असम में अगरवुड उद्योग को बढ़ावा और निर्यात आसान

असम सरकार ने अगरवुड सेक्टर को स्ट्रीमलाइन करने के लिए उठाए बड़े कदम, नियमों में ढील और अंतरराष्ट्रीय व्यापार केंद्र के गठन का हुआ ऐलान।

कृपया इस पोस्ट को साझा करें!
  • असम सरकार ने अगरवुड उद्योग को बढ़ावा देने, नियमों को सरल बनाने और निर्यात को सुगम बनाने के लिए एक हाई-लेवल टास्क फोर्स का गठन किया है।
  • बैठक में वन क्षेत्र से बाहर उगाई जाने वाली अगरवुड की खेती के पंजीकरण, डीसी या सर्कल ऑफिसर द्वारा प्रमाण पत्र जारी करने और त्वरित परीक्षण सुविधाओं पर जोर दिया गया।
  • सरकार राज्य में अंतरराष्ट्रीय अगर ट्रेड सेंटर स्थापित करने और उच्च मूल्य वाले डाउनस्ट्रीम उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

समग्र समाचार सेवा
गुवाहाटी, 27 अगस्त: पूर्वोत्तर भारत का प्रमुख राज्य असम अपने अनूठे प्राकृतिक संसाधनों और वन उत्पादों के लिए वैश्विक स्तर पर जाना जाता है। इसी कड़ी में राज्य के आर्थिक और औद्योगिक परिदृश्य को एक नई ऊंचाई देने के लिए असम सरकार ने ‘अगरवुड’ (Agarwood) उद्योग को पुनर्जीवित और विस्तारित करने की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल की है। गुवाहाटी के खानपाड़ा स्थित असम प्रशासनिक स्टाफ कॉलेज में हाल ही में असम अगरवुड टास्क फोर्स और स्टेकहोल्डर्स की पहली उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में राज्य के कई वरिष्ठ मंत्रियों और शीर्ष नौकरशाहों ने हिस्सा लिया, जिसमें अगरवुड की खेती से लेकर इसके वैश्विक निर्यात तक के सभी पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की गई।

उन्नत खेती और नियमों को सरल बनाने पर विशेष जोर

पारंपरिक रूप से अगरवुड की खेती और उसके कारोबार से जुड़े कड़े नियमों के कारण किसानों और उद्यमियों को कई तरह की प्रशासनिक अड़चनों का सामना करना पड़ता था। सरकार ने इस समस्या को गंभीरता से लेते हुए नियमों के सरलीकरण की प्रक्रिया शुरू कर दी है। बैठक के दौरान एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव यह रखा गया कि वन क्षेत्रों के बाहर उगाई जाने वाली अगरवुड की खेती के पंजीकरण के लिए एक व्यवस्थित और पारदर्शी तंत्र स्थापित किया जाए। इसके साथ ही, किसानों को जागरूक करने के लिए विशेष अभियान चलाने की भी बात कही गई है ताकि वे सभी विनियामक आवश्यकताओं को आसानी से समझ सकें।

उद्योग जगत के जानकारों और स्टेकहोल्डर्स ने यह भी सुझाव दिया कि अगरवुड चिप और तेल प्रसंस्करण इकाइयों को पारंपरिक ‘लकड़ी आधारित उद्योग’ (Wood-Based Industry) के ढांचे से बाहर रखा जाना चाहिए। उनका तर्क था कि कृत्रिम या निजी भूमि पर उगाई जाने वाली अगरवुड और उसके प्रसंस्करण की विशेषताएं और आवश्यकताएं पूरी तरह से अलग होती हैं। इसके अलावा, वन क्षेत्र की सीमा से बाहर के मामलों में ‘प्रमाण पत्र ऑफ ओरिजिन’ (Certificate of Origin) जारी करने की प्रक्रिया को भी विकेंद्रीकृत करने का प्रस्ताव है, ताकि हर बार जिला वन अधिकारी (DFO) के पास जाने के बजाय जिला कमिश्नर या सर्कल ऑफिसर के स्तर पर ही यह कार्य सुगमता से पूरा किया जा सके।

तेज़ परीक्षण और निर्यात की बाधाओं को दूर करना

अगरवुड के अंतरराष्ट्रीय व्यापार में सबसे बड़ी चुनौती गुणवत्ता परीक्षण और निर्यात अनुमतियों में लगने वाला समय होता है। इस समस्या से निपटने के लिए टास्क फोर्स ने जिला स्तर पर अगरवुड चिप और तेल परीक्षण सुविधाएं स्थापित करने का प्रस्ताव रखा है। इससे समय की बचत होगी और गुणवत्ता मूल्यांकन में भी पूरी पारदर्शिता आएगी। इसके अलावा, CITES और विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT) की अनुमतियों के लिए एक समयबद्ध तंत्र बनाने की मांग की गई है, जिसके तहत वैधानिक आवश्यकताओं को पूरा करने वाले पात्र आवेदनों को मात्र 15 दिनों के भीतर संसाधित किया जा सके।

इस बैठक के दौरान असम के पहले आधिकारिक अगरवुड चिप्स के निर्यात को सफलतापूर्वक पूरा करने वाले ‘MJI ग्रुप’ के संस्थापक डॉ. जेहिरुल इस्लाम को सम्मानित किया गया। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय बाजारों में लगभग 112 किलोग्राम अगरवुड चिप्स की खेप के निर्यात को सुगम बनाकर राज्य के लिए एक ऐतिहासिक मील का पत्थर स्थापित किया है। स्टेकहोल्डर्स ने केंद्र सरकार से यह भी अनुरोध किया है कि घरेलू उद्योग को मजबूत करने और अवैध तस्करी रोकने के लिए बाहरी देशों से कच्चे अगरवुड और उसके उत्पादों के आयात को प्रतिबंधित या सीमित किया जाए।

डाउनस्ट्रीम मैन्युफैक्चरिंग और अंतरराष्ट्रीय बाजार

असम सरकार केवल कच्चे माल के उत्पादन तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि उसका मुख्य लक्ष्य राज्य को परफ्यूम, इत्र यौगिकों, आवश्यक तेलों, सौंदर्य प्रसाधनों और अगरबत्ती जैसे उच्च मूल्य वाले ‘डाउनस्ट्रीम’ उत्पादों के निर्माण का प्रमुख केंद्र बनाना है। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय निवेशकों को आकर्षित करने के लिए विशेष नीतियां बनाई जा रही हैं ताकि स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर पैदा हो सकें और आपूर्ति श्रृंखला मजबूत हो सके। इसके साथ ही, ‘इंटरनेशनल अगर ट्रेड सेंटर’ (International Agar Trade Centre) के त्वरित उद्घाटन का निर्णय भी लिया गया है, जो खरीदारों, विक्रेताओं और निर्यातकों के लिए एक सिंगल-विंडो प्लेटफॉर्म के रूप में कार्य करेगा।

यह व्यापक रणनीति प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन और “बॉर्न इन असम, मेड फॉर द वर्ल्ड” (Born in Assam, Made for the World) की भावना के अनुरूप है। इन सभी सुधारों और प्रशासनिक पहलों के माध्यम से असम सरकार न केवल स्थानीय किसानों और उद्यमियों की आय में वृद्धि करना चाहती है, बल्कि वैश्विक सुगंध और इत्र बाजार में भारत की स्थिति को भी और अधिक सुदृढ़ करना चाहती है।

 

कृपया इस पोस्ट को साझा करें!
Leave A Reply

Your email address will not be published.