10 अगस्त दैनिक राशिफल पंचांग

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🐏मेष
स्थायी संपत्ति के कार्य बड़ा लाभ दे सकते हैं। बेरोजगारी दूर करने के प्रयास सफल रहेंगे। आय में वृद्धि तथा उन्नति मनोनुकूल रहेंगे। लाभ के अवसर हाथ आएंगे। पार्टनरों का सहयोग समय पर प्राप्त होगा। यात्रा की योजना बनेगी। घर-बाहर कुछ तनाव रहेगा। स्वास्थ्य का ध्यान रखें।

🐂वृषभ
पार्टी व पिकनिक का कार्यक्रम बनेगा। स्वादिष्ट व्यंजनों का लाभ मिलेगा। व्यापार-व्यवसाय मनोनुकूल रहेंगे। रचनात्मक कार्य सफल रहेंगे। काम में मन लगेगा। शेयर मार्केट में लाभ रहेगा। नौकरी में सुविधाएं बढ़ सकती हैं। व्यस्तता के चलते स्वास्थ्‍य का ध्यान रखें। धन प्राप्ति सुगमता से होगी।

👫मिथुन
दु:खद सूचना मिल सकती है, धैर्य रखें। फालतू खर्च होगा। कुसंगति से बचें। बेकार की बातों पर ध्यान न दें। अपने काम पर अधिक ध्यान देने की आवश्यकता है। वाणी पर नियंत्रण रखें। चिंता तथा तनाव रहेंगे। स्वास्थ्य का पाया कमजोर रहेगा। व्यवसाय ठीक चलेगा। आय में निश्चितता रहेगी। लाभ होगा।

🦀कर्क
भूले-बिसरे साथी तथा आगंतुकों के स्वागत तथा सम्मान पर व्यय होगा। आत्मसम्मान बना रहेगा। उत्साहवर्धक सूचना प्राप्त होगी। बड़ा काम करने का मन बनेगा। परिवार के सदस्यों की उन्नति के समाचार मिलेंगे। प्रसन्नता रहेगी। पारिवारिक सहयोग बना रहेगा। किसी व्यक्ति की बातों में न आएं, लाभ होगा।

🐅सिंह
घर-बाहर प्रसन्नतादायक वातावरण रहेगा। नौकरी में चैन महसूस होगा। व्यापार से संतुष्टि रहेगी। संतान की चिंता रहेगी। प्रतिद्वंद्वी तथा शत्रु हानि पहुंचा सकते हैं। मित्रों का सहयोग व मार्गदर्शन प्राप्त होगा। लाभ के अवसर हाथ आएंगे। यात्रा की योजना बनेगी। प्रसन्नता रहेगी।

🙎‍♀️कन्या
यात्रा मनोनुकूल मनोरंजक तथा लाभप्रद रहेगी। भेंट व उपहार की प्राप्ति संभव है। व्यापार-व्यवसाय से मनोनुकूल लाभ होगा। घर-बाहर सफलता प्राप्त होगी। परिवार में सुख-शांति बनी रहेगी। काम में लगन तथा उत्साह बने रहेंगे। मित्रों के साथ प्रसन्नतापूर्वक समय बीतेगा।

⚖️तुला
स्वास्थ्य का पाया कमजोर रहेगा। बनते कामों में विघ्न आएंगे। चिंता तथा तनाव रहेंगे। जीवनसाथी से सामंजस्य बैठाएं। फालतू खर्च होगा। कुसंगति से बचें। बेवजह लोगों से मनमुटाव हो सकता है। बेकार की बातों पर ध्यान न दें। आय में निश्चितता रहेगी। मित्रों का सहयोग मिलेगा। जल्दबाजी न करें।

🦂वृश्चिक
बकाया वसूली के प्रयास सफल रहेंगे। यात्रा मनोरंजक रहेगी। लाभ के अवसर हाथ आएंगे। नौकरी में सुकून रहेगा। जल्दबाजी में कोई आवश्यक वस्तु गुम हो सकती है। कानूनी अड़चन आ सकती है। विवाद न करें। व्यवसाय ठीक चलेगा। घर-बाहर प्रसन्नता बनी रहेगी।

🏹धनु
नई योजना लागू करने का श्रेष्ठ समय है। कार्यप्रणाली में सुधार होगा। सामाजिक कार्य सफल रहेंगे। मान-सम्मान मिलेगा। कार्यसिद्धि होगी। लाभ के अवसर हाथ आएंगे। घर-बाहर प्रसन्नता का माहौल रहेगा। पारिवारिक सहयोग प्राप्त होगा। बड़ा कार्य करने का मन बनेगा। सफलता के साधन जुटेंगे। जोखिम न उठाएं।

🐊मकर
किसी जानकार प्रबुद्ध व्यक्ति का सहयोग प्राप्त होने के योग हैं। तंत्र-मंत्र में रुचि रहेगी। किसी राजनयिक का सहयोग मिल सकता है। लाभ के दरवाजे खुलेंगे। चोट व दुर्घटना से बचें। व्यस्तता रहेगी। थकान व कमजोरी महसूस होगी। विवाद से बचें। धन प्राप्ति होगी। प्रमाद न करें।

🍯कुंभ
स्वास्थ्य का ध्यान रखें। चोट व दुर्घटना से बचें। आय में कमी रह सकती है। घर-बाहर असहयोग व अशांति का वातावरण रहेगा। अपनी बात लोगों को समझा नहीं पाएंगे। ऐश्वर्य के साधनों पर बड़ा खर्च होगा। जोखिम व जमानत के कार्य टालें। हितैषी सहयोग करेंगे। धनार्जन संभव है।

🐟मीन
प्रेम-प्रसंग में अनुकूलता रहेगी। किसी वरिष्ठ व्यक्ति के सहयोग से कार्य की बाधा दूर होकर लाभ की स्थिति बनेगी। परिवार के लोग अनुकूल व्यवहार करेंगे। व्यवसाय ठीक चलेगा। नए लोगों से संपर्क होगा। आय में वृद्धि तथा आरोग्य रहेगा। चिंता में कमी होगी। जल्दबाजी न करें।

|| जय श्री राम सनातन धर्म कि जय ||
📿🙏 पंचांग 🙏📿
🎉🌹🦜🌴🍂🙏🌿🦚🍁🌷

दिनाँक:-10/08/2026,सोमवार
द्वादशी, कृष्ण पक्ष,
श्रावण
“”””””””””””””””””””””””””””””””””(समाप्ति काल)

तिथि—‐— द्वादशी 08:00:10. तक
तिथि—त्रयोदशी क्षय 28:53:29
पक्ष———‐————– कृष्ण
नक्षत्र———- आर्द्रा 12:25:50
योग‐———– वज्र 22:25:40
करण——— तैतुल 08:00:10
करण–‐——— गर 18:26:39
करण——– वणिज 28:53:29
वार——————— सोमवार
माह———————- श्रावण
चन्द्र राशि—–मिथुन 28:42:21
चन्द्र राशि—————— कर्क
सूर्य राशि——————- कर्क
रितु————————- वर्षा
आयन————— दक्षिणायन
संवत्सर—————– पराभव
संवत्सर (उत्तर)—————– रौद्र
विक्रम संवत–‐———- 2083
गुजराती संवत———— 2082
शक संवत—–‐———- 1948
कलि संवत————— 5127

वृन्दावन
सूर्योदय————- 05:48:22
सूर्यास्त————– 19:00:26
दिन काल———– 13:12:03
रात्री काल—–‐—– 10:48:27
चंद्रास्त———‐—- 17:18:43
चंद्रोदय————– 27:51:22

लग्न—-कर्क 23°11′, 113°11′

सूर्य नक्षत्र————– आश्लेषा
चन्द्र नक्षत्र—————– आर्द्रा
नक्षत्र पाया—————– लौह

🚩💮🚩 पद, चरण 🚩💮🚩

ङ आर्द्रा 07:00:23

छ—- आर्द्रा 12:25:50

के—- पुनर्वसु 17:51:12

को—- पुनर्वसु 23:16:41

💮🚩💮 ग्रह गोचर 💮🚩💮

ग्रह =राशी , अंश ,नक्षत्र, पद
============================
सूर्य= कर्क 23°30 , आश्लेषा 2 डू
चन्द्र= मिथुन 15°30 , आर्द्रा 3 ड
बुध = कर्क 06°52 ‘ पुष्य 1 हु
शु क्र= कन्या 08°05, उoफाo 4 पी
मंगल= मिथुन 04°17 मृगशिरा 4 की
गुरु= कर्क 14°33 पुष्प , 4 ड
शनि=मीन 20°30 ‘ रेवती , 2 दो
राहू=(व) कुम्भ 06°22 धनिष्ठा , 4 गे
केतु= (व) सिंह 06°22 मघा 2 मी
============================

🚩💮🚩 शुभा$शुभ मुहूर्त 🚩💮🚩

राहू काल 07:27 – 09:06 अशुभ
यम घंटा 10:45 – 12:24 अशुभ
गुली काल 14:03 – 15:42 अशुभ
अभिजित 11:58 – 12:51 शुभ
दूर मुहूर्त 12:51 – 13:44 अशुभ
दूर मुहूर्त 15:29 – 16:22 अशुभ
वर्ज्यम 23:17 – 24:44* अशुभ
प्रदोष 19:00 – 21:12 शुभ

💮चोघडिया, दिन

अमृत 05:48 – 07:27 शुभ
काल 07:27 – 09:06 अशुभ
शुभ 09:06 – 10:45 शुभ
रोग 10:45 – 12:24 अशुभ
उद्वेग 12:24 – 14:03 अशुभ
चर 14:03 15:42 शुभ
लाभ 15:42 – 17:21 शुभ
अमृत 17:21 – 19:00 शुभ

🚩चोघडिया, रात

चर 19:00 – 20:21 शुभ
रोग 20:21 – 21:43 अशुभ
काल 21:43 – 23:04 अशुभ
लाभ 23:04 – 24:25* शुभ
उद्वेग 24:25* – 25:46* अशुभ
शुभ 25:46* – 27:07* शुभ
अमृत 27:07* – 28:28* शुभ
चर 28:28* – 29:49* शुभ

💮होरा, दिन

चन्द्र 05:48- 06:54
शनि 06:54- 08:00
बृहस्पति 08:00 -09:06
मंगल 09:06- 10:12
सूर्य 10:12 -11:18
शुक्र 11:18- 12:24
बुध 12:24 -13:30
चन्द्र 13:30 -14:36
शनि 14:36 -15:42
बृहस्पति 15:42- 16:48
मंगल 16:48 -17:54
सूर्य 17:54 -19:00

🚩होरा, रात

शुक्र 19:00 -19:54
बुध 19:54 -20:49
चन्द्र 20:49 -21:43
शनि 21:43 -22:37
बृहस्पति 22:37 -23:31
मंगल 23:31 -24:25
सूर्य 24:25-25:19
शुक्र 25:19-26:13
बुध 26:13-27:07
चन्द्र 27:07-28:01
शनि 28:01- 28:55
बृहस्पति 28:55-29:49

🚩उदयलग्न प्रवेशकाल 🚩

कर्क > 04:17 से 06:22 तक
सिंह > 06:22 से 08:44 तक
कन्या > 08:44 से 11:02 तक
तुला > 11:02 से 13:08 तक
वृश्चिक > 13:08 से 15:36 तक
धनु > 15:36 से 17:40 तक
मकर > 17:40 से 19:22 तक
कुम्भ > 19:22 से 21:02 तक
मीन > 21:02 से 22:30 तक
मेष > 22:30 से 00:08 तक
वृषभ > 00:08 से 01:54 तक
मिथुन > 01:54 से 04:06 तक
=======================

🚩विभिन्न शहरों का रेखांतर (समय)संस्कार

(लगभग-वास्तविक समय के समीप)
दिल्ली +10मिनट——— जोधपुर -6 मिनट
जयपुर +5 मिनट—— अहमदाबाद-8 मिनट
कोटा +5 मिनट———— मुंबई-7 मिनट
लखनऊ +25 मिनट——–बीकानेर-5 मिनट
कोलकाता +54—–जैसलमेर -15 मिनट

नोट– दिन और रात्रि के चौघड़िया का आरंभ क्रमशः सूर्योदय और सूर्यास्त से होता है।
प्रत्येक चौघड़िए की अवधि डेढ़ घंटा होती है।
चर में चक्र चलाइये , उद्वेगे थलगार ।
शुभ में स्त्री श्रृंगार करे,लाभ में करो व्यापार ॥
रोग में रोगी स्नान करे ,काल करो भण्डार ।
अमृत में काम सभी करो , सहाय करो कर्तार ॥
अर्थात- चर में वाहन,मशीन आदि कार्य करें ।
उद्वेग में भूमि सम्बंधित एवं स्थायी कार्य करें ।
शुभ में स्त्री श्रृंगार ,सगाई व चूड़ा पहनना आदि कार्य करें ।
लाभ में व्यापार करें ।
रोग में जब रोगी रोग मुक्त हो जाय तो स्नान करें ।
काल में धन संग्रह करने पर धन वृद्धि होती है ।
अमृत में सभी शुभ कार्य करें ।

💮दिशा शूल ज्ञान————-पूर्व
परिहार-: आवश्यकतानुसार यदि यात्रा करनी हो तो घी अथवा काजू खाके यात्रा कर सकते है l
इस मंत्र का उच्चारण करें-:
शीघ्र गौतम गच्छत्वं ग्रामेषु नगरेषु च l
भोजनं वसनं यानं मार्गं मे परिकल्पय: ll

🚩 अग्नि वास ज्ञान -:
यात्रा विवाह व्रत गोचरेषु,
चोलोपनिताद्यखिलव्रतेषु ।
दुर्गाविधानेषु सुत प्रसूतौ,
नैवाग्नि चक्रं परिचिन्तनियं ।। महारुद्र व्रतेSमायां ग्रसतेन्द्वर्कास्त राहुणाम्
नित्यनैमित्यके कार्ये अग्निचक्रं न दर्शायेत् ।।

15 + 12 + 2 + 1 = 30 ÷ 4 = 2 शेष
आकाश लोक पर अग्नि वास हवन के लिए अशुभ कारक है l

🚩💮 ग्रह मुख आहुति ज्ञान 💮🚩

सूर्य नक्षत्र से अगले 3 नक्षत्र गणना के आधार पर क्रमानुसार सूर्य , बुध , शुक्र , शनि , चन्द्र , मंगल , गुरु , राहु केतु आहुति जानें । शुभ ग्रह की आहुति हवनादि कृत्य शुभपद होता है

केतु ग्रह मुखहुति

💮 शिव वास एवं फल -:

27 + 27 + 5 = 59 ÷ 7 = 3 शेष

वृषाभारूढ = शुभ कारक

🚩भद्रा वास एवं फल -:

स्वर्गे भद्रा धनं धान्यं ,पाताले च धनागम:।
मृत्युलोके यदा भद्रा सर्वकार्य विनाशिनी।।

रात्रि 28:54 से प्रारम्भ

मृत्यु लोक = सर्वकार्य विनाशिनी

💮🚩 विशेष जानकारी 🚩💮

* सोम प्रदोष व्रत (शिव पूजन)

*गुरु पूर्वोदय 5:50 पर

*त्रयोदशीक्षय

💮🚩💮 शुभ विचार 💮🚩💮

प्रलये भिन्नमर्यादा भवन्ति किल सागराः ।
सागरा भेदमिच्छान्ति प्रलयेऽपि न साधवः ।।
।।चाoनीo।।

जब प्रलय का समय आता है तो समुद्र भी अपनी मयारदा छोड़कर किनारों को छोड़ अथवा तोड़ जाते है, लेकिन सज्जन पुरुष प्रलय के सामान भयंकर आपत्ति अवं विपत्ति में भी आपनी मर्यादा नहीं बदलते.

🚩💮🚩 सुभाषितानि 🚩💮🚩

गीता -: विभूतियोग अo-10

यो मामजमनादिं च वेत्ति लोकमहेश्वरम्‌।
असम्मूढः स मर्त्येषु सर्वपापैः प्रमुच्यते॥

जो मुझको अजन्मा अर्थात्‌ वास्तव में जन्मरहित, अनादि (अनादि उसको कहते हैं जो आदि रहित हो एवं सबका कारण हो) और लोकों का महान्‌ ईश्वर तत्त्व से जानता है, वह मनुष्यों में ज्ञानवान्‌ पुरुष संपूर्ण पापों से मुक्त हो जाता है

🙏आपका दिन मंगलमय हो🙏

————————————
आचार्य ज्योतिष सचिन पांडे

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