अमित शाह ने विश्व संस्कृत दिवस पर दी बधाई

केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि संस्कृत भाषा हमारी प्राचीन धरोहर और ज्ञान परंपरा का प्रतीक है, इसके संरक्षण से हीन भावना दूर होती है।

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  • केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने विश्व संस्कृत दिवस के अवसर पर देशवासियों को हार्दिक शुभकामनाएं दी हैं।
  • उन्होंने कहा कि संस्कृत केवल एक भाषा नहीं, बल्कि हमारी प्राचीन संस्कृति, ज्ञान, दर्शन और सभ्यता का मूल आधार है।
  • सरकार देश में संस्कृत भाषा के संरक्षण, संवर्धन और इसके प्राचीन ग्रंथों के अध्ययन को बढ़ावा देने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली, 28 अगस्त: भारत की प्राचीन और गौरवशाली सांस्कृतिक विरासत में भाषाओं का एक विशिष्ट स्थान रहा है, और इनमें संस्कृत भाषा का स्थान सर्वोपरि माना जाता है। विश्व संस्कृत दिवस (World Sanskrit Day) के पावन अवसर पर देश के केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने देश और दुनिया भर के सभी संस्कृत प्रेमियों तथा नागरिकों को हार्दिक शुभकामनाएं दी हैं। Global Governance News की रिपोर्ट के अनुसार, गृह मंत्री ने अपने आधिकारिक संदेश में संस्कृत भाषा के महत्व और उसके सार्वभौमिक दर्शन पर विस्तार से प्रकाश डाला है। उन्होंने कहा कि संस्कृत न केवल भारत की प्राचीन भाषाओं की जननी है, बल्कि यह हमारे देश की संपूर्ण सभ्यता, संस्कृति, विज्ञान और आध्यात्मिक चेतना का मुख्य आधार स्तंभ भी है।

संस्कृत: ज्ञान, विज्ञान और संस्कारों की भाषा

गृह मंत्री अमित शाह ने सोशल मीडिया के माध्यम से अपने संदेश में उल्लेख किया कि संस्कृत भाषा में निहित ज्ञान-विज्ञान, नीतिशास्त्र और दर्शन सदियों से पूरी मानवता का मार्गदर्शन करते आ रहे हैं। हमारे वेद, उपनिषद, पुराण और महान ग्रंथ इसी भाषा में रचे गए हैं, जिन्होंने दुनिया को वसुधैव कुटुंबकम् का संदेश दिया है। आज के आधुनिक दौर में भी जब लोग अपनी जड़ों की ओर लौट रहे हैं, तब संस्कृत के वैज्ञानिक स्वरूप और इसकी व्याकरणिक शुद्धता को पूरी दुनिया में सराहा जा रहा है। कंप्यूटर साइंस और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के इस युग में भी संस्कृत को सबसे उपयुक्त भाषाओं में से एक माना गया है।

संस्कृत भाषा के संरक्षण और संवर्धन के लिए सरकार के प्रयास

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार देश की प्राचीन कला, संस्कृति और भाषाओं को पुनर्जीवित करने के लिए लगातार कई महत्वपूर्ण कदम उठा रही है। इसी दिशा में संस्कृत के अध्ययन-अध्यापन को बढ़ावा देने, शोध कार्यों को प्रोत्साहित करने और युवाओं को इस प्राचीन भाषा से जोड़ने के लिए विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों में विशेष कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। गृह मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि देश की युवा पीढ़ी को अपनी इस महान विरासत से परिचित कराना हम सबका कर्तव्य है, ताकि हमारी आने वाली पीढ़ियां अपनी संस्कृति पर गर्व महसूस कर सकें।

विश्व स्तर पर संस्कृत की बढ़ती लोकप्रियता

आज केवल भारत में ही नहीं, बल्कि अमेरिका, यूरोप और एशिया के कई देशों के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों में भी संस्कृत भाषा और प्राचीन भारतीय दर्शन पर गहन शोध किए जा रहे हैं। विदेशी学者 भी भारतीय वेदों और योग-दर्शन को समझने के लिए संस्कृत सीख रहे हैं। यह इस बात का प्रमाण है कि संस्कृत किसी एक क्षेत्र या समुदाय की भाषा नहीं, बल्कि संपूर्ण मानवता की थाती है। विश्व संस्कृत दिवस के इस अवसर पर देश के विभिन्न स्कूलों, कॉलेजों और सांस्कृतिक संगठनों द्वारा संगोष्ठियों, श्लोक पाठ प्रतियोगिताओं और विशेष कार्यक्रमों का आयोजन किया गया, जिसमें लोगों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।

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