हूती संघर्ष और मक्का पैक्ट पर बढ़ा कूटनीतिक तनाव
सऊदी अरब पर हूती विद्रोहियों के हमलों के बाद पाकिस्तान की चेतावनी पर ईरान की तीखी प्रतिक्रिया, मध्य पूर्व में गहराया नया संकट।
- यमन के हूती विद्रोहियों द्वारा सऊदी अरब पर लगातार किए जा रहे हमलों के बाद क्षेत्रीय तनाव काफी बढ़ गया है।
- पाकिस्तान ने सऊदी अरब के साथ हुए रक्षा समझौते (मक्का पैक्ट) के तहत ईरान को अपने प्रॉक्सी यानी हूती विद्रोहियों को नियंत्रित करने की चेतावनी दी है।
- इस पूरे घटनाक्रम और त्रिपक्षीय रक्षा समझौते के सक्रिय होने की संभावना पर ईरान ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है।
समग्र समाचार सेवा
इस्लामाबाद / तेहरान, 12 सितंबर: मध्य पूर्व (West Asia) में जारी व्यापक संघर्ष के बीच एक नया कूटनीतिक मोर्चा खुल गया है। यमन के ईरान-समर्थक हूती विद्रोहियों द्वारा सऊदी अरब की तेल और सैन्य संपत्तियों को निशाना बनाए जाने के बाद क्षेत्रीय सुरक्षा समीकरण तेजी से बदल रहे हैं। स्थिति तब और गंभीर हो गई जब पाकिस्तान ने सऊदी अरब के साथ हुए साझा रक्षा समझौते—जिसे ‘मक्का पैक्ट’ भी कहा जाता है—का हवाला देते हुए तेहरान को स्पष्ट संदेश दिया कि यदि हूती विद्रोहियों के हमले नहीं रुके, तो इस त्रिपक्षीय समझौते को सक्रिय करना पड़ सकता है। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री और शीर्ष अधिकारियों के बयानों के बाद से इस्लामिक देशों के बीच कूटनीतिक सरगर्मी काफी बढ़ गई है।
सऊदी अरब पर हूती हमलों और मक्का पैक्ट के मायने
हाल ही में हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब के कई शहरों और तेल प्रतिष्ठानों पर ड्रोन व मिसाइलों से बड़े हमले किए, जिसमें कई लोग घायल हो गए। इन हमलों के बाद रियाद ने अपनी संप्रभुता की रक्षा के लिए कड़ी प्रतिक्रिया देने का संकल्प लिया है। इसी पृष्ठभूमि में, पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्की के बीच पूर्व में हुए संयुक्त रक्षा समझौते (मक्का पैक्ट) की चर्चा जोर पकड़ने लगी है। इस समझौते के तहत किसी एक देश पर बाहरी आक्रमण को तीनों देशों पर हमला माना जाता है। पाकिस्तानी नेतृत्व ने चेतावनी दी है कि यदि संघर्ष की आंच सऊदी सीमा के भीतर फैलती है, तो इस रक्षा समझौते के प्रावधानों को लागू करने से पीछे नहीं हटेगा।
ईरान की कड़ी आपत्ति और क्षेत्रीय प्रतिक्रिया
पाकिस्तान द्वारा दी गई इस चेतावनी और सऊदी-हूती संघर्ष में कूटनीतिक दखल पर ईरान ने कड़ी नाराजगी जताई है। तेहरान का मानना है कि इस प्रकार के क्षेत्रीय समझौतों और बयानों से मध्य पूर्व में तनाव और अधिक भड़क सकता है। ईरानी अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि यमन के भीतर चल रहे संघर्ष से तेहरान का सीधा लेना-देना नहीं है, हालांकि कूटनीतिक हलकों में यह जगजाहिर है कि हूती विद्रोहियों को ईरान का वैचारिक और रणनीतिक समर्थन प्राप्त है। ईरान ने बाहरी ताकतों के सैन्य हस्तक्षेप की किसी भी संभावना को खारिज करते हुए चेतावनी दी है कि इससे खाड़ी देशों में शांति प्रक्रिया को स्थायी झटका लग सकता है।
ऊर्जा सुरक्षा और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर मंडराता खतरा
इस पूरे घटनाक्रम ने वैश्विक स्तर पर ऊर्जा सुरक्षा को लेकर चिंताएं फिर से बढ़ा दी हैं। लाल सागर और बाब अल-मंडब जलडमरूमध्य के पास समुद्री व्यापार और तेल टैंकरों की आवाजाही पहले से ही प्रभावित है। सऊदी अरब की मुख्य तेल पाइपलाइनों और बुनियादी ढांचे पर हमलों के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उछाल देखने को मिल रहा है। विश्लेषकों का मानना है कि यदि पाकिस्तान, सऊदी अरब और ईरान के बीच यह कूटनीतिक तनाव और गहराया, तो यह संघर्ष केवल यमन या खाड़ी तक सीमित न रहकर एक बड़े क्षेत्रीय युद्ध का रूप ले सकता है, जिससे निपटने के लिए संयुक्त राष्ट्र और अन्य वैश्विक मंचों को तुरंत मध्यस्थता करनी होगी।