गुरु नानक देव जी ने सत्य और सेवा का दीप जलाया,
एक ओंकार का पावन संदेश जग को सुनाया।
जाति पाँति के भेद मिटाकर प्रेम का मार्ग दिखाया,
मानवता को सबसे ऊँचा धर्म बताया।
गुरु अमरदास जी ने सेवा को जीवन का आधार बनाया,
ऊँच नीच और छुआछूत का भेद मिटाया।
“पहले पंगत, फिर संगत” का महान संदेश दिया,
हर मानव में परमात्मा का स्वरूप दिखाया।
जब समाज में ऊँच नीच की दीवारें थीं,
तब उन्होंने समानता की आवाज उठाई।
राजा हो या निर्धन, सब एक पंक्ति में बैठें
ऐसी पंगत की परंपरा उन्होंने चलाई।
उन्होंने कहा पहले साथ बैठकर भोजन करें,
फिर गुरु के दरबार में संगत करें।
यह केवल भोजन की व्यवस्था नहीं थी,
बल्कि समानता और मानवता की क्रांति थी।
नारी को सम्मान दिलाने के लिए,
कई सामाजिक कुरीतियों का विरोध किया।
सती जैसी प्रथा के विरुद्ध आवाज उठाई,
और नारी को समाज में सम्मान का स्थान दिया।
उन्होंने दूर दूर तक मंजियों की स्थापना कर,
गुरु का संदेश जन जन तक पहुँचाया।
सेवा, सिमरन और सदाचार के मार्ग से,
हजारों जीवनों को प्रकाश दिखाया।
उनका जीवन हमें आज भी पुकारता है
यदि सच में गुरु को मानना है,
तो भूखे को भोजन, दुखी को सहारा,
और हर इंसान को सम्मान देना है।
गुरु अमरदास जी की यही सच्ची वाणी
सेवा करो, अहंकार छोड़ो,
सबको समान समझो,
और प्रभु के नाम से अपना जीवन जोड़ो।
आज उनकी पुण्यतिथि पर
हम श्रद्धा से शीश झुकाते हैं,
उनकी शिक्षाओं को जीवन में अपनाकर
गुरु अमरदास जी को सच्ची श्रद्धांजलि देते हैं।
गुरु अमरदास जी को शत शत नमन!
उनकी सेवा, त्याग और समानता का संदेश
सदा मानवता को राह दिखाता रहे।
वाहेगुरु जी का खालसा,
वाहेगुरु जी की फतेह!
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|| समृद्धि के सारथी ||
सीए अध्यवसाय का अभिमान