राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का संबोधन “हर नागरिक राष्ट्र-निर्माण का भागीदार”
स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर
- राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्र को संबोधित किया, स्वतंत्रता सेनानियों को श्रद्धांजलि दी।
- देशवासियों से राष्ट्र-निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने और संविधान में निहित मूल कर्तव्यों के पालन का आह्वान।
- विभाजन की त्रासदी, लोकतंत्र, सामाजिक न्याय और समावेशी विकास की उपलब्धियों का उल्लेख।
- महिला सशक्तिकरण, शिक्षा, गरीबी उन्मूलन और वित्तीय समावेशन के लिए हालिया सरकारी प्रयासों की सराहना।
समग्र समाचार सेवा | नई दिल्ली, 15 अगस्त : 14 अगस्त कोस्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने राष्ट्र को संबोधित करते हुए स्वतंत्रता संग्राम के सेनानियों, संविधान निर्माताओं और देश के सभी नागरिकों को नमन किया। राष्ट्रपति ने कहा कि 15 अगस्त 1947 को भारतमाता पराधीनता से मुक्त हुईं और सभी देशवासी स्वतंत्र भारत की नियति के निर्माता बने।
अपने संबोधन में उन्होंने निष्ठावान विद्यार्थियों, शिक्षकों, वैज्ञानिकों, डॉक्टरों, श्रमिकों और अन्नदाता किसानों सहित समाज के सभी वर्गों के योगदान को सराहा और संविधान में निहित मूल कर्तव्यों के पालन की आवश्यकता पर बल दिया।
राष्ट्रपति ने विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस की चर्चा करते हुए कहा कि बंटवारे की त्रासदी और सांप्रदायिक हिंसा ने लाखों लोगों को प्रभावित किया, लेकिन पीड़ितों ने अपनी पहचान और जज़्बा बनाए रखा। उन्होंने सरदार पटेल द्वारा देश की 550 से अधिक रियासतों के एकीकरण को असाधारण उपलब्धि बताया।
उन्होंने लोकतंत्र, सामाजिक न्याय, शिक्षा और महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में हालिया उपलब्धियों के साथ-साथ प्रधानमंत्री जनधन योजना, मुफ्त राशन और गरीबी उन्मूलन जैसे अभियानों को भी रेखांकित किया। राष्ट्रपति ने कहा कि आज का भारत, विरासत और आधुनिकता के समन्वय से तेज समावेशी विकास की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
राष्ट्रपति मुर्मू ने सभी नागरिकों को प्रेरित किया कि वे राष्ट्र-निर्माण में सक्रिय भागीदारी निभाएँ और देश के उज्ज्वल भविष्य के लिए एकजुट होकर कार्य करें।