एसआईआर के बाद पांच राज्यों में 2.29 करोड़ मतदाता घटे

मतदाता सूचियों के विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (SIR) के बाद पांच राज्यों में कुल 2.29 करोड़ मतदाताओं के नाम हटे, अकेले उत्तर प्रदेश में सर्वाधिक 2.04 करोड़ नाम कटे।

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  • एसआईआर प्रक्रिया के बाद पांच राज्यों में 2.29 करोड़ मतदाता कम हुए।
  • उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा 2.04 करोड़ नाम सूची से हटाए गए।
  • मृत, स्थानांतरित और फर्जी मतदाताओं की छंटनी के बाद हुआ बड़ा बदलाव।

समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली, 03 नवंबर: भारत निर्वाचन आयोग (Election Commission of India) द्वारा देश के चुनिंदा राज्यों में चलाए गए मतदाता सूचियों के विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) के आंकड़े सामने आने के बाद राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। निर्वाचन आयोग द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार, एसआईआर (SIR) प्रक्रिया के पूरा होने के बाद देश के पांच प्रमुख राज्यों में मतदाता सूचियों से कुल 2.29 करोड़ से अधिक मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं।

इन सभी राज्यों में सबसे बड़ा फेरबदल उत्तर प्रदेश में देखने को मिला है, जहां अकेले यूपी में 2.04 करोड़ मतदाताओं के नाम सूची से काटे गए हैं। इस विशाल पैमाने पर हुए नाम कटने की प्रक्रिया ने प्रशासनिक और राजनीतिक स्तर पर नई बहस को जन्म दे दिया है।

क्यों और कैसे हटाए गए इतने बड़े पैमाने पर नाम?

निर्वाचन आयोग के सूत्रों और प्रशासनिक रिपोर्टों के अनुसार, मतदाता सूचियों को त्रुटिहीन, पारदर्शी और अपटूस डेट रखने के लिए यह विशेष पुनरीक्षण अभियान चलाया गया था। पिछले कई वर्षों से मतदाता सूची में मृत व्यक्तियों (Deceased Voters), स्थायी रूप से अन्य स्थानों पर स्थानांतरित हो चुके नागरिकों (Shifted Voters), और एक से अधिक स्थानों पर पंजीकृत डुप्लीकेट मतदाताओं (Duplicate Voters) के नाम दर्ज चले आ रहे थे।

बूथ लेवल अधिकारियों (BLO) और घर-घर सत्यापन (Door-to-door verification) अभियान के दौरान जब इन सभी प्रविष्टियों की गहन जांच की गई, तो भारी संख्या में फर्जी और अयोग्य प्रविष्टियां पाई गईं। आयोग का स्पष्ट कहना है कि लोकतंत्र को मजबूत करने के लिए यह आवश्यक है कि मतदाता सूची में केवल वास्तविक और जीवित मतदाताओं के ही नाम दर्ज हों।

उत्तर प्रदेश में सबसे अधिक 2.04 करोड़ नाम हटने के आंकड़े

देश के सबसे बड़े सूबे उत्तर प्रदेश में एसआईआर प्रक्रिया का असर सबसे व्यापक रूप से देखने को मिला है। राज्य में कुल 2.04 करोड़ मतदाताओं के नाम सूची से हटाए जाने की पुष्टि की गई है। प्रशासनिक अधिकारियों का मानना है कि यूपी जैसे विशाल राज्य में लंबे समय से पुनरीक्षण कार्य पूरी कठोरता से नहीं हो पाया था, जिसके कारण बड़ी संख्या में ऐसे नाम सूची में बने हुए थे जो या तो राज्य छोड़कर जा चुके थे या इस दुनिया में नहीं रहे थे।

इस भारी छंटनी के बाद अब उत्तर प्रदेश की संशोधित मतदाता सूची अधिक सटीक और पारदर्शी हो गई है, हालांकि विपक्षी दलों द्वारा इस पर विभिन्न प्रकार की प्रशासनिक शंकाएं भी व्यक्त की जा रही हैं, जिसका चुनाव आयोग पहले ही कानूनी हलफनामों के जरिए जवाब दे चुका है।

अन्य राज्यों में क्या रहे आंकड़े?

उत्तर प्रदेश के अलावा अन्य चार राज्यों में भी इस विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण अभियान के दौरान लाखों मतदाताओं के नाम सूची से बाहर किए गए हैं:

बिहार और पश्चिम बंगाल: इन चुनावी रूप से संवेदनशील राज्यों में भी बूथ स्तर पर सत्यापन के दौरान बड़ी संख्या में मृत और स्थानांतरित मतदाताओं के नाम हटाए गए।

अन्य राज्य: शेष अन्य राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को मिलाकर कुल मिलाकर लगभग 25 लाख से अधिक अयोग्य मतदाताओं के नाम हटाए गए, जिससे पांचों राज्यों का कुल आंकड़ा 2.29 करोड़ तक पहुंच गया।

अधिकारियों का कहना है कि नए और पात्र युवा मतदाताओं (18 वर्ष की आयु पूरी करने वाले) के नाम जोड़ने के लिए फॉर्म 6 के जरिए आवेदन लगातार स्वीकार किए जा रहे हैं, ताकि किसी भी पात्र नागरिक का मताधिकार प्रभावित न हो।

निष्कर्ष

एसआईआर (SIR) के बाद पांच राज्यों में 2.29 करोड़ मतदाताओं के नाम हटने की यह घटना भारतीय चुनावी इतिहास के सबसे बड़े प्रशासनिक अभ्यासों में से एक है। भले ही इसे लेकर राजनीतिक दलों के बीच वैचारिक और कानूनी मतभेद हों, लेकिन निर्वाचन आयोग के इस कदम से मतदाता सूचियों की शुचिता और पारदर्शिता को एक नया आयाम मिला है।

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