पूर्व लोकसभा अध्यक्ष पी.ए. संगमा को दी गई श्रद्धांजलि
संविधान सदन में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, उपसभापति हरिवंश और अन्य गणमान्य लोगों ने पी.ए. संगमा की जयंती पर उनके चित्र पर अर्पित किए श्रद्धासुमन।
- लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला और राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश ने संविधान सदन के केंद्रीय कक्ष में पूर्व लोकसभा अध्यक्ष पी.ए. संगमा की जयंती पर उनके चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित की।
- श्री संगमा 1996 में सर्वसम्मति से 11वीं लोकसभा के अध्यक्ष चुने गए थे और वह विपक्ष के ऐसे पहले सदस्य थे जिन्होंने इस पद को संभाला था।
- उनके चित्र का अनावरण तत्कालीन राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी द्वारा 10 फरवरी 2014 को किया गया था, जिसे कलाकार विजेंद्र शर्मा ने तैयार किया था।
समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली, 01 सितंबर: भारतीय संसद के केंद्रीय कक्ष में पूर्व लोकसभा अध्यक्ष श्री पी.ए. संगमा की जयंती के अवसर पर एक विशेष श्रद्धांजलि कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस दौरान लोकसभा अध्यक्ष श्री ओम बिरला ने उनके चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें नमन किया। उनके साथ ही राज्यसभा के उपसभापति श्री हरिवंश, कई संसद सदस्यों, पूर्व सदस्यों और अन्य गणमान्य व्यक्तियों ने भी श्री संगमा के प्रति अपनी गहरी आदर-अंजलि व्यक्त की। इस अवसर पर लोकसभा के महासचिव श्री उत्पल कुमार सिंह, राज्यसभा के महासचिव श्री पी.सी. मोदी के साथ-साथ दोनों सदनों के सचिवालयों के वरिष्ठ अधिकारियों ने भी उनके चित्र पर पुष्प अर्पित कर अपनी श्रद्धांजलि दी।
मेघालय के सुविख्यात नेता और प्रशासक
श्री पी.ए. संगमा पूर्वोत्तर क्षेत्र के एक बेहद प्रभावशाली सांसद, प्रशासक और राष्ट्रीय स्तर के राजनेता थे, जिन्होंने अपने लंबे सार्वजनिक जीवन में देश और विशेषकर पूर्वोत्तर के विकास में अभूतपूर्व योगदान दिया। वर्ष 1977 में पहली बार संसद में प्रवेश करने के बाद उन्होंने केंद्र सरकार के विभिन्न मंत्रालयों और विभागों में केंद्रीय मंत्री के रूप में जिम्मेदारी संभाली। इसके अलावा, उन्होंने अपने गृह राज्य मेघालय के मुख्यमंत्री के रूप में भी प्रदेश की कमान संभाली और प्रशासनिक दक्षता का उत्कृष्ट उदाहरण पेश किया। जन कल्याण और जनजातीय तथा वंचित समुदायों के उत्थान के लिए उनका समर्पण हमेशा प्रेरणादायक रहा है।
संसदीय इतिहास में ऐतिहासिक उपलब्धि
वर्ष 1996 में श्री संगमा को सर्वसम्मति से 11वीं लोकसभा का अध्यक्ष चुना गया था। यह संसदीय इतिहास में एक ऐतिहासिक क्षण था क्योंकि वह विपक्ष के पहले ऐसे सदस्य बने जिन्होंने लोकसभा अध्यक्ष जैसे गरिमामयी पद का कार्यभार संभाला। एक पीठासीन अधिकारी के रूप में संसदीय नियमों और प्रक्रियाओं के उनके गहरे ज्ञान, सदन की गरिमा को बनाए रखने की उनकी प्रतिबद्धता तथा लोकतंत्र को मजबूत करने के उनके निरंतर प्रयासों के लिए उन्हें देश भर में व्यापक रूप से सम्मान मिला। उन्होंने विधानमंडलों में महिलाओं के प्रतिनिधित्व को बढ़ावा देने और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अंतर-संसदीय संबंधों को मजबूत करने में भी एक प्रमुख भूमिका निभाई।
श्रमिकों और वंचितों के मसीहा
अपने संपूर्ण राजनीतिक जीवन के दौरान श्री संगमा नौ बार लोकसभा के सदस्य चुने गए। वह हमेशा श्रमिक वर्ग, शोषितों और समाज के उपेक्षित वर्गों के कल्याण के प्रति समर्पित रहे, जिसके लिए उनकी सर्वत्र सराहना की गई। पूर्वोत्तर राज्यों की संस्कृति और वहां के जनजातीय समुदायों के अधिकारों की आवाज उन्होंने हमेशा राष्ट्रीय मंचों पर मजबूती से उठाई। उनका देवलोकगमन 4 मार्च 2016 को नई दिल्ली में हुआ, लेकिन उनका राजनीतिक और सामाजिक योगदान देश की स्मृतियों में हमेशा अमर रहेगा।
संविधान सदन में सुशोभित उनका चित्र
श्री पी.ए. संगमा का यह तैलचित्र प्रसिद्ध कलाकार श्री विजेंद्र शर्मा द्वारा तैयार किया गया है। इस चित्र को संविधान सदन की बाहरी लॉबी में स्थापित किया गया है, जिसका अनावरण भारत के तत्कालीन राष्ट्रपति श्री प्रणब मुखर्जी ने 10 फरवरी 2014 को किया था। उनकी जयंती के अवसर पर आयोजित इस कार्यक्रम ने एक बार फिर उनके द्वारा राष्ट्र निर्माण में दिए गए अमूल्य योगदान को देश के सामने रेखांकित किया।