फार्मा सेक्टर भारत की रणनीतिक संपत्ति: अमित शाह
अहमदाबाद में आयोजित 'फार्माइनोवा अवार्ड्स' समारोह में गृह मंत्री ने शोध, नवाचार और आत्मनिर्भरता पर जोर देते हुए चीन पर निर्भरता घटाने की बात कही।
- केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने अहमदाबाद में फार्मास्युटिकल सेक्टर को देश की ‘राष्ट्रीय रणनीतिक संपत्ति’ करार दिया है।
- उन्होंने उद्योग जगत से केवल दवाओं के उत्पादन तक सीमित न रहकर अनुसंधान (Research) और नई तकनीकों पर विशेष ध्यान देने का आह्वान किया है।
- सरकार की पीएलआई (PLI) योजना और बल्क ड्रग पार्क नीतियों से चीन के वर्चस्व को कम करने में बड़ी मदद मिलेगी।
समग्र समाचार सेवा
अहमदाबाद, 28 अगस्त: केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने अहमदाबाद में एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए भारतीय दवा उद्योग को देश की ‘राष्ट्रीय रणनीतिक संपत्ति’ (National Strategic Asset) बताया है। उन्होंने कहा कि भारत को केवल अपने देश के लिए दवाओं के मामले में आत्मनिर्भर नहीं बनना है, बल्कि पूरी दुनिया को जीवन रक्षक दवाएं उपलब्ध कराने का लक्ष्य लेकर चलना है। ‘फार्माइनोवा अवार्ड्स 2026’ (PharmInnova Awards) के दौरान उन्होंने फार्मास्युटिकल साइंस और रिसर्च के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले युवाओं और शोधकर्ताओं की सराहना की।
शोध और नवाचार (Research & Innovation) पर जोर
गृह मंत्री ने उद्योग जगत को स्पष्ट संदेश दिया कि यदि भारत को वैश्विक स्तर पर अपनी नेतृत्वकारी भूमिका बनाए रखनी है, तो केवल पारंपरिक विनिर्माण से आगे बढ़कर अनुसंधान और नई तकनीकों (Innovation) पर भारी निवेश करना होगा। उन्होंने सुझाव दिया कि यदि किसी छोटी कंपनी के पास बजट की कमी है, तो पांच कंपनियां मिलकर मुनाफे की हिस्सेदारी के आधार पर सामूहिक रूप से शोध कार्य कर सकती हैं। सरकार द्वारा शोध को बढ़ावा देने के लिए कई योजनाएं चलाई जा रही हैं, जिनका लाभ युवा वैज्ञानिकों और प्रोफेसरों को उठाना चाहिए।
पीएलआई योजना और बल्क ड्रग पार्कों से चीन को टक्कर
वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में चीन के वर्चस्व पर बोलते हुए अमित शाह ने कहा कि केंद्र सरकार की उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन (PLI) योजना और बल्क ड्रग एवं मेडिकल डिवाइस पार्क नीतियां गेम-चेंजर साबित हो रही हैं। इन रणनीतिक पहलों के कारण देश में अब तक लगभग 67,000 करोड़ रुपये का निवेश आ चुका है, और भारत 3.64 लाख करोड़ रुपये से अधिक के फार्मा उत्पादों का निर्यात कर चुका है। इन सबका मुख्य उद्देश्य भारत को एक्टिव फार्मास्युटिकल इंग्रेडिएंट्स (API) और क्रिटिकल मेडिकल उपकरणों के मामले में पूरी तरह आत्मनिर्भर बनाना है।
साल 2028 तक हर जरूरी मेडिकल उपकरण देश में बनेगा
सरकार के विजन को साझा करते हुए गृह मंत्री ने घोषणा की कि वर्ष 2028 से पहले बैंडेज, सीटी स्कैन और एमआरआई जैसी सभी आवश्यक चिकित्सीय मशीनें और उपकरण भारत में ही निर्मित होंगे। उन्होंने कहा कि कोविड-19 महामारी के दौरान देश के वैज्ञानिकों और दवा निर्माताओं ने अपनी क्षमता का लोहा पूरी दुनिया को मनवाया था। आज भारत दुनिया के कई देशों को वैक्सीन और दवाइयां मुहैया करा रहा है।
विकसित भारत 2047 का रोडमैप
कार्यक्रम के अंत में उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘विकसित भारत 2047’ के सपने का जिक्र करते हुए कहा कि सही नीतियों, मजबूत राजनीतिक इच्छाशक्ति और युवाओं की प्रतिभा के दम पर भारत हर क्षेत्र में दुनिया का सिरमौर बनेगा। स्वास्थ्य और फार्मा सेक्टर इस लक्ष्य को हासिल करने में सबसे मजबूत स्तंभ की भूमिका निभाएंगे।