- संसद का मॉनसून सत्र गुरुवार को भारी हंगामे के बीच समाप्त हुआ; विपक्ष ने स्पीकर की चाय बैठक का भी बहिष्कार किया।
- किरन रिजिजू के अनुसार, सत्र में 12 बिल पास हुए, लेकिन केवल एक बिल पर दोनों सदनों में चर्चा हुई।
- विपक्ष ने Jantar Mantar पुलिस कार्रवाई, राम मंदिर चंदा विवाद समेत मुद्दों पर बहस और अमित शाह के बयान की मांग की।
- लोकसभा की उत्पादकता मात्र 19%, राज्यसभा की 39% रही; कई बिल बिना चर्चा के पारित किए गए, विपक्ष ने केंद्र को ठहराया जिम्मेदार।
समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली, 13 अगस्त :संसद का मॉनसून सत्र गुरुवार को भारी हंगामे और विपक्ष के विरोध के बीच समाप्त हो गया। सत्र के दौरान विपक्ष ने पुलिस कार्रवाई, राम मंदिर चंदा विवाद और केंद्र की नीतियों पर बहस की जोरदार मांग की, वहीं सरकार ने कहा कि बहस के लिए वे तैयार हैं, लेकिन विपक्ष लिखित में सवाल दे। लोकसभा में विपक्ष ने आखिरकार स्पीकर की चाय बैठक का भी बहिष्कार किया।
केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरन रिजिजू ने बताया कि सत्र में कुल 12 बिल पास हुए, लेकिन दोनों सदनों में केवल एक बिल पर चर्चा हुई। लोकसभा की उत्पादकता 19% और राज्यसभा की 39% रही। कई विधेयक बिना चर्चा के 36 मिनट में पारित कर दिए गए।
राज्यसभा के सभापति ने भी हंगामे पर खेद जताया और कहा कि उत्पादकता बेहद कम रही। कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल ने केंद्र सरकार को सत्र के वाशआउट के लिए जिम्मेदार ठहराया। विपक्ष ने कहा कि सरकार विपक्ष की मांगों को अनदेखा कर रही है और संसदीय परंपराओं को तोड़ा जा रहा है। सरकार का कहना था कि जब बहस के लिए बुलाया गया, तो विपक्ष ने ही चर्चा से इनकार किया।
इस सत्र में संसद ने केरल का नाम बदलकर ‘केरलम’ करने वाला बिल, NCDC संशोधन बिल सहित कई अहम विधेयक भी पास किए.