कनाडा के दो NDP सांसदों ने RSS प्रमुख मोहन भागवत को देश में प्रवेश से रोकने की मांग की है।
इसके जवाब में इंडो-कैनेडियन समुदाय के एक समूह ने सांसदों की मांग को विभाजनकारी और पूर्वाग्रहपूर्ण बताया।
भागवत का 31 अगस्त को टोरंटो में भारतीय प्रवासी समुदाय के कार्यक्रम में शामिल होने का कार्यक्रम है।
प्रस्तावित दौरे को लेकर सुरक्षा व्यवस्था और संभावित विरोध प्रदर्शनों को लेकर भी तैयारियां की जा रही हैं।
टोरंटो। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत के प्रस्तावित कनाडा दौरे को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। कनाडा की विपक्षी न्यू डेमोक्रेटिक पार्टी (NDP) के दो सांसदों ने सरकार से भागवत को देश में प्रवेश की अनुमति नहीं देने की मांग की है। इसके बाद इंडो-कैनेडियन समुदाय के एक समूह ने इस मांग का विरोध करते हुए कहा है कि इस तरह की भाषा समुदायों के बीच विभाजन और पूर्वाग्रह को बढ़ावा दे सकती है।
NDP सांसद हेधर मैकफर्सन और जेनी क्वान ने शुक्रवार को कनाडा सरकार से भागवत का प्रवेश रोकने की अपील की। सांसदों ने RSS को लेकर गंभीर आरोप लगाए और सरकार से कनाडा के इमिग्रेशन कानून के संबंधित प्रावधानों को लागू करने की मांग की।
मैकफर्सन ने आरोप लगाया कि भागवत की मौजूदगी से कुछ अल्पसंख्यक समुदायों में नफरत और हिंसा को लेकर चिंता बढ़ सकती है। वहीं, क्वान ने कहा कि कनाडा के इमिग्रेशन एंड रिफ्यूजी प्रोटेक्शन एक्ट के प्रासंगिक प्रावधानों का इस्तेमाल कर RSS और उसके सदस्यों की स्वीकार्यता पर फैसला किया जाना चाहिए।
इंडो-कैनेडियन समूहों ने किया विरोध
NDP सांसदों की मांग के बाद शनिवार से शुरू हुए एक जवाबी पत्र अभियान में कहा गया कि RSS जैसे संगठन को लेकर लगाए गए आरोपों के लिए ठोस और कानूनी रूप से परखे गए साक्ष्यों की आवश्यकता है।
समूह ने अपने पत्र में कहा कि किसी पूरे समुदाय के प्रमुख सांस्कृतिक संगठन को ‘फासीवादी’ बताना पूर्वाग्रह को बढ़ावा देने जैसा हो सकता है। पत्र में कनाडा के 2021 के जनगणना आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा गया कि देश में करीब 8.28 लाख लोगों ने खुद को हिंदू के रूप में दर्ज किया था। समूह का तर्क है कि किसी संगठन के खिलाफ लगाए गए आरोपों के आधार पर पूरे समुदाय को संदेह की नजर से देखना उचित नहीं है।
पहली बार कनाडा जाएंगे मोहन भागवत
मोहन भागवत का प्रस्तावित कनाडा दौरा कई मायनों में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यह उनकी कनाडा की पहली यात्रा होगी। इससे पहले RSS के तत्कालीन प्रमुख केएस सुदर्शन ने वर्ष 2005 में कनाडा का दौरा किया था।
भागवत के 31 अगस्त को टोरंटो में भारतीय प्रवासी समुदाय के एक सार्वजनिक कार्यक्रम में शामिल होने की उम्मीद है। इसके अगले दिन वह कुछ बैठकों में हिस्सा ले सकते हैं। इसके बाद उनका पांच दिवसीय अमेरिका दौरा प्रस्तावित है, जिसका समापन न्यूयॉर्क में एक सार्वजनिक कार्यक्रम के साथ होने की संभावना है।
यह दौरा RSS की वैश्विक पहुंच बढ़ाने से जुड़ी गतिविधियों का हिस्सा बताया जा रहा है। हालांकि, प्रस्तावित कार्यक्रमों को लेकर विरोध की आशंका भी जताई गई है। रिपोर्टों के अनुसार, संभावित प्रदर्शनों को देखते हुए आयोजकों की ओर से सुरक्षा व्यवस्था पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
अब सबकी नजर कनाडा सरकार के रुख पर है। एक तरफ NDP सांसद भागवत के प्रवेश पर रोक की मांग कर रहे हैं, वहीं इंडो-कैनेडियन समुदाय का एक वर्ग इसे अनुचित और विभाजनकारी बताते हुए विरोध कर रहा है। ऐसे में भागवत का प्रस्तावित दौरा कनाडा में राजनीतिक बहस के साथ-साथ प्रवासी समुदाय के बीच भी चर्चा का विषय बन गया है।