असम के धुबरी में भारी अतिक्रमण विरोधी अभियान

असम के धुबरी जिले में प्रशासन का बड़ा बुलडोजर एक्शन, लगभग 750 परिवारों को सरकारी जमीन से हटाया गया, धार्मिक स्थलों को लेकर इलाके में तनाव।

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  • असम के धुबरी में प्रशासन ने चलाया व्यापक अतिक्रमण विरोधी अभियान।
  • करीब 650 बीघा सरकारी जमीन से 750 परिवारों को हटाया गया।
  • कार्रवाई के दौरान भारी पुलिस बल तैनात, कुछ जगहों पर बने तनावपूर्ण हालात।

समग्र समाचार सेवा
धुबरी (असम), 02 नवंबर: असम सरकार के अतिक्रमण हटाने के अभियान के तहत राज्य के धुबरी जिले में एक बहुत बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई को अंजाम दिया गया है। धुबरी जिले के आग्लागंज (Alamganj) क्षेत्र में जिला प्रशासन ने भारी पुलिस बल और दर्जनों बुलडोजरों की मौजूदगी में अवैध कब्जों के खिलाफ व्यापक अभियान चलाया। इस कार्रवाई के दौरान सरकारी और आरक्षित भूमि पर लंबे समय से बसे लगभग 750 परिवारों को वहां से हटाया गया। प्रशासन का यह कदम राज्य में सरकारी जमीनों को अतिक्रमण मुक्त कराने की नीति का एक हिस्सा है, जिसे लेकर राजनीतिक और सामाजिक हलकों में चर्चाएं तेज हो गई हैं।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह पूरी कार्रवाई धुबरी के आग्लागंज नवें ब्लॉक (Alamganj Ninth Block) क्षेत्र में की गई, जहां पिछले कई वर्षों से बड़ी संख्या में लोगों ने बस्तियां बसाई हुई थीं। प्रशासन का दावा है कि यह जमीनें सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज थीं और यहां अनधिकृत रूप से निर्माण किए गए थे।

लगभग 650 बीघा जमीन को कराया गया अतिक्रमण मुक्त

धुबरी जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों और पुलिस बल की देखरेख में चलाए गए इस अभियान के तहत लगभग 650 बीघा सरकारी भूमि को खाली कराया गया। कार्रवाई को तेजी से पूरा करने के लिए प्रशासन की ओर से लगभग 50 से 60 जेसीबी और excavators (बुलडोजर) को मैदान में उतारा गया था। इसके अलावा ट्रैक्टर-ट्रॉलियों और अन्य भारी मशीनों की मदद से तोड़े गए मकानों और मलबे को हटाने का काम किया गया।

इस पूरी प्रक्रिया के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए असम पुलिस के महानिदेशक (कानून-व्यवस्था), धुबरी के जिला कमिश्नर (District Commissioner) दिवाकर नाथ और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक सहित भारी मात्रा में सिविल प्रशासन और पुलिस के जवान तैनात रहे। हालांकि प्रशासन की ओर से यह भी बताया गया कि कुछ स्थानीय परिवारों ने नोटिस मिलने के बाद पहले ही स्वेच्छा से अपने आशियाने खाली कर दिए थे, लेकिन बड़े पैमाने पर की गई इस कार्रवाई से हजारों लोग प्रभावित हुए हैं।

धार्मिक स्थलों और संरचनाओं की तोड़फोड़ को लेकर क्षेत्र में तनाव

इस व्यापक तोड़फोड़ अभियान के दौरान उस वक्त स्थिति तनावपूर्ण हो गई जब बुलडोजर की कार्रवाई कुछ स्थानीय धार्मिक स्थलों, मजारों और कब्रिस्तानों तक पहुंची। ध्वस्तीकरण की इन कार्रवाइयों को देखकर मौके पर मौजूद सैकड़ों स्थानीय निवासी भावुक हो गए और उन्होंने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। कई स्थानों पर लोगों को नमाज अदा करते और दुआएं मांगते हुए भी देखा गया।

तनावपूर्ण माहौल को देखते हुए सुरक्षा बलों ने तुरंत मोर्चा संभाला और प्रदर्शनकारियों को शांत करने का प्रयास किया। स्थानीय लोगों का आरोप है कि इस प्रकार की कार्रवाई से उनकी धार्मिक भावनाओं और संस्कृति को ठेस पहुंची है। हालांकि, जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया कि कानूनी प्रावधानों और तय नियमों के तहत ही पूरी कार्रवाई को अंजाम दिया जा रहा है।

असम सरकार का अतिक्रमण विरोधी रुख

गौरतलब है कि मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के नेतृत्व वाली असम सरकार ने पिछले कुछ वर्षों से राज्य भर में सरकारी और वन भूमि को अवैध कब्जों से मुक्त कराने के लिए एक बड़ा अभियान चला रखा है। सरकार का तर्क है कि राज्य की जनसांख्यिकी संतुलन, पर्यावरण संरक्षण और विकास कार्यों के लिए सरकारी जमीनों को अतिक्रमण मुक्त कराना बेहद आवश्यक है। सरकार के इन अभियानों के तहत पिछले कुछ समय में राज्य के विभिन्न जिलों जैसे नगांव, गोलाघाट, होजाई और अब धुबरी में बड़े पैमाने पर बेदखली की कार्रवाई की जा चुकी है।

विपक्षी दलों और मानवाधिकार संगठनों ने सरकार की इन कार्रवाइयों की आलोचना करते हुए कहा है कि बिना उचित पुनर्वास के इस तरह की बेदखली से गरीब परिवारों के सामने जीवनयापन का गंभीर संकट खड़ा हो जाता है। वहीं, दूसरी ओर शासन-प्रशासन का यह स्पष्ट रुख रहा है कि सरकारी संपत्तियों पर किसी भी प्रकार का अवैध कब्जा बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

निष्कर्ष

धुबरी जिले में चलाया गया यह अतिक्रमण विरोधी अभियान असम सरकार की प्रशासनिक सख्ती का एक और बड़ा उदाहरण है। हालांकि इस तरह की कार्रवाइयों से एक तरफ जहां सरकारी भूमि को वापस लेने में सफलता मिल रही है, वहीं दूसरी तरफ विस्थापन और धार्मिक स्थलों के टूटने से उपजा तनाव स्थानीय स्तर पर एक गंभीर सामाजिक चुनौती बना हुआ है।

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