रैली से दिल्ली के व्यापारियों को 12 हजार करोड़ का नुकसान
चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (CTI) का दावा: रामलीला मैदान में राहुल गांधी के नेतृत्व में हुई 'इंडिया' गठबंधन की रैली के कारण दिल्ली के बाजारों को हुआ भारी व्यावसायिक घाटा।
- दिल्ली में विपक्षी रैली के कारण 10,000 से 12,000 करोड़ का नुकसान.
- पुरानी दिल्ली और मध्य दिल्ली के बाजारों में करीब 2.5 लाख दुकानें रहीं बंद.
- त्योहारी सीजन के दौरान माल की आवाजाही और ट्रांसपोर्ट व्यवस्था ठप.
समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली, 03 नवंबर: राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली में आयोजित राजनीतिक दलों के शक्ति प्रदर्शन और रैलियों का असर अब सीधे तौर पर शहर के कारोबार और अर्थव्यवस्था पर पड़ता दिखाई दे रहा है। चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (CTI) और विभिन्न व्यापारी संगठनों ने हाल ही में रामलीला मैदान में हुई विपक्षी ‘इंडिया’ (INDIA) गठबंधन की महारैली को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की है। व्यापारियों का दावा है कि इस मेगा रैली और उसके कारण उत्पन्न हुए ट्रैफिक जाम व सुरक्षा प्रतिबंधों के चलते दिल्ली के व्यापारिक जगत को लगभग 10,000 से 12,000 करोड़ रुपये का भारी-भरकम व्यावसायिक नुकसान उठाना पड़ा है।
त्योहारी सीजन (दीपावली और धनतेरस के आसपास के दिनों) के ठीक मुहाने पर हुए इस आयोजन के कारण देश की राजधानी के थोक और खुदरा बाजार बुरी तरह प्रभावित हुए, जिससे व्यापारियों में गहरी नाराजगी देखने को मिल रही है।
2.5 लाख से अधिक दुकानें रहीं बंद, बाजार पड़े सूने
चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (CTI) के अध्यक्ष बृजेश गोयल और अन्य व्यापारिक प्रतिनिधियों द्वारा साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार, रामलीला मैदान और उसके आसपास के 20 से 25 प्रमुख ऐतिहासिक बाजारों में लगभग 3 लाख दुकानें स्थित हैं। रैली के दौरान मचे अफरा-तफरी के माहौल और भारी भीड़ के आने की आशंका के चलते इनमें से करीब 80 प्रतिशत यानी लगभग 2.5 लाख दुकानें पूरी तरह बंद रहीं।
व्यापारियों का कहना है कि इस दौरान केवल दुकानें ही बंद नहीं रहीं, बल्कि जो बाजार खुले भी रहे वहां ग्राहकों की संख्या न के बराबर थी। दिल्ली के आसपास के राज्यों और शहरों से आने वाले खरीदार, सप्लायर और डीलर ट्रैफिक डायवर्जन व सुरक्षा पहरे के कारण राजधानी में प्रवेश नहीं कर सके। इसके चलते थोक बाजारों में होने वाला रोजमर्रा का करोड़ों रुपए का कारोबार पूरी तरह ठप होकर रह गया।
परिवहन और माल की ढुलाई पर लगा भारी ब्रेक
त्योहारी सीजन के इन दिनों में बाजारों में गिफ्ट आइटम्स, कपड़े, इलेक्ट्रॉनिक्स और अन्य उपभोक्ता वस्तुओं की भारी मांग होती है और माल की लोडिंग-अनलोडिंग का काम चरम पर होता है। लेकिन रैली के चलते उत्पन्न हुए ट्रैफिक प्रतिबंधों के कारण लगभग 5,000 छोटे-बड़े कमर्शियल वाहन, टेम्पो और ट्रक समय पर अपने गंतव्य तक नहीं पहुंच सके।
ट्रांसपोर्ट सेक्टर से जुड़े लोगों का भी कहना है कि ट्रकों के पहिए थमने से अकेले परिवहन क्षेत्र को ही डेढ़ हजार करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान झेलना पड़ा है। संकरी गलियों और मुख्य मार्गों पर बैरिकेडिंग होने के कारण माल गोदामों से दुकानों तक नहीं पहुंच पाया।
रैली से पहले दी गई थी चेतावनी, व्यापारियों में असमंजस
व्यापार संगठनों का कहना है कि रैली के आयोजन से पहले उन्होंने कांग्रेस नेता राहुल गांधी और संबंधित पक्षों को पत्र लिखकर यह अनुरोध किया था कि त्योहारी सीजन के इस संवेदनशील समय में या तो इस प्रकार के बड़े आयोजनों को टाला जाए या उनका स्थान बदला जाए, ताकि व्यापारियों को नुकसान न उठाना पड़े। इसके बावजूद जब रैली का आयोजन तय समय पर हुआ, तो शहर में एक दिन के लिए आंशिक रूप से लॉकडाउन जैसे हालात बन गए।
व्यापारियों ने सवाल उठाया है कि आखिर इस भारी-भरकम आर्थिक नुकसान की भरपाई कौन करेगा? त्योहारी सीजन के समय जब व्यापारी पूरे साल के मुनाफे की उम्मीद लगाते हैं, ऐसे समय में राजनीतिक प्रदर्शनों के कारण कारोबार का चौपट हो जाना उनके सामने रोजी-रोटी का गंभीर संकट पैदा कर देता है।
निष्कर्ष
दिल्ली के व्यापारियों द्वारा उठाए गए इन गंभीर मुद्दों ने एक बार फिर इस बहस को जन्म दे दिया है कि क्या घनी आबादी वाले शहरी क्षेत्रों और वाणिज्यिक केंद्रों के बीच इस तरह के बड़े राजनीतिक आयोजनों की अनुमति दी जानी चाहिए। राजनीतिक दलों की अपनी प्राथमिकताएं हो सकती हैं, लेकिन इसका खामियाजा आम व्यापारियों और अर्थव्यवस्था को भुगतना पड़ता है।