नई दिल्ली में 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का आगाज

भारत मंडपम में दुनिया के प्रमुख नेताओं का जमावड़ा, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विभिन्न देशों के राष्ट्राध्यक्षों के साथ की उच्चस्तरीय द्विपक्षीय बैठकें।

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  • नई दिल्ली के भारत मंडपम में 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का भव्य आयोजन किया गया है, जिसमें वैश्विक भू-राजनीतिक और आर्थिक मुद्दों पर चर्चा हो रही है।
  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन सहित कई शीर्ष वैश्विक नेताओं के साथ द्विपक्षीय बैठकें की हैं।
  • इस शिखर सम्मेलन में व्यापार, ऊर्जा सुरक्षा, तकनीकी सहयोग और बहुपक्षीय संस्थानों में सुधार जैसे अहम विषयों पर व्यापक मंथन किया जा रहा है।

समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली, 12 सितंबर: अंतरराष्ट्रीय कूटनीति और वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिहाज से एक बेहद महत्वपूर्ण आयोजन के तहत, नई दिल्ली के प्रगति मैदान स्थित ‘भारत मंडपम’ में 18वें ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन का औपचारिक शुभारंभ हो चुका है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मेजबानी में आयोजित इस दो दिवसीय महासम्मेलन में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन और दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामफोसा समेत कई वैश्विक नेता और प्रतिनिधि हिस्सा ले रहे हैं। इस साल ब्रिक्स का यह सम्मेलन ऐसे समय में हो रहा है जब दुनिया भर में भू-राजनीतिक तनाव, ऊर्जा सुरक्षा की चिंताएं और वैश्विक व्यापार के नए समीकरण तेजी से बदल रहे हैं। भारत की अध्यक्षता में इस मंच पर ‘ग्लोबल साउथ’ की आवाज को बुलंद करने और आपसी सहयोग को नई ऊंचाइयां देने पर विशेष जोर दिया जा रहा है।

प्रधानमंत्री मोदी और रूसी राष्ट्रपति पुतिन के बीच वार्ता

शिखर सम्मेलन के पहले दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ एक लंबी और व्यापक द्विपक्षीय बैठक की। दोनों नेताओं के बीच ऊर्जा क्षेत्र, रक्षा सहयोग, अंतरिक्ष तकनीक और द्विपक्षीय व्यापार को वर्ष 2030 तक 100 अरब डॉलर तक पहुंचाने के लक्ष्यों पर विस्तार से चर्चा हुई। रूस और भारत की यह रणनीतिक साझेदारी ऐसे समय में और अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है जब वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाएं भारी दबाव से गुजर रही हैं। इसके अलावा, ब्रिक्स बिजनेस फोरम को संबोधित करते हुए दोनों नेताओं ने इस बात पर सहमति जताई कि सदस्य देशों को अपनी राष्ट्रीय मुद्राओं में व्यापार को बढ़ावा देना चाहिए और पश्चिमी देशों की आर्थिक नीतियों के प्रभाव को संतुलित करने के लिए वैकल्पिक वित्तीय प्रणालियों को मजबूत करना चाहिए।

ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन का दौरा और क्षेत्रीय सुरक्षा

ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन की नई दिल्ली यात्रा इस सम्मेलन के सबसे बड़े आकर्षणों में से एक है, क्योंकि किसी ईरानी राष्ट्रपति की यह यात्रा कई वर्षों के अंतराल के बाद हो रही है। पीएम मोदी के साथ हुई उनकी बैठक के दौरान मध्य पूर्व के मौजूदा हालात, नौवहन की स्वतंत्रता (Freedom of Navigation) और नाविकों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चर्चा हुई। प्रधानमंत्री मोदी ने स्पष्ट किया कि भारत हमेशा से क्षेत्रीय शांति और कूटनीति के पक्ष में रहा है। ईरान के राष्ट्रपति ने भी भारत के साथ ऊर्जा, संस्कृति और प्रौद्योगिकी के क्षेत्रों में संबंधों को और अधिक प्रगाढ़ बनाने की इच्छा जताई, जिससे दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय रिश्तों को एक नई गति मिलने की पूरी उम्मीद है।

वैश्विक सुधार और बहुपक्षीय संस्थानों की जरूरत

शिखर सम्मेलन के एजेंडे में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) समेत अन्य प्रमुख वैश्विक संस्थानों में सुधारों का मुद्दा भी प्रमुखता से शामिल रहा है। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस के साथ अपनी बैठक के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने बहुध्रुवीय दुनिया (Multipolarity) की आवश्यकता पर बल दिया और कहा कि आज की समकालीन वास्तविकताओं को दर्शाने के लिए वैश्विक शासन प्रणालियों में बदलाव करना अनिवार्य हो गया है। इसके अलावा, जलवायु परिवर्तन, सतत विकास लक्ष्यों (SDGs), और डिजिटल अर्थव्यवस्था के क्षेत्र में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के सुरक्षित उपयोग को लेकर भी सदस्य देशों के बीच आम सहमति बनाने के प्रयास जारी हैं। यह शिखर सम्मेलन आने वाले समय में वैश्विक अर्थव्यवस्था की दिशा तय करने में एक मील का पत्थर साबित होगा।

 

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