- नॉर्वे के विदेश मंत्री की कश्मीर पर टिप्पणी पर भारत ने स्पष्ट किया—जम्मू-कश्मीर और लद्दाख भारत के अभिन्न हिस्से हैं।
- विदेश मंत्रालय ने कहा—अंतरराष्ट्रीय समुदाय को पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर और वहां से होने वाले आतंकवाद पर ध्यान देना चाहिए।
- भारत ने पाकिस्तान के साथ किसी भी मुद्दे पर बातचीत आतंकवाद-मुक्त वातावरण में ही संभव बताई; तीसरे पक्ष की मध्यस्थता को अस्वीकार किया।
- हाल के दिनों में POK में विरोध, सुरक्षा बलों से टकराव और सरकार के फैसलों पर असंतोष को भारत ने अंतरराष्ट्रीय चिंता का विषय बताया।
समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली, 15 अगस्त : पाकिस्तान यात्रा के दौरान नॉर्वे के विदेश मंत्री एस्पेन बार्थ ईडे की कश्मीर पर टिप्पणी पर भारत ने कड़ा जवाब दिया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने शुक्रवार को कहा कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख भारत के अभिन्न और अविभाज्य हिस्से हैं और भारत की संप्रभुता पर कोई समझौता नहीं हो सकता।
भारत ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की कि वह भारत पर टिप्पणी करने के बजाय पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर में हो रहे मानवाधिकार उल्लंघनों और वहां से उत्पन्न होने वाले सीमा पार आतंकवाद पर ध्यान केंद्रित करे। भारत ने बार-बार पाकिस्तान पर आतंकवादी गतिविधियों का समर्थन करने और POK का इस्तेमाल आतंकवाद के लिए किए जाने का आरोप लगाया है।
नॉर्वे के विदेश मंत्री की पाकिस्तान यात्रा के दौरान कश्मीर सहित क्षेत्रीय मुद्दों पर चर्चा हुई। पाकिस्तान ने कश्मीर को पुराने विवाद और क्षेत्रीय सुरक्षा से जोड़कर पेश किया, जबकि भारत ने कहा कि किसी भी बातचीत के लिए आतंक और हिंसा से मुक्त माहौल जरूरी है।
भारत की प्रतिक्रिया ऐसे समय में आई है जब POK में महंगाई, बिजली की कीमतों और जरूरी वस्तुओं को लेकर विरोध, टकराव और असंतोष बढ़ा है। भारत ने इन घटनाओं का उल्लेख करते हुए अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की कि वह पाकिस्तान के कब्जे वाले इलाकों में हालात की निगरानी करे और सीमा पार आतंकवाद की वास्तविक चिंता को समझे।
भारत ने एक बार फिर स्पष्ट किया कि कश्मीर पर उसकी नीति अडिग है, और किसी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता या अंतरराष्ट्रीयकरण के प्रयासों को स्वीकार नहीं किया जाएगा।